इससे अच्छा डीजे बजा लेते... दलेर मेहंदी को डांटने वाले मंत्री सुबोध उनियाल का बयान, कहा- उनसे चला नहीं जा रहा था

इससे अच्छा डीजे बजा लेते... दलेर मेहंदी को डांटने वाले मंत्री सुबोध उनियाल का बयान, कहा- उनसे चला नहीं जा रहा था

उत्तराखंड के प्रशासनिक और सांस्कृतिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत ही बड़ी, मसालेदार और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राज्य की राजनीति तक में तहलका मचा दिया है। देवभूमि उत्तराखंड के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने देश के जाने-माने पॉप स्टार और पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी के लाइव कंसर्ट को लेकर एक ऐसा विवादित और तीखा बयान दे दिया है, जिसने संगीत जगत और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। एक भव्य राज्य स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर दलेर मेहंदी की खराब परफॉर्मेंस और उनके सुस्त रवैये से बुरी तरह भड़के मंत्री सुबोध उनियाल ने खुलेआम यह तक कह डाला कि "इससे तो अच्छा होता कि हम मंच पर कोई बड़ा डीजे बजा लेते!" मंत्री का यह कड़वा और हमलावर बयान अब आग की तरह हर तरफ फैल चुका है, जिससे यह बहस छिड़ गई है कि क्या बड़े स्टार्स अब भारी-भरकम फीस लेने के बावजूद जनता को वह अनुभव नहीं दे पा रहे हैं जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।

कार्यक्रम में क्या हुआ कि आगबूला हो गए कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल

उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी को मुख्य आकर्षण के रूप में आमंत्रित किया गया था, ताकि वहां मौजूद हजारों की भीड़ का भरपूर मनोरंजन हो सके। कार्यक्रम की शुरुआत से ही दर्शकों और मंच पर मौजूद विशिष्ट अतिथियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा था, लेकिन जैसे-जैसे कंसर्ट आगे बढ़ा, दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस में वह पुरानी ऊर्जा और जोश गायब दिखाई दिया जिसके लिए वे दुनिया भर में जाने जाते हैं। मंत्री सुबोध उनियाल का आरोप है कि गायक न तो अपने प्रसिद्ध गानों पर सही तालमेल बैठा पा रहे थे और न ही दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर पा रहे थे। मंत्री ने बेहद नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता और सरकार ने इस आयोजन के लिए बहुत उम्मीदें लगाई थीं, लेकिन गायक के इस सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने पूरे कार्यक्रम के उत्साह पर पानी फेर दिया।

उनसे तो ढंग से चला भी नहीं जा रहा था, मंत्री ने कसा दलेर मेहंदी की फिटनेस पर तंज

विवाद को और अधिक हवा तब मिली जब कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी की शारीरिक फिटनेस और स्टेज प्रेजेंस पर सीधे तौर पर तीखा तंज कस दिया। उन्होंने कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि "मंच पर उनसे तो ढंग से चला भी नहीं जा रहा था, तो वे गाने गाकर जनता को क्या नचाएंगे?" मंत्री के इस सीधे और निजी हमले के बाद वहां मौजूद अधिकारी और दर्शक सन्न रह गए। सुबोध उनियाल ने कहा कि जब सरकारी खजाने से किसी कलाकार को इतनी भारी-भरकम रकम देकर बुलाया जाता है, तो जनता को भी उस स्तर का मनोरंजन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कलाकार को मंच पर पूरी ऊर्जा के साथ उतरना चाहिए, लेकिन दलेर मेहंदी की इस थकाऊ परफॉर्मेंस से बेहतर होता कि आयोजक एक अच्छा म्यूजिक सिस्टम और डीजे लगवा देते, जिससे कम से कम लोग खुशी से झूम तो पाते।

सरकारी पैसे और वीआईपी आयोजनों में कलाकारों के चयन पर उठे गंभीर सवाल

मंत्री सुबोध उनियाल के इस बेबाक बयान ने अब राज्य में होने वाले सरकारी और सांस्कृतिक आयोजनों के बजट तथा उनमें आमंत्रित किए जाने वाले बड़े कलाकारों की प्रासंगिकता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। अक्सर देखा जाता है कि बड़े नाम वाले गायकों को लाखों-करोड़ों रुपए की फीस देकर बुलाया जाता है, लेकिन कई बार वे मंच पर पूरी निष्ठा और ऊर्जा के साथ परफॉर्म नहीं करते हैं। आम जनता और स्थानीय कलाकारों का भी अब यही मानना है कि यदि भारी बजट खर्च करने के बाद भी निराशा ही हाथ लगनी है, तो ऐसे आयोजनों में स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस घटनाक्रम के बाद से सोशल मीडिया पर भी सुबोध उनियाल का यह बयान जमकर वायरल हो रहा है, जहां कुछ लोग मंत्री के इस स्पष्टवादी रवैये का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं दलेर मेहंदी के प्रशंसक इसे एक वरिष्ठ कलाकार का अनादर बता रहे हैं।

विवाद बढ़ने पर क्या बोले दलेर मेहंदी के प्रशंसक और आयोजक मंडल

इस पूरे तीखे बयानबाजी के सामने आने के बाद दलेर मेहंदी की टीम और उनके प्रशंसकों की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। प्रशंसकों का कहना है कि दलेर मेहंदी भारतीय संगीत उद्योग के एक लेजेंड हैं और बढ़ती उम्र या तकनीकी कमियों के कारण कभी-कभी मंच पर परफॉर्मेंस में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन इस तरह से सार्वजानिक रूप से उनका अपमान करना किसी मंत्री को शोभा नहीं देता। दूसरी तरफ, कार्यक्रम के आयोजक मंडल के अधिकारी इस स्थिति से बचने के लिए बीच-बचाव करते नजर आ रहे हैं और मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, मंत्री सुबोध उनियाल अपने रुख पर पूरी तरह से कायम दिख रहे हैं और उनका यह कड़ा बयान आने वाले समय में उत्तराखंड में आयोजित होने वाले सभी सरकारी कंसर्ट्स और सांस्कृतिक उत्सवों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी साबित हो सकता है।