अब हर मदरसे में रहेगी सरकार की निगरानी, बच्चों का कराना होगा रजिस्ट्रेशन, मौलवी को माननी होंगी ये बातें

अब हर मदरसे में रहेगी सरकार की निगरानी, बच्चों का कराना होगा रजिस्ट्रेशन, मौलवी को माननी होंगी ये बातें

देश भर में संचालित हो रहे मदरसों की कार्यप्रणाली, शिक्षा की गुणवत्ता और वहां अध्ययनरत बच्चों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से सरकार ने एक बेहद सख्त और दूरगामी फैसला लिया है। अब देश के सभी मदरसों को सरकार की सीधी निगरानी के दायरे में लाया जा रहा है ताकि पारदर्शी शिक्षा प्रणाली और छात्रों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पिछले काफी समय से मदरसों में दी जा रही शिक्षा के स्तर, अनुदान के पारदर्शी इस्तेमाल और वहां पढ़ने वाले बच्चों के आंकड़ों को लेकर तमाम तरह के सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं सभी विषयों को संज्ञान में लेते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और संबंधित राज्य सरकारों ने एक एकीकृत गाइडलाइन तैयार की है। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल गैर-मान्यता प्राप्त और अवैध रूप से चल रहे मदरसों पर नकेल कसेगी, बल्कि वहां पढ़ने वाले लाखों मासूम बच्चों को आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के तहत अब मदरसे में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र और छात्रा का संपूर्ण ब्योरा डिजिटल पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकृत (Registration) करना अनिवार्य कर दिया गया है। मदरसा संचालकों और मौलवियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने संस्थान में पढ़ रहे हर बच्चे का नाम, पता, आधार नंबर, अभिभावक का विवरण और उनके पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड को सरकारी डेटाबेस में दर्ज कराएं। इस अनिवार्य डिजिटल रजिस्ट्रेशन के पीछे सरकार की मुख्य मंशा यह है कि फर्जी नामांकनों और कागजी आंकड़ों के जरिए होने वाले वित्तीय घोटालों को पूरी तरह रोका जा सके। इसके साथ ही, बच्चों का आधार-लिंक्ड रजिस्ट्रेशन होने से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्र किसी भी प्रकार के मानव तस्करी, शोषण या बाल श्रम का शिकार न बनने पाएं। यदि कोई मदरसा प्रशासन तय समय सीमा के भीतर अपने छात्रों का ऑनलाइन ब्योरा दर्ज कराने में विफल रहता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है और सरकारी अनुदान तुरंत प्रभाव से रोका जा सकता है।

इस नई व्यवस्था के तहत केवल छात्रों का रजिस्ट्रेशन ही काफी नहीं होगा, बल्कि मदरसों का संचालन करने वाले मौलवियों, आलिमों और प्रबंधकों के लिए भी कड़े नियम व शर्तें तय कर दी गई हैं। मदरसा प्रबंधन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, कंप्यूटर और सामाजिक अध्ययन जैसे आधुनिक विषयों की बुनियादी शिक्षा भी दी जाए। इसके अलावा, मदरसों में पढ़ा रहे शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता (Qualification) और उनके चरित्र सत्यापन (Verification) को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मौलवियों को यह वचनबद्धता देनी होगी कि वे किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी विचारधारा या असंवैधानिक गतिविधियों को मदरसे के भीतर जगह नहीं देंगे। समय-समय पर जिला स्तर की प्रशासनिक टीमें और शिक्षा अधिकारी मदरसों का औचक निरीक्षण करेंगे और बुनियादी सुविधाओं, जैसे साफ पानी, शौचालय, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा मानकों की जांच करेंगे।

सरकार के इस बड़े फैसले के सामने आने के बाद से शिक्षाविदों, समाज सुधारकों और प्रबुद्ध नागरिकों की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे आधुनिक दुनिया की होड़ में पीछे छूट जाते थे क्योंकि उनके पास औपचारिक स्कूल बोर्डों जैसी मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं होती थी। अब सरकार की निगरानी और डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था लागू होने से इन बच्चों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) या राज्य के बेसिक शिक्षा बोर्डों से जोड़ना बेहद आसान हो जाएगा। इससे इन बच्चों के लिए भविष्य में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सम्मानजनक नौकरियों के रास्ते खुल सकेंगे। हालांकि, कुछ पारंपरिक संगठनों ने इस निर्णय पर शुरुआती हिचकिचाहट दिखाई है, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि यह कदम किसी धर्म या आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के हर बच्चे को उसका संवैधानिक और उज्ज्वल भविष्य देने का एक निष्पक्ष प्रयास है।