दयारा बुग्याल का वो रहस्यमयी गोई बेस कैंप: सैकड़ों जवान, ड्रोन और गोताखोर नाकाम; अब NIM संभालेगी कमान

दयारा बुग्याल का वो रहस्यमयी गोई बेस कैंप: सैकड़ों जवान, ड्रोन और गोताखोर नाकाम; अब NIM संभालेगी कमान

उत्तराखंड के पहाड़ों की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित उत्तरकाशी का प्रसिद्ध दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) इन दिनों एक बेहद खौफनाक और अनसुलझे रहस्य का केंद्र बन चुका है। रामनगर (नैनीताल) की रहने वाली 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे को लापता हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन सैकड़ों जवानों के महा-सर्च ऑपरेशन के बावजूद अब तक उनका कोई नामोनिशान नहीं मिला है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, स्थानीय पुलिस, खोजी कुत्तों की टीम और अत्याधुनिक ड्रोन्स ने मिलकर नटीण के घने जंगलों, गहरी खाइयों और गुफाओं को छान मारा है, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब बबीता को सुरक्षित ढूंढ निकालने की आखिरी और सबसे बड़ी उम्मीद देश के सबसे प्रतिष्ठित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM - Nehru Institute of Mountaineering) के एक्सपर्ट्स पर टिकी है।

29 मई की उस खौफनाक रात आखिर क्या हुआ था? (The Disappearance Timeline)

एमबीए की छात्रा बबीता पांडे अपने दो दोस्तों, हरमनपाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह के साथ उत्तरकाशी घूमने के लिए निकली थीं। 25 मई को गंगोत्री क्षेत्र की यात्रा करने के बाद, यह दल करीब 3,500 मीटर की ऊंचाई पर फैले खूबसूरत दयारा बुग्याल ट्रैक पर आगे बढ़ा। 29 मई की रात को यह सभी ट्रैकर 'गोई बेस कैंप' (Goi Base Camp) के पड़ाव पर रुके थे। बताया जा रहा है कि इसी रात को गोई बेस कैंप के पास से बबीता अचानक और बेहद रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई। सुबह जब बबीता का कोई पता नहीं चला, तब जाकर प्रशासन को इस घटना की सूचना दी गई।

न कोई सुराग, न कोई आवाज; आखिर कहां गायब हुई बबीता?

प्रशासन ने बबीता की तलाश में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जिला प्रशासन और पुलिस के नेतृत्व में 150 से अधिक जवानों की संयुक्त टीमें दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। न सिर्फ जमीनी इलाकों बल्कि घने पहाड़ी जंगलों की हवाई निगरानी के लिए आधुनिक ड्रोन्स और हेलीकॉप्टर की मदद से लगातार हवाई सर्वे किया जा रहा है। मामले में नया मोड़ तब आया जब लापता होने से ठीक पहले का बबीता का एक सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) भी सामने आया, जिसमें वह फोन पर बात करती दिख रही थीं। शक के आधार पर पुलिस ने साथ गए दोनों दोस्तों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की है, और मनेरी थाने में बीएनएस (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की कड़ाई से जांच की जा रही है।

जांच में फूटा 'फर्जी ट्रेकिंग परमिट' का बड़ा घोटाला

बबीता पांडे की गुमशुदगी की जांच के दौरान पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन के हाथ एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा लगा है। जांच में सामने आया कि जिस ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से यह दल दयारा बुग्याल ट्रैक पर गया था, उसके आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल (एक्सप्लोर उत्तरकाशी) पर बबीता का नाम ही दर्ज नहीं था। हालांकि, वन विभाग को सौंपे गए दस्तावेजों में बबीता का नाम शामिल था। इस कथित 'फेक परमिट स्कैम' के सामने आने के बाद पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या सुरक्षा नियमों और ट्रेकिंग गाइडलाइंस की अनदेखी ने इस हादसे को बढ़ावा दिया।

रहस्यमयी झील और घने जंगलों में अब NIM की अग्निपरीक्षा

जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, बबीता के परिजनों की आंखें पथरा रही हैं और उनकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। जमीन और आसमान खंगालने के बाद अब एसडीआरएफ (SDRF) की डीप-डाइविंग टीमों ने इलाके की एक रहस्यमयी झील और जल स्रोतों के भीतर गोताखोरी कर जांच शुरू की है। वहीं, अब इस महा-सर्च ऑपरेशन की कमान 'नेहरू पर्वतारोहण संस्थान' (NIM) के बेहद अनुभवी और प्रशिक्षित पर्वतारोहियों को सौंपी गई है। एनआईएम के यह विशेषज्ञ उन बेहद दुर्गम और खड़ी पहाड़ियों, संकरी गुफाओं और गहरी खाइयों में उतरने की रणनीति बना रहे हैं, जहां सामान्य रेस्क्यू टीमों का पहुंचना नामुमकिन होता है।

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