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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने खाड़ी देशों की उड़ानों पर ब्रेक लगा दिया है। युद्ध के इस खौफनाक साये के बीच पटियाला के तीन परिवार दुबई में फंस गए हैं। आलम यह है कि इन परिवारों के पास न तो अब पैसे बचे हैं और न ही जरूरी दवाइयां। फ्लाइट्स रद्द होने के कारण वे घर नहीं लौट पा रहे हैं और विदेशी धरती पर दाने-दाने को मोहताज होने की स्थिति में हैं।

फ्लाइट्स पर लगा ब्रेक, 6 सदस्य और 2 बच्चे अटके

पटियाला के अर्बन एस्टेट निवासी परवीन कुमार ने बताया कि वे अपनी पत्नी और अन्य सदस्यों के साथ 24 फरवरी को दुबई छुट्टियां मनाने गए थे। उनकी वापसी 28 फरवरी को तय थी, लेकिन क्षेत्रीय हमलों के कारण उड़ानें रद्द कर दी गईं।

अटके हुए सदस्य: परवीन कुमार के साथ शाम सिंह, वनीता, कुलदीप कौर, बलवीर सिंह और राजविंदर कौर शामिल हैं।

कनाडा जाने वाले बच्चे भी फंसे: उनके साथ दो बच्चे भी हैं जिन्हें दुबई से विनिपैग (कनाडा) जाना था, लेकिन ट्रांजिट के दौरान वे भी वहीं फंस गए।

अब उन्हें 5 मार्च की अमृतसर की फ्लाइट मिली है, लेकिन युद्ध के बिगड़ते हालात को देखते हुए उसके उड़ान भरने पर भी संशय बना हुआ है।

दवाइयों की किल्लत: मिर्गी और बीपी के मरीजों की बढ़ी जान पर आफत

इन परिवारों के सामने सबसे बड़ा संकट स्वास्थ्य का खड़ा हो गया है। परवीन कुमार खुद मिर्गी के मरीज हैं और उनके पास दवाइयां खत्म हो चुकी हैं। दुबई की फार्मेसियों ने बिना डॉक्टर की पर्ची (Prescription) के दवा देने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण उन्हें अपनी डोज आधी करनी पड़ रही है। उनके साथ मौजूद तीन अन्य सदस्य हाई ब्लड प्रेशर (BP) के मरीज हैं, जिनकी दवाइयां भी समाप्त होने की कगार पर हैं।

जेब खाली और होटल की सख्ती: आर्थिक संकट गहराया

परवीन कुमार के मुताबिक, वे जितनी धनराशि लेकर गए थे, वह होटल और खाने-पीने में खर्च हो चुकी है। होटल प्रबंधन से जब उन्होंने रियायत मांगी, तो उनसे एयरपोर्ट से फ्लाइट रद्द होने का लिखित प्रमाण मांगा गया। परवीन का कहना है कि उनके पास अब इतने पैसे भी नहीं बचे हैं कि वे टैक्सी करके एयरपोर्ट तक जा सकें और वहां से सर्टिफिकेट ला सकें।

दूतावास और प्रशासन से मदद की अपील

पीड़ित परिवारों ने भारतीय दूतावास (Indian Embassy) से संपर्क किया है, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक उन्हें केवल 'वेलकम' और 'थैंक यू' जैसे औपचारिक संदेश ही मिले हैं, कोई ठोस मदद नहीं पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए पटियाला के डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने आश्वासन दिया है कि प्रशासन उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित मंत्रालयों के संपर्क में है।