संस्कृति भी, रोजगार भी... धामी ने बताया कैसे लोक विरासत से जुड़ेंगे सीमांत गांव
संस्कृति भी, रोजगार भी... सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया कैसे उत्तराखंड के सीमांत गांव बनेंगे आत्मनिर्भर और लोक विरासत से जुड़ेंगे
उत्तराखंड की देवभूमि में संस्कृति, परंपरा और विकास का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जो देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बनता जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीमांत गांवों के विकास और उनकी प्राचीन लोक संस्कृति को सहेजने को लेकर एक बेहद दूरदर्शी और ठोस विजन सामने रखा है। उनका मानना है कि हमारे सीमांत गांव केवल देश की भौगोलिक सीमा के प्रहरी ही नहीं हैं, बल्कि वे हमारी मूल सांस्कृतिक धरोहर के जीवंत केंद्र भी हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार की नीतियों का मुख्य उद्देश्य इन दूरदराज के क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकना और वहां के युवाओं को उनकी अपनी मिट्टी में ही रोजगार के सुनहरे अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे 'संस्कृति भी बचे और रोजगार भी मिले' का सपना पूरी तरह साकार हो सके।
सीमांत गांवों के विकास और प्रधानमंत्री मोदी के विजन की परिकल्पना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर यह बात जोर देकर कहते रहे हैं कि देश के सीमांत गांव देश के 'अंतिम गांव' नहीं, बल्कि 'पहले गांव' हैं। इसी मूल मंत्र को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार धरातल पर काम कर रहे हैं। राज्य सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और विभिन्न क्षेत्रीय योजनाओं के तहत सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसी आधुनिक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, ताकि आधुनिकता के इस दौर में सीमांत गांवों का कोई भी युवा पीछे न छूटे। मुख्यमंत्री धामी का यह स्पष्ट मानना है कि जब तक हमारे सीमांत गांवों का आर्थिक और सामाजिक विकास मजबूत नहीं होगा, तब तक समग्र राज्य का विकास अधूरा है। इस विजन के तहत बॉर्डर एरिया के गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे योजना को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका के द्वार स्वतः खुल रहे हैं।
लोक विरासत, पारंपरिक कला और होमस्टे पर्यटन का महासंगम
उत्तराखंड के सीमांत जिलों जैसे उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में स्थानीय संस्कृति, लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और खान-पान की एक समृद्ध विरासत मौजूद है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि यहां की लोकल हेरिटेज और संस्कृति से भी रूबरू कराया जाना चाहिए। 'होमस्टे पॉलिसी' के जरिए पर्यटकों को सीधे सीमांत गांवों के ग्रामीण परिवेश में रहने, स्थानीय ऑर्गेनिक भोजन का आनंद लेने और वहां के पारंपरिक लोक नृत्यों व संगीत को करीब से जानने का मौका मिल रहा है। इससे पर्यटकों को एक नया और अनोखा अनुभव मिलता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं और युवाओं को अपने घर पर ही कमाई का एक बेहतरीन जरिया मिल जाता है। सरकार इन होमस्टे संचालकों को आसान शर्तों पर ऋण और प्रशिक्षण भी दे रही है, जिससे इस सेक्टर में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे।
वोकल फॉर लोकल और सीमांत उत्पादों को वैश्विक बाजार
स्थानीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए 'वोकल फॉर लोकल' का नारा आज उत्तराखंड के सीमांत गांवों में एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रशासन उन पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है जो सिर्फ इन्हीं पहाड़ी और ठंडे इलाकों में पैदा होते हैं या बनाए जाते हैं। इनमें औषधीय जड़ी-बूटियां, स्थानीय मोटे अनाज (मडुवा, झंगोरा), पहाड़ी दालें, हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र और पारंपरिक कलाकृतियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। सरकार इन उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी समितियों को लगातार मदद कर रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और बड़े बाजारों तक इन उत्पादों की पहुंच बनने से अब सीमांत के हुनरमंद कारीगरों और किसानों को उनके उत्पादों का उचित और बेहतरीन दाम मिल रहा है। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि दुनिया भर में उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को भी मजबूत कर रही है।
युवाओं के लिए स्वरोजगार और रिवर्स पलायन की नई लहर
लंबे समय से पहाड़ों से मैदानी इलाकों की तरफ होने वाला पलायन उत्तराखंड के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीतियों और दूरगामी सोच के कारण अब इस दिशा में सकारात्मक बदलाव दिखने लगा है। सीमांत गांवों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने से अब पहाड़ों की ओर 'रिवर्स पलायन' की एक नई और सुखद लहर देखने को मिल रही है। जो युवा रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर रुख करते थे, वे अब अपने पैतृक गांवों में लौटकर आधुनिक तकनीक, कृषि, बागवानी, एडवेंचर टूरिज्म और होमस्टे के जरिए खुद का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। सरकार की विभिन्न युवा केंद्रित रोजगार योजनाओं और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था ने इसमें उत्प्रेरक का काम किया है। मुख्यमंत्री धामी का यह संकल्प है कि उत्तराखंड का हर सीमांत गांव आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने और वहां की आने वाली पीढ़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करते हुए एक समृद्ध भविष्य का निर्माण करे।