12वीं मंजिल से लटकी थी 3 साल की बच्‍ची, फ्लैट के गेट पर लगा था ताला, रेस्‍क्‍यू तक हलक में अटकी रहीं सबकी सांसे | Video

12वीं मंजिल से लटकी थी 3 साल की बच्‍ची, फ्लैट के गेट पर लगा था ताला, रेस्‍क्‍यू तक हलक में अटकी रहीं सबकी सांसे | Video

जिंदगी और मौत के बीच का फासला कभी-कभी महज कुछ सेकंड और एक मामूली सी चूक का होता है, जिसका अहसास करा देने वाला एक दिल दहला देने वाला और रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बहुमंजिला इमारतों यानी स्काईस्क्रेपर्स में रहने वाले लोगों के लिए जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा इस भयानक घटना को देखकर लगाया जा सकता है, जहां एक तीन साल की मासूम बच्ची अचानक बहुमंजिला रिहायशी इमारत की बारहवीं मंजिल की बालकनी से हवा में जा लटकी। इस हृदय विदारक दृश्य को जिस किसी ने भी अपनी आंखों से देखा, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और हर कोई सहमकर भगवान से उस नन्हीं जान की सलामती की प्रार्थना करने लगा। फ्लैट के मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगा हुआ था और भीतर मासूम बच्ची बिल्कुल अकेली थी, जिसके चलते वहां मौजूद लोगों की सांसें हलक में अटक गई थीं और हर सेकंड के साथ तनाव लगातार खतरनाक स्तर पर बढ़ता जा रहा था।

बारहवीं मंजिल पर अचानक क्या हुआ कि हवा में झूलने लगी मासूम बच्ची

घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज मामला एक ऊंची आवासीय सोसायटी की बारहवीं मंजिल का है, जहां यह तीन साल की बच्ची अपने घर के अंदर खेल रही थी। किसी वक्त बच्ची खेलते-खेलते बालकनी की रेलिंग के पास जा पहुंची और वहां बने खुले हिस्से या ग्रिल के बीच से अपना संतुलन खो बैठी, जिससे उसका शरीर हवा में झूलने लगा। गनीमत यह रही कि बच्ची के दोनों हाथ बालकनी की ऊपरी रेलिंग या छज्जे पर मजबूती से उलझ गए, वरना थोड़ी सी भी चूक होने पर वह सीधे नीचे जमीन पर आ गिरती, जिसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। जब आसपास के लोगों की नजर इस खौफनाक मंजर पर पड़ी, तो पूरे अपार्टमेंट परिसर में कोहराम मच गया और चीख-पुकार शुरू हो गई। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि इस विकट परिस्थिति में उस नन्हीं जान को सुरक्षित कैसे बचाया जाए क्योंकि फ्लैट का मुख्य दरवाजा बाहर से पूरी तरह बंद था।

फ्लैट के दरवाजे पर लगा था ताला, बाहर खड़े लोगों की अटकी रहीं सांसें

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चंद मिनटों में ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और हर कोई अपनी तरफ से बच्ची को बचाने की जुगत भिड़ाने लगा। जब पड़ोसियों ने अंदर घुसने की कोशिश की तो पता चला कि फ्लैट के गेट पर बाहर से ताला लगा हुआ था और घर के अंदर कोई भी वयस्क या अभिभावक मौजूद नहीं था। बाहर से दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने में लगने वाला वक्त उस मासूम की जिंदगी के लिए भारी पड़ सकता था क्योंकि बच्ची के हाथ लगातार कमजोर हो रहे थे और वह किसी भी वक्त नीचे फिसल सकती थी। वहां खड़े लोगों का कलेजा मुंह को आ रहा था क्योंकि वे बस नीचे खड़े होकर उस दर्दनाक तमेशे को देखने और ऊपर वाले से दुआ करने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे थे। बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर यह घटना यह सवाल खड़ा कर देती है कि बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले माता-पिता को बालकों की सुरक्षा को लेकर कितनी अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए।

सूझबूझ और साहस से भरी रेस्क्यू कार्रवाई, ऐसे बची मासूम की जान

जब नीचे खड़े लोगों ने देखा कि समय बहुत कम है और बच्ची कभी भी नीचे गिर सकती है, तो कुछ दिलेर और साहसी पड़ोसी तुरंत अपनी जान की परवाह किए बिना हरकत में आए। उन्होंने तुरंत ऊपर या नीचे के फ्लैट के रास्ते से या बालकनी के जरिए उस खतरनाक जगह तक पहुंचने का जोखिम भरा प्लान बनाया ताकि किसी तरह बच्ची तक हाथ पहुंचाया जा सके। कुछ स्थानीय निवासियों ने नीचे की तरफ चादरें या गद्दे तान दिए ताकि यदि भगवान न करें बच्ची गिरे तो उसे कुछ हद तक सुरक्षित किया जा सके, जबकि अन्य लोगों ने बालकनी के रास्ते से बेहद सावधानी पूर्वक उस बारहवीं मंजिल तक पहुंचने में सफलता हासिल कर ली। जैसे ही रेस्क्यू करने वाले शख्स ने सुरक्षित तरीके से अपना हाथ बढ़ाकर उस कांपती हुई बच्ची को अपनी बाहों में समेटा और बालकनी के भीतर खींचा, वहां मौजूद हजारों लोगों की अटकी हुई सांसें वापस लौटीं और चारों तरफ राहत की सांस के साथ तालियां गूंज उठीं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, पैरेंट्स के लिए एक बड़ा सबक

इस पूरी घटना का किसी ने अपने मोबाइल कैमरे से वीडियो बना लिया था, जो अब इंटरनेट और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को देखने वाले हर यूजर की आंखें नम हो रही हैं और वे उस बच्ची की सलामती के लिए भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे हैं, साथ ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। आधुनिक दौर में जब माता-पिता काम के सिलसिले में या बाहर जाते वक्त बच्चों को फ्लैट में अकेला छोड़ जाते हैं या बालकनी में बिना सुरक्षा जाल (सेफ्टी नेट) के छोड़ देते हैं, तो ऐसे हादसे होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इस दिल दहला देने वाले वाकये से हर अभिभावक को एक बहुत बड़ा सबक लेने की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी भी मासूम की जिंदगी इस तरह दांव पर न लगे और इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सके।