बदरीनाथ धाम में कैसी चल रही तैयारियां? पूजा के बाद सीएम धामी ने खुद लिया जायजा
उत्तराखंड के प्रख्यात और विश्व प्रसिद्ध हिमालयी धामों में शुमार बदरीनाथ धाम में इन दिनों शीतकाल के लिए कपाट बंद होने की प्रक्रिया और आगामी व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। चारधाम यात्रा के अंतिम चरण और सर्दियों के मौसम के आगमन से पहले राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद देवभूमि पहुंचकर व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया है। मुख्यमंत्री के इस जमीनी दौरे और व्यक्तिगत निगरानी ने यह साबित कर दिया है कि सरकार तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुविधाओं और धाम की पवित्रता को लेकर कितनी गंभीर है। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आने के साथ ही देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है, जिसे नियंत्रित करने और सुगम बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बदरीनाथ दौरा और समीक्षा बैठक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बदरीनाथ धाम पहुंचकर सबसे पहले भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए और देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर समिति के पदाधिकारियों, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में मुख्य रूप से मास्टर प्लान के तहत चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों, श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति और यातायात प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कपाट बंद होने की प्रक्रिया से पहले सभी विकास कार्य तय समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
मास्टर प्लान के तहत हो रहे विकास कार्यों की प्रगति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल बदरीनाथ मास्टर प्लान के पहले और दूसरे चरण के तहत इन दिनों तेजी से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने खुद मौके पर जाकर इन सभी विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, आस्था पथ, मास्टर प्लान के तहत बनने वाली चौड़ी सड़कों और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विकसित किए जा रहे आधुनिक यात्री विश्राम ग्रहों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि धाम की पौराणिक और आध्यात्मिक सुंदरता पर किसी भी तरह की आंच न आए। स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों से बातचीत करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार बदरीनाथ धाम को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक और आधुनिक सुविधाओं से लैस तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
शीतकालीन कपाट बंद होने की प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजाम
बदरीनाथ धाम के कपाट हर साल सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण बंद कर दिए जाते हैं, जिसके बाद भगवान बद्रीविशाल की उत्सव डोली उनके शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करती है। इस वर्ष भी कपाट बंद होने की निश्चित तिथि नजदीक आ रही है, जिसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखे जाएं और मौसम के मिजाज को देखते हुए लगातार मॉनिटरिंग की जाए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हेल्थ सेंटर्स पर पर्याप्त मात्रा में दवाइयां और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं।
तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं और प्रशासनिक मुस्तैदी
इस साल चारधाम यात्रा के दौरान रिकॉर्ड तोड़ संख्या में तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ धाम पहुंचकर दर्शन लाभ प्राप्त किया है। यात्रा के अंतिम पड़ाव पर भी भक्तों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बनाया जाए ताकि बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को लंबी लाइनों में खड़े होने में परेशानी न हो। प्रशासन और स्थानीय पुलिस बल लगातार धाम में मुस्तैद रहकर व्यवस्थाओं को संभालने में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री के इस औचक और सक्रिय दौरे से प्रशासनिक अमले में भी पूरी तरह चुस्ती देखने को मिल रही है, जिससे यात्रा के सुरक्षित और सफल समापन की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।