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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में छिड़े भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के सदस्य देशों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की स्थिति में नाटो देशों द्वारा दूरी बनाए जाने पर ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक चुनावी रैली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने चिर-परिचित अंदाज में गरजते हुए ट्रंप ने सहयोगी देशों को 'कायर' करार दिया। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि वे इस निर्णायक घड़ी में अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नहीं खड़े होते हैं, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

नाटो की 'चुप्पी' पर ट्रंप का कड़ा प्रहार

डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अमेरिका को अपने सहयोगियों की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब वे पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम दशकों से इन देशों की सुरक्षा का खर्च उठा रहे हैं, लेकिन जब ईरान जैसी ताकतों को सबक सिखाने की बात आती है, तो ये कायर देश गायब हो जाते हैं।" ट्रंप का यह निशाना विशेष रूप से यूरोपीय देशों की ओर है जो ईरान के साथ सीधे सैन्य संघर्ष में उतरने से कतरा रहे हैं। ट्रंप ने मंच से दहाड़ते हुए कहा, "हम इसे याद रखेंगे और समय आने पर हिसाब भी करेंगे।"

ईरान युद्ध और अमेरिका की घरेलू राजनीति में उबाल

ट्रंप के इस बयान को आगामी अमेरिकी चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने मौजूदा बाइडन प्रशासन पर भी हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका की कमजोरी के कारण ही नाटो देश आज आंखें दिखा रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि उनके शासनकाल में ईरान पूरी तरह दबाव में था, लेकिन अब हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि यदि वह राष्ट्रपति होते, तो ईरान की हिम्मत नहीं होती कि वह इस तरह की हिमाकत करे। ट्रंप के समर्थकों ने इस बयान का पुरजोर स्वागत किया है, जबकि कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयानों से नाटो गठबंधन में दरार आ सकती है।

क्या वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बनेगा नाटो का बिखराव?

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाटो देशों को दी गई इस खुली चेतावनी ने ब्रसेल्स और लंदन जैसे यूरोपीय मुख्यालयों में चिंता बढ़ा दी है। यदि अमेरिका और उसके सबसे पुराने सहयोगियों के बीच ईरान मुद्दे पर मतभेद बढ़ते हैं, तो इसका सीधा फायदा रूस और चीन जैसी महाशक्तियों को मिल सकता है। रक्षा जानकारों का कहना है कि ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को बदल सकता है। फिलहाल, नाटो के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पर्दे के पीछे तनाव साफ महसूस किया जा सकता है।