ट्रैकिंग के रोमांच पर टूटा कुदरत का कहर, केदारताल ट्रैक पर 8 जिंदगियां बर्फीले बवंडर में गुम
उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में एडवेंचर और ट्रैकिंग का रोमांच उस वक्त एक भयानक तबाही में बदल गया जब केदारताल ट्रैक पर निकले दल पर प्रकृति का सबसे क्रूर रूप देखने को मिला। उत्तराखंड के शांत और बेहद खूबसूरत दिखने वाले पहाड़ पल भर में मौत का मंजर पेश करने लगे, जब अचानक उठे एक बर्फीले बवंडर ने आठ पर्वतारोहियों को अपनी आगोश में ले लिया। हिमालय की दुर्गम चोटियों पर मौसम का मिजाज ऐसा बदला कि ट्रैकिंग पर गए इन साहसी युवाओं को संभलने का एक मौका तक नहीं मिला। यह खबर सामने आते ही पूरे उत्तरकाशी और उत्तराखंड प्रशासन में हड़कंप मच गया है, जबकि लापता ट्रैकर्स के परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और हर कोई अब किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहा है।
केदारताल के ट्रैक पर एडवेंचर की चाहत में निकले थे जांबाज
गंगोत्री धाम के ऊपर लगभग 4,750 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित केदारताल ट्रैक को भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण और खूबसूरत ट्रैकिंग रूट्स में गिना जाता है। इस कठिन रास्ते पर अपनी हिम्मत आजमाने और प्रकृति की खूबसूरती को करीब से देखने के लिए आठ ट्रैकर्स का एक दल पूरी तैयारी के साथ रवाना हुआ था। गंगोत्री से चढ़ाई शुरू करते हुए दल के सदस्य काफी उत्साहित थे और सब कुछ तय योजना के मुताबिक ही चल रहा था। स्थानीय गाइड और बेस कैंप के अधिकारियों को भी उम्मीद थी कि यह दल अपने मिशन को तय समय पर पूरा कर सुरक्षित लौट आएगा, लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था और केदारताल पहुंचने से पहले ही उनकी राह में कुदरत का खौफनाक तूफान आकर खड़ा हो गया।
अचानक आए बर्फीले बवंडर ने पलभर में सब कुछ कर दिया तबाह
हिमालयी क्षेत्रों में उच्च ऊंचाई पर मौसम का कोई भरोसा नहीं होता और यही जोखिम इस बार जानलेवा साबित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और बेस कैंप से मिले शुरुआती इनपुट के मुताबिक, दोपहर के समय अचानक केदारताल रूट पर बर्फीली हवाएं तेज हो गईं और देखते ही देखते पूरे इलाके को एक विशाल बर्फीले बवंडर ने अपनी चपेट में ले लिया। तापमान पलभर में माइनस से काफी नीचे चला गया और दृश्यता पूरी तरह से शून्य हो गई। इस भयावह तूफानी बर्फीले बवंडर में ट्रैकिंग कर रहा आठ सदस्यों का दल रास्ता भटक गया और बर्फीली ढलानों के बीच कहीं गुम हो गया। बवंडर इतना तेज था कि आसपास लगे अस्थायी टेंट और सुरक्षा उपकरण भी हवा में उड़ गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें
घटना की सूचना जैसे ही उत्तरकाशी जिला प्रशासन तक पहुंची, बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य का खाका तैयार किया गया। स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की विशेष पर्वतारोही टीमों को तुरंत केदारताल रूट के लिए रवाना कर दिया गया है। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक खुद इस रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हालांकि, घटनास्थल की अत्यधिक ऊंचाई, अत्यधिक ठंड और लगातार खराब हो रहे मौसम के कारण बचाव दल को आगे बढ़ने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद लेने की योजना भी बनाई गई है, लेकिन विजिबिलिटी कम होने की वजह से हवाई रेस्क्यू में भी चुनौतियां आ रही हैं।
परिजनों की थमी सांसें और पूरे इलाके में छाया सन्नाटा
केदारताल ट्रैक पर आठ ट्रैकर्स के बर्फीले तूफान में फंसने और गुम होने की खबर जैसे ही उनके गृह नगरों और परिवारों तक पहुंची, वहां कोहराम मच गया। अपनों की सलामती की दुआ मांगने के लिए रिश्तेदार और दोस्त ईश्वर की शरण में हैं। उत्तरकाशी और गंगोत्री के स्थानीय लोग भी बचाव दल के सुरक्षित लौटने और लापता ट्रैकर्स की कुशलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय गाइडों का कहना है कि केदारताल का इलाका बेहद संकरा और फिसलन भरा है, जहां बर्फबारी के दौरान सही दिशा तलाशना लगभग असंभव हो जाता है। इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पहाड़ों में प्रकृति के आगे इंसान की हर तकनीक और तैयारी छोटी पड़ जाती है।
हाई-एल्टीट्यूड ट्रैकिंग पर सुरक्षा मानकों को लेकर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक घटना के बाद उत्तराखंड में हाई-एल्टीट्यूड ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन के सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अत्यधिक ऊंचाई वाले ट्रैकिंग रूटों पर मौसम की अग्रिम सटीक जानकारी और बेहतर सैटेलाइट संचार उपकरणों का होना बेहद जरूरी है। उत्तरकाशी प्रशासन ने फिलहाल एहतियात के तौर पर केदारताल समेत अन्य संवेदनशील उच्च हिमालयी ट्रैकिंग रूटों पर अग्रिम आदेश तक नए दलों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। अब सभी की निगाहें रेस्क्यू टीम पर टिकी हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर केदारताल की जमा देने वाली ठंड और बर्फ की परतों के बीच लापता ट्रैकर्स की तलाश में दिन-रात एक कर रही हैं।