राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आज नहीं आएगी SIT की फाइनल रिपोर्ट? जांच के लिए 15 दिन और मिलने के दावों पर भड़की सपा
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और चंदे में गड़बड़ी का मामला इस समय देश की सियासत और धार्मिक गलियारों में गर्माया हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की समय सीमा आज खत्म हो रही थी, लेकिन सूत्रों के हवाले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। खबरों की मानें तो एसआईटी की जांच का दायरा काफी बड़ा होने के कारण इसकी समयावधि को 15 दिनों के लिए और बढ़ाया जा सकता है।
इस बीच, जांच रिपोर्ट में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक और धार्मिक मोर्चे पर तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (SP) और संतों ने इस जांच कमेटी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद का बड़ा हमला: 'इस SIT का कोई मतलब नहीं, बड़े लोगों को बचाया जा रहा है'
एसआईटी को अतिरिक्त समय दिए जाने की खबरों पर समाजवादी पार्टी की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। फैजाबाद लोकसभा सीट से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने उत्तर प्रदेश सरकार और जांच कमेटी को आड़े हाथों लिया है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "यह मामला करोड़ों-अरबों लोगों की अटूट आस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इस एसआईटी का कोई मतलब नहीं है। हमारे नेता अखिलेश यादव जी को इस पूरे मामले का खुलासा किए हुए 15 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कुछ भी ठोस नहीं हुआ है।"
सांसद ने आगे आरोप लगाया कि यह कोई सामान्य राज्य स्तरीय मामला नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय मुद्दा है। इस जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि मामले से जुड़े 'बड़े चेहरों' को बचाया जा सके। उन्होंने मांग की कि इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच कम से कम सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक स्वतंत्र कमेटी से कराई जानी चाहिए।
सीएम योगी पर लीपापोती का आरोप, आचार्य आनंद स्वरूप बोले- 'बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश'
एसआईटी की जांच अवधि बढ़ने पर केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि संत समाज भी आक्रोशित नजर आ रहा है। शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष आचार्य आनंद स्वरूप महाराज ने इस मामले पर अत्यंत तीखी टिप्पणी की है।
आचार्य आनंद स्वरूप ने कहा, "यह एसआईटी कभी भी दूध का दूध और पानी का पानी नहीं कर पाएगी। जब तक माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के निर्देश पर कोई उच्च स्तरीय कमेटी इसकी जांच नहीं करेगी, तब तक सच सामने नहीं आएगा।"
उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आगामी चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री भी इस मामले में लीपापोती करना चाहते हैं, ताकि सच दब जाए और बड़ी मछलियां आसानी से बच निकलें। उन्होंने मांग की कि इस महाघोटाले के अंतिम दोषी को हर हाल में जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।
क्यों बढ़ाई जा रही है SIT की समय सीमा? जानिए अंदर की बात
आपको बता दें कि जब इस विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था, तब उसे पूरे मामले की तह तक जाकर 15 दिनों के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया था। वह निर्धारित समय सीमा अब पूरी हो चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, बीते 30 जून को लखनऊ में एसआईटी अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई थी। इस बैठक में जांच अधिकारियों ने तर्क दिया कि चढ़ावे और चंदे में हुई गड़बड़ी के तार काफी गहरे हैं और जांच का दायरा उम्मीद से कहीं अधिक बड़ा है। पुख्ता सबूत जुटाने और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल करने के लिए टीम को और वक्त चाहिए। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एसआईटी को 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत की मंजूरी मिल गई है। अब टीम के सदस्य लखनऊ से सीधे अयोध्या के लिए रवाना होंगे, जहां अंतिम दौर की जांच के बाद रिपोर्ट सीधे सीएम को सौंपी जाएगी।