केदारताल हादसे पर पीड़ित पिता का छलका दर्द, बोले- 'अगर समय पर मदद मिलती तो ......

केदारताल हादसे पर पीड़ित पिता का छलका दर्द, बोले- 'अगर समय पर मदद मिलती तो ......

उत्तराखंड के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों में होने वाले हादसे अक्सर अपने पीछे कभी न भरने वाले जख्म छोड़ जाते हैं। हाल ही में केदारताल ट्रैक के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक हादसे में अपनी जवान बेटियों को खोने वाले एक बेबस पिता का कलेजा उस वक्त फट पड़ा जब उन्होंने प्रशासन और रेस्क्यू टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पिता की नम आंखों से निकले ये शब्द हर किसी के दिल को चीर रहे हैं कि "मेरी बेटियां बच जातीं अगर रेस्क्यू टीम ने थोड़ी सी भी फुर्ती दिखाई होती।" इस दुखद और मार्मिक घटना ने एक बार फिर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग करने वाले सैलानियों की सुरक्षा और आपातकालीन आपदा प्रबंधन के इंतजामों पर बड़ी बहस छेड़ दी है, जिससे सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं।

केदारताल ट्रैक पर कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा और क्या थी पूरी पृष्ठभूमि

उत्तराखंड की हसीन लेकिन खतरनाक वादियों में केदारताल ट्रेकिंग रूट अपनी सुंदरता के साथ-साथ अपनी भीषण चढ़ाई और अप्रत्याशित मौसम के लिए जाना जाता है। कुछ दिनों पहले कुछ युवा ट्रैकर्स का एक दल इस दुर्गम रास्ते पर ट्रैकिंग के लिए निकला था, जिसमें कई उत्साही युवा और युवतियां शामिल थीं। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक मौसम ने करवट बदली और पहाड़ी इलाके में तेज बर्फीला तूफान तथा भूस्खलन जैसी स्थिति पैदा हो गई। तापमान अचानक शून्य से काफी नीचे लुढ़क गया और लगातार गिरते पत्थरों तथा बर्फ की चादर ने इन ट्रैकर्स को चारों तरफ से घेर लिया। इस अनहोनी की वजह से कई ट्रैकर्स गहरी खाई और बर्फीली चट्टानों के बीच फंस गए। जब तक स्थानीय लोगों और बेस कैंप तक इसकी सूचना पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कुछ युवा इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

पीड़ित पिता का छलका दर्द, रेस्क्यू टीम की लापरवाही और देरी पर लगाए बड़े आरोप

इस भीषण हादसे में अपनी प्यारी बेटियों को हमेशा के लिए खो चुके पिता का गुस्सा और दुख अब फूट पड़ा है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दुर्घटना के तुरंत बाद यदि सरकारी मशीनरी और रेस्क्यू टीमों ने तत्परता दिखाई होती, तो उनकी बेटियों की जान बचाई जा सकती थी। उनका कहना था कि हादसे की पहली सूचना मिलने के घंटों बाद तक कोई भी प्रशासनिक या बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा। परिजन खुद अपने स्तर पर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासनिक लालफीताशाही और कागजी कार्रवाई के चक्कर में बचाव अभियान शुरू होने में बहुत देर हो गई। पिता का यह भी कहना था कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों के लिए यदि आधुनिक हेलीकॉप्टर सेवा और ऑक्सीजन के पुख्ता इंतजाम तुरंत उपलब्ध कराए जाते, तो आज कई हंसते-खेलते घर उजड़ने से बच जाते।

उच्च हिमालयी ट्रैकिंग के दौरान सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर उठ रहे गंभीर सवाल

केदारताल और अन्य दुर्गम ट्रेकिंग रूट्स पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं ने उत्तराखंड के पर्यटन विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तैयारियों की पोल खोल दी है। हर साल हजारों की संख्या में देश-विदेश से युवा ट्रैकिंग के लिए इन इलाकों में आते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। न तो बेस कैंप पर डॉक्टरों की स्थायी टीम होती है और न ही आपात स्थिति में तुरंत संपर्क साधने के लिए सैटेलाइट कम्युनिकेटर्स की व्यवस्था होती है। कई बार अनधिकृत गाइड और बिना अनुमति के चलने वाले ग्रुप्स भी इन जोखिम भरे रास्तों पर निकल जाते हैं, जिन पर प्रशासन की कोई ठोस नजर नहीं रहती। इस हादसे के बाद अब यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि सरकार को ट्रैकिंग रूट्स के लिए बेहद कड़े नियम बनाने चाहिए और हर कैंप पर अत्याधुनिक लाइफ-सेविंग किट तथा तुरंत उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टर्स की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए।

न्याय की गुहार और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रशासन की बड़ी सीख

बेटियों को खोने वाले उस पिता की आंखें अब सिर्फ इस उम्मीद में नम हैं कि किसी अन्य माता-पिता को अपनी संतान का इस तरह से शव न देखना पड़े। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में हुई देरी और लापरवाही की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। स्थानीय लोग और पर्वतारोही भी अब खुलकर सामने आ रहे हैं और पहाड़ों पर जाने वाले हर एक सैलानी की सुरक्षा के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग पास प्रणाली अनिवार्य करने की मांग कर रहे हैं। जब तक सरकार और प्रशासन यात्रियों की जान की कीमत को समझकर जमीनी स्तर पर मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार नहीं करेंगे, तब तक प्रकृति की इन खूबसूरत वादियों में ऐसी दिल दहलाने वाली घटनाएं होती रहेंगी।