पुलिस के बैरिकेड्स गिराकर कलेक्ट्रेट परिसर में घुसे अन्नदाता
पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और कृषि केंद्र मेरठ (Meerut) से इस वक्त प्रशासन और किसानों के बीच टकराव की सबसे बड़ी और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है। अपनी विभिन्न लंबित मांगों, गन्ना भुगतान, बिजली दरों और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजे को लेकर आक्रोशित हजारों किसानों ने आज मेरठ कलेक्ट्रेट (Meerut Collectorate) पर धावा बोल दिया। स्थिति उस समय पूरी तरह से बेकाबू हो गई जब पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद उग्र किसानों ने सुरक्षा के सभी बैरिकेड्स और लोहे के गेटों को जबरन गिरा दिया और नारेबाजी करते हुए सीधे कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर घुस गए। किसानों के इस अचानक और आक्रामक प्रदर्शन से प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जिला मजिस्ट्रेट (DM) मौके पर आकर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं, तो वे किसी भी अधिकारी को उनके दफ्तर में नहीं बैठने देंगे और अनिश्चितकालीन तालाबंदी कर देंगे।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और हाथों में झंडे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान, पुलिस और प्रशासन के छूटे पसीने
सुबह से ही मेरठ के आसपास के ग्रामीण इलाकों और गांवों से हजारों की संख्या में किसान पगड़ी बांधे और हाथों में भारतीय किसान यूनियन तथा अन्य संगठनों के झंडे लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, बाइकों और पैदल ही मेरठ कलेक्ट्रेट की तरफ कूच करने लगे थे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने पहले ही कलेक्ट्रेट के चारों तरफ भारी पुलिस बल, पीएसी (PAC) के जवानों और बैरिकेड्स की मजबूत व्यवस्था कर रखी थी। लेकिन किसानों का गुस्सा इतना सातवें आसमान पर था कि उन्होंने पुलिस के तमाम सुरक्षा घेरों को रोंगटे हुए चकनाचूर कर दिया। कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर पुलिस और किसानों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद बेकाबू भीड़ को रोकने में पुलिस के पसीने छूट गए।
किसानों के प्रमुख मुद्दे: गन्ना बकाया भुगतान, आवारा पशुओं से फसल बर्बादी और भारी बिजली बिलों से त्रस्त अन्नदाता
कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर धरने पर बैठे किसान नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपते आ रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन के स्तर पर केवल झूठे आश्वासन ही मिल रहे हैं। किसानों की मुख्य मांगों में उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर अटका हुआ करोड़ों रुपये का बकाया गन्ना भुगतान समय पर ब्याज सहित दिलाना, आवारा पशुओं (नीलगाय और छुट्टा गोवंश) द्वारा बर्बाद की जा रही फसलों से निजात दिलाने के लिए ठोस नीति बनाना, और ग्रामीण इलाकों में सिंचाई के लिए कम दरों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, पिछले दिनों सड़क निर्माण और अन्य विकास परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित की गई जमीनों का उचित मुआवजा न मिलने से भी किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
डीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन जारी, अधिकारियों ने बुलाई आपात बैठक
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और कलेक्ट्रेट के भीतर किसानों के घुस आने के बाद जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने स्थिति को संभालने के लिए अपने कार्यालय में एक आपातकालीन बैठक बुलाई है और किसानों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, किसान नेता इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक जिलाधिकारी खुद मौके पर आकर ज्ञापन नहीं लेते और लिखित में उनकी मांगों को पूरा करने का समय निर्धारित नहीं करते, तब तक वे कलेक्ट्रेट परिसर से टस से मस नहीं होंगे। मेरठ के इस मुख्य प्रशासनिक केंद्र पर भारी पुलिस बल तैनात है और तनावपूर्ण माहौल के बीच किसानों का यह हल्लाबोल इलाके में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।