मोबाइल छोड़िए, किताबों की दुनिया में खो जाइए, देहरादून में 23 अक्टूबर से लगने जा रहा किताब कौथिग
डिजिटल युग की इस अंधी दौड़ में जहां आजकल बच्चे, युवा और बुजुर्ग हर कोई मोबाइल स्क्रीन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की आभासी दुनिया में खोया हुआ नजर आता है, वहीं उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसा खूबसूरत शहर देहरादून एक बार फिर साहित्य, विचार और पन्नों की खुशबू से सराबोर होने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर आप भी दिन-रात मोबाइल फोन की नोटिफिकेशन और स्क्रीन की नीली रोशनी से मानसिक रूप से थक चुके हैं और मानसिक सुकून की तलाश में हैं, तो अपनी डिजिटल डिवाइस को किनारे रखकर पन्नों की इस खूबसूरत दुनिया में खो जाने का सबसे मुफीद वक्त आ चुका है। दून घाटी में 23 अक्टूबर से बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक 'किताब कौथिग' (पुस्तक उत्सव) का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। यह कौथिग केवल एक पुस्तक मेला भर नहीं है, बल्कि यह दूनवासियों और देश भर से आने वाले साहित्य प्रेमियों के लिए एक ऐसा सांस्कृतिक और साहित्यिक महाकुंभ है, जो हमारी पढ़ने की घटती आदतों को फिर से पुनर्जीवित करने का एक पावन प्रयास है।
उत्तराखंड की लोक भाषा और संस्कृति में 'कौथिग' शब्द का अर्थ होता है मेला, उत्सव या जहां बहुत से लोग खुशियां बांटने के लिए एकजुट होते हैं। इसी लोक भावना को संजोते हुए इस अनूठे पुस्तक मेले का नाम 'किताब कौथिग' रखा गया है। आयोजकों की सोच है कि जिस प्रकार गांवों में लगने वाले पारंपरिक कौथिग लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं और उनके जीवन में उल्लास भरते हैं, ठीक उसी प्रकार किताबों का यह मेला भी लोगों को पन्नों की समृद्ध विरासत, कला और साहित्यिक चर्चाओं से जोड़ने का एक बड़ा केंद्र बनेगा। 23 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस भव्य आयोजन में न केवल देश-विदेश के जाने-माने प्रकाशक अपनी सबसे नई और ऐतिहासिक किताबों के साथ स्टॉल लगाएंगे, बल्कि उत्तराखंड की आंचलिक बोलियों, जैसे गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी साहित्य व इतिहास से जुड़ी दुर्लभ पुस्तकों का भी एक विशाल और समृद्ध संग्रह यहां देखने को मिलेगा।
'किताब कौथिग' के इन बहुचर्चित दिनों के दौरान देहरादून का पूरा वातावरण साहित्यिक विमर्श और रचनात्मक बहसों से गूंज उठेगा। इस भव्य महोत्सव में देश के कई प्रख्यात लेखक, उपन्यासकार, कवि, पत्रकार और इतिहासकार शिरकत करेंगे। प्रतिदिन अलग-अलग सत्रों में समकालीन साहित्य, डिजिटल युग में पठन-पाठन की चुनौतियां, पर्यावरण संरक्षण, हिमालयी संस्कृति और युवा लेखन जैसे गंभीर व प्रासंगिक विषयों पर खुली परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। आयोजकों ने विशेष रूप से स्कूली बच्चों और कॉलेज के युवाओं को मोबाइल की लत से दूर करने के लिए कई तरह के इंटरैक्टिव सेशंस, कहानी वाचन (Storytelling), कविता पाठ, थियेटर वर्कशॉप और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का खाका तैयार किया है। इससे युवा पीढ़ी को न केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच मिलेगा, बल्कि उनके भीतर किताबों के प्रति एक नई रुचि और गहरा प्रेम भी जाग्रत होगा।
जैसे-जैसे 23 अक्टूबर की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दून घाटी के विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और आम पाठकों के भीतर इस कौथिग को लेकर भारी उत्साह और उत्सुकता देखी जा रही है। त्योहारी सीजन और दिवाली के इस पावन आगमन पर आयोजकों ने एक बहुत ही सुंदर और प्रेरक संदेश दिया है। उनका कहना है कि इस बार हमें भौतिकवादी और महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बजाय अपने प्रियजनों, बच्चों और दोस्तों को बेहतरीन पुस्तकें उपहार में देनी चाहिए, क्योंकि किताबें ही एक इंसान की सबसे सच्ची, निस्वार्थ और स्थायी मित्र होती हैं। अगर आप भी इस खूबसूरत और ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनना चाहते हैं और किताबों की महकती दुनिया में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो 23 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस 'किताब कौथिग' में अपने पूरे परिवार और दोस्तों के साथ जरूर पहुंचे और अपनी पढ़ने की आदत को एक नई जीवन ऊर्जा दें।