6.1 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, जापान के 3 शहरों में मचा हड़कंप, घर-दफ्तरों से निकलकर भागे लोग

6.1 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, जापान के 3 शहरों में मचा हड़कंप, घर-दफ्तरों से निकलकर भागे लोग

जापान में एक बार फिर कुदरत का खौफनाक मंजर देखने को मिला है, जब 6.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के झटकों ने पल भर में तीन बड़े शहरों को हिलाकर रख दिया। अचानक आए तेज झटकों से बहुमंजिला इमारतों, दफ्तरों और घरों में बैठे लोगों के बीच भारी अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही फर्श और पंखे जोर-जोर से हिलने लगे, लोग जान बचाने के लिए बदहवास होकर सड़कों और खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। रिक्टर पैमाने पर 6.1 की तीव्रता किसी भी इलाके को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए काफी मानी जाती है, जिससे तटीय और शहरी इलाकों में तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तुरंत सक्रिय हो गई हैं।

जापान के तीन प्रमुख शहरों में तेज भूकंप के झटके और दहशत की जमीनी हकीकत

प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में बसे जापान के लिए प्राकृतिक आपदाएं नई नहीं हैं, लेकिन 6.1 तीव्रता का यह ताजा भूकंप काफी विनाशकारी साबित हो सकता था। भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे काफी गहराई में दर्ज किया गया, जिससे इसकी तरंगें कई किलोमीटर दूर तक तेजी से फैलीं। देखते ही देखते तीन घनी आबादी वाले शहरों में झटके महसूस किए गए, जहां पल भर के लिए जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया। ऊंची-ऊंची व्यावसायिक इमारतों में लगे अलार्म बजने लगे और लिफ्ट सुरक्षा कारणों से खुद-ब-खुद रुक गईं। कई दफ्तरों में काम कर रहे कर्मचारी टेबल के नीचे छिप गए, तो वहीं रिहायशी इलाकों में लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को संभालते हुए खुले आसमान के नीचे पहुंच गए। सड़क पर चल रहे वाहनों की रफ्तार थम गई और चारों तरफ गाड़ियों के हॉर्न तथा साइरन का शोर गूंजने लगा।

बुलेट ट्रेन सेवा ठप, हाईवे बंद और ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ा बुरा असर

भूकंप के तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए प्रभावित इलाकों में परिवहन सेवाओं को रोक दिया गया। जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन (बुलेट ट्रेन) सेवाओं को ऑटोमैटिक पावर कट सिस्टम सक्रिय होने की वजह से तुरंत निलंबित कर दिया गया ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके। पटरियों और सुरंगों की सुरक्षा जांच के लिए रेलवे अधिकारियों की विशेष टीमें रवाना की गई हैं। इसके अलावा कई प्रमुख एक्सप्रेसवे और स्थानीय हाईवे पर वाहनों की आवाजाही को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है ताकि सड़कों में आई दरारों या पुलों की क्षति का पता लगाया जा सके। हवाई अड्डों पर भी उड़ानों के संचालन की समीक्षा की जा रही है, हालांकि अभी तक किसी बड़े रनवे नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सुनामी का खतरा, बिजली कटौती और आपातकालीन बुनियादी ढांचा जांच

तटीय शहरों में रहने वाले नागरिकों के लिए भूकंप का सबसे बड़ा डर सुनामी की लहरें होती हैं। भूकंप विज्ञान एजेंसी ने तुरंत समुद्र के जलस्तर पर नजर रखना शुरू कर दिया और तटीय इलाकों में चेतावनी वाले हॉर्न बजाकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। भूकंप के झटकों के कारण कुछ बिजली ट्रांसफार्मर और सब-स्टेशन प्रभावित हुए हैं, जिससे कई इलाकों में अंधेरा छा गया और संचार सेवाएं कुछ समय के लिए बाधित हुईं। ऊर्जा कंपनियों के इंजीनियरों को तुरंत ग्रिड और न्यूक्लियर पावर प्लांट्स की सुरक्षा जांच के काम में लगा दिया गया है। जापान के परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण ने बयान जारी कर बताया कि क्षेत्र में स्थित सभी परमाणु संयंत्र सुरक्षित हैं और उनके कूलिंग सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

आफ्टरशॉक्स का मंडराता खतरा, राहत-बचाव कार्य और नागरिकों के लिए अलर्ट

आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने भूवैज्ञानिकों की चेतावनी के बाद नागरिकों को अगले 48 से 72 घंटों तक अत्यधिक सतर्क रहने का निर्देश दिया है। मुख्य भूकंप के बाद अक्सर शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स (उत्तर-झटके) आते हैं, जो कमजोर हो चुकी इमारतों को गिराने के लिए काफी होते हैं। आपदा राहत टीमों, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को अलर्ट मोड पर रखा गया है। विभिन्न शहरों में बने शेल्टर होम और सामुदायिक केंद्रों को खोल दिया गया है ताकि जिन लोगों के घरों को नुकसान पहुंचा है, वे वहां शरण ले सकें। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल आधिकारिक रेडियो और टीवी चेतावनियों का पालन करें तथा अपने पास इमरजेंसी किट तैयार रखें।