उत्तराखंड के मदरसों में अब शुक्रवार नहीं, रविवार को होगी छुट्टी, धामी सरकार का बड़ा फैसला

उत्तराखंड के मदरसों में अब शुक्रवार नहीं, रविवार को होगी छुट्टी, धामी सरकार का बड़ा फैसला

देश के पहाड़ी राज्यों में शुमार देवभूमि उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों के गलियारों से एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लेते हुए यह निर्देश जारी किया है कि अब प्रदेश के सभी मदरसों में साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार के बजाय रविवार के दिन ही रखा जाएगा। उत्तराखंड सरकार का यह कदम राज्य में शिक्षा के मानकीकरण, प्रशासनिक एकरूपता और मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा प्रणाली के साथ मदरसों के पाठ्यक्रम व नियमों को जोड़ने की दिशा में एक बेहद ठोस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पारंपरिक रूप से देश के कई हिस्सों में मदरसों में जुमे यानी शुक्रवार के दिन साप्ताहिक छुट्टी रखने की परंपरा चली आ रही थी, जिसे बदलते दौर और सार्वभौमिक नियमों के अनुरूप अब उत्तराखंड सरकार ने बदलकर रविवार कर दिया है, जिससे राज्य में शिक्षा से जुड़े नियमों को लेकर एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

धामी सरकार के इस सख्त और ऐतिहासिक फैसले के पीछे की मुख्य वजहें

उत्तराखंड सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय अचानक या किसी राजनीतिक दबाव के तहत नहीं लिया गया है, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रही प्रशासनिक समीक्षा और शिक्षा सुधारों का एक बड़ा विजन काम कर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार यह बात कहते रहे हैं कि देवभूमि की सांस्कृतिक और पारंपरिक गरिमा को बनाए रखने के साथ-साथ राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में एक समान व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का भेदभाव या असमंजस न रहे। राज्य के मदरसों में पारदर्शी शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने, आधुनिक विषयों को अनिवार्य करने और अन्य सामान्य विद्यालयों की तरह ही साप्ताहिक अवकाश रविवार को रखने से बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई की निरंतरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार का यह मानना है कि जब देश और राज्य के बाकी सभी सरकारी व गैर-सरकारी स्कूल रविवार को बंद रहते हैं, तो मदरसों के बच्चों को भी उसी दिन अवकाश मिलना चाहिए ताकि वे समाज की मुख्यधारा के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

मदरसा बोर्ड के नियमों में बदलाव और शिक्षा के आधुनिकीकरण पर जोर

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अंतर्गत आने वाले इन संस्थानों में पिछले कुछ समय से लगातार सुधार की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें एनसीईआरटी (NCERT) के पाठ्यक्रम को लागू करने से लेकर शिक्षकों की योग्यता तय करने तक के कई बड़े कदम उठाए गए हैं। शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित किए जाने के इस नए निर्देश के बाद अब राज्य के सभी मदरसों को इस नियम का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के प्रशासनिक बदलावों से मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जुड़ने में आसानी होगी और वे भविष्य में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं या उच्च शिक्षा के मंचों पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य मदरसों को केवल पारंपरिक धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक सोच, तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक शिक्षा का एक बेहतरीन केंद्र बनाना है, जिससे वहां के युवाओं का भविष्य और अधिक उज्ज्वल हो सके।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और समाज के विभिन्न वर्गों की मिली-जुली राय

उत्तराखंड सरकार के इस बड़े फैसले के सामने आते ही राज्य की राजनीति में भी बयानबाजी और प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है, जहां एक तरफ इसे एक सराहनीय और समानता लाने वाला कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस पर अपनी आपत्ति भी जता रहे हैं। सत्ताधारी दल के नेताओं का तर्क है कि देश में एक देश, एक विधान और एक समान व्यवस्था होनी चाहिए, और यदि बाकी सभी स्कूल रविवार को बंद रहते हैं, तो मदरसों में भी यही नियम लागू होने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों का यह कहना है कि शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश की परंपरा बहुत पुरानी है और इसे धार्मिक स्वतंत्रता या सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाना चाहिए था। हालांकि, सरकार अपने इस फैसले पर पूरी तरह अडिग नजर आ रही है और उसका साफ कहना है कि जनहित, प्रशासनिक सुविधा और शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लिए यह कदम उठाना बेहद आवश्यक था।

देवभूमि में शिक्षा सुधारों की यह बयार और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी परिणाम

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने से लेकर मदरसों के आधुनिकीकरण और सख्त प्रशासनिक फैसलों तक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने लगातार ऐसे कई कड़े और बड़े फैसले लिए हैं जिन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मदरसों में शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक छुट्टी का यह नियम आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहां शिक्षा सुधारों को लेकर इस तरह की बहसें अक्सर छिड़ती रहती हैं। राज्य के अभिभावकों और आम जनता का एक बड़ा वर्ग इस फैसले का स्वागत कर रहा है क्योंकि उनका मानना है कि इससे बच्चों के शैक्षणिक कैलेंडर में एकरूपता आएगी और किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होगी। अंततः यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड के मदरसे इस नए नियम को किस प्रकार अपनाते हैं और आने वाले शैक्षणिक सत्र में इसके कितने सकारात्मक और दूरगामी परिणाम देखने को मिलते हैं।