मकान की छत ढहने से 7 साल के मासूम की दर्दनाक मौत, कई शहर जलमग्न

मकान की छत ढहने से 7 साल के मासूम की दर्दनाक मौत, कई शहर जलमग्न

पाकिस्तान के कई प्रमुख शहरों और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों मौसम ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जहां लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से आसमान से बरस रही आफत के कारण कई निचले इलाकों में सैलाब जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे सड़कें पानी में डूब चुकी हैं और आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। मौसम विभाग की चेतावनियों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की व्यवस्थाएं इस आपदा के आगे पूरी तरह से लाचार और बेबस नजर आ रही हैं। जल निकासी के उचित प्रबंध न होने के कारण बारिश का गंदा पानी रिहायशी बस्तियों और बाजारों में भर गया है, जिससे लोगों के घरों का सामान खराब हो गया है और संक्रामक बीमारियों फैलने का खतरा भी मंडराने लगा है। मौसम के इस तांडव ने एक बार फिर विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी है और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मकान की जर्जर छत गिरने से मची चीख-पुकार, मासूम बच्चे की गई जान

इस मूसलाधार बारिश के बीच एक दिल दहला देने वाली और दर्दनाक दुर्घटना सामने आई है, जिसने एक हंसते-खेल्ते परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है। लगातार हो रही बारिश के कारण एक पुराने और कमजोर मकान की छत अचानक भरभरा कर नीचे आ गिरी, जिसके मलबे के नीचे पूरा परिवार दब गया। इस भीषण हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मलबे के नीचे दबने से एक 7 साल के मासूम बच्चे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस छोटी सी उम्र में बच्चे की अकाल मौत से पूरे इलाके में मातम पसर गया है और पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, जिसने एक बार फिर कमजोर बुनियादी ढांचे और जर्जर मकानों में रहने वाले गरीबों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन की नाकामी और जलमग्न इलाकों में बढ़ रही लोगों की मुश्किलें

भारी बारिश और इस तरह के दर्दनाक हादसों के बाद प्रभावित इलाकों के लोगों में स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। निवासियों का आरोप है कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद प्रशासन ने किसी भी प्रकार की एहतियाती कदम नहीं उठाए और न ही जर्जर मकानों को खाली कराने के लिए कोई उचित व्यवस्था की गई। कई रिहायशी इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं, जहां लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं और उन्हें खाने-पीने की बुनियादी चीजों के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। राहत और बचाव कार्य धीमा होने के कारण लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि हर साल बारिश के मौसम में इस तरह की आपदाएं आम जनजीवन को तबाह कर देती हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान निकालने में पूरी तरह विफल साबित होते रहे हैं। इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार और आम जनता प्रशासनिक मदद की आस लगाए बैठी है, जबकि मौसम के तेवर अभी भी नरम पड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं।