दिवाली से पहले देहरादून में पानी का संकट, बंजारावाला में लोग बोले- टैंकर मंगवाने के पैसे नहीं
दीपावली का त्योहार देश भर में खुशियां, उजाला और उमंग लेकर आता है, लेकिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बंजारावाला क्षेत्र के निवासियों के लिए इस बार की दिवाली मुश्किलों का सबब बन गई है। त्योहार की तैयारियों और साफ-सफाई के पीक सीजन में अचानक उभरे पेयजल संकट ने हजारों परिवारों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। बंजारावाला और उसके आसपास के दर्जनों मोहल्लों में पिछले कई दिनों से नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है। घरों में दिवाली की साफ-सफाई से लेकर पूजा-पाठ और दैनिक दिनचर्या के काम पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल संस्थान के अधिकारी शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में त्राहि-त्राहि मची हुई है।
टैंकर मंगवाने के पैसे नहीं और खाली पड़े हैं बर्तन
बंजारावाला क्षेत्र के मध्यमवर्गीय और निम्न-आय वर्ग के परिवारों की स्थिति सबसे अधिक दयनीय हो गई है। बाजार में प्राइवेट पानी के टैंकरों के दाम आसमान छू रहे हैं। स्थानीय निवासियों का दर्द छलक पड़ा है और उनका कहना है कि दिवाली के मौके पर राशन और बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदें या फिर हजारों रुपये देकर पानी का टैंकर मंगवाएं। कई परिवारों के पास टैंकर मंगवाने तक के पैसे नहीं हैं, जिसके चलते लोग सुबह से ही बाल्टियां और डिब्बे लेकर दूर-दराज के हैंडपंपों या सार्वजनिक नलों पर कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। पानी न मिलने के कारण छोटे बच्चों को स्कूल भेजने और बुजुर्गों की दिनचर्या में भारी व्यवधान आ रहा है। त्योहार की खुशियां अब मायूसी और आक्रोश में बदल चुकी हैं।
ट्यूबवेल खराबी और जल संस्थान की लापरवाही
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में मुख्य पेयजल आपूर्ति करने वाले ट्यूबवेल में आई तकनीकी खराबी इस पूरे संकट की वजह बनी हुई है। जल संस्थान को इस संबंध में कई दिन पहले ही सूचना दे दी गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने समय रहते मरम्मत का कार्य शुरू नहीं कराया। विभाग की इस घोर लापरवाही का खामियाजा अब बंजारावाला, कारगी और आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जब लोग जल संस्थान के दफ्तर में गुहार लगाने पहुंचते हैं, तो उन्हें केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता है। विभागीय स्तर पर सरकारी टैंकरों से जो पानी भिजवाया जा रहा है, वह इतने बड़े इलाके के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रहा है।
सड़कों पर उतरने को मजबूर आक्रोशित स्थानीय निवासी
पानी की कमी से बेहाल स्थानीय महिलाओं और बुजुर्गों का सब्र अब पूरी तरह से टूट चुका है। बंजारावाला के चौक-चौराहों पर जल संस्थान और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि दिवाली से पहले पेयजल आपूर्ति को सुचारू रूप से बहाल नहीं किया गया, तो वे मेन रोड पर चक्का जाम करेंगे और जल संस्थान के कार्यालय का घेराव करेंगे। त्योहार के माहौल में मूलभूत सुविधा न मिलने से पैदा हुआ यह जनाक्रोश प्रशासनिक तंत्र के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले देहरादून में अगर दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर भी पीने का पानी नसीब नहीं होगा, तो फिर ऐसे विकास का क्या फायदा?
निष्कर्ष: प्रशासन को तुरंत प्रभावी कदम उठाने की दरकार
देहरादून के बंजारावाला में गहराया यह जल संकट न केवल प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती को उजागर करता है, बल्कि आम आदमी की बेबसी को भी बयां करता है। दिवाली जैसे पावन पर्व पर लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन और जल संस्थान को युद्ध स्तर पर ट्यूबवेल की मरम्मत करानी होगी और जब तक सप्लाई बहाल नहीं होती, तब तक पूरे क्षेत्र में मुफ्त पानी के टैंकरों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थानीय स्तर पर बड़े नागरिक आंदोलन का रूप ले सकता है।