19 साल बाद इजराइल में खत्म होगा नेतन्याहू का युग? राष्ट्रपति ने आइजेनकोट....

19 साल बाद इजराइल में खत्म होगा नेतन्याहू का युग? राष्ट्रपति ने आइजेनकोट....

इजराइल की राजनीति के गलियारों में इस समय एक ऐतिहासिक भूचाल आया हुआ है, जिसने मध्य पूर्व के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदलकर रख दिया है। देश की सत्ता पर पिछले लगभग दो दशकों से अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक सफर अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर आ पहुंचा है। इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हजोर्ग ने विपक्षी नेता और देश के पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट को नई सरकार के गठन के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राजनीतिक विश्लेषकों ने यह कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि क्या सचमुच 19 साल बाद इजराइल की सत्ता का यह प्रतिष्ठित सिंहासन किसी और के हाथों में जाने वाला है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल इजराइल के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारी हलचल पैदा कर दी है, जहां हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या देश का सबसे लंबा राजनीतिक दौर अब समाप्त होने की कगार पर है।

राष्ट्रपति इसाक हजोर्ग के इस ऐतिहासिक फैसले के मायने

इजराइल में हालिया चुनावों के बाद से ही राजनीतिक अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे, क्योंकि किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को संसद यानी नेसेट में अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हो पाया था। परिणामों के आने के बाद देश में लगातार गतिरोध बना हुआ था, जिसे तोड़ने के लिए राष्ट्रपति इसाक हजोर्ग ने सभी प्रमुख दलों के नेताओं के साथ लंबी और मैराथन बैठकें कीं। राष्ट्रपति के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना था कि देश में एक स्थिर सरकार बने जो घरेलू चुनौतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से भी प्रभावी ढंग से निपट सके। अंततः, विभिन्न विपक्षी दलों और कुछ अन्य गुटों के समर्थन के आधार पर राष्ट्रपति ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का न्योता देने का साहसिक कदम उठाया। यह निर्णय इजराइल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नेतन्याहू के लंबे और एकछत्र राजनीतिक प्रभुत्व को सीधी चुनौती देता है।

गादी आइजेनकोट का राजनीतिक कद और सेना से सियासत तक का सफर

गादी आइजेनकोट इजराइल के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं जिन्हें देश की सेना यानी आईडीएफ में उनके कड़े नेतृत्व और रणनीतिक फैसलों के लिए बेहद सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। वे इजराइल डिफेंस फोर्सेज के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं और देश की सुरक्षा तथा खुफिया तंत्र की बारीकियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। राजनीति में आने के बाद से ही उन्होंने अपनी एक ऐसी छवि बनाई है जो भ्रष्टाचार के आरोपों से दूर और देशहित को सर्वोपरि रखने वाली मानी जाती है। जब राष्ट्रपति ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया, तो उन्हें संसद में कुल 67 सांसदों का समर्थन प्राप्त होने का दावा पेश किया गया था। एक पूर्व सैन्य जनरल के रूप में आइजेनकोट की यह राजनीतिक छलांग इस बात का संकेत देती है कि इजराइल की जनता और राजनीतिक दल अब एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में हैं जो देश को ध्रुवीकरण और अनिश्चितता के दौर से बाहर निकाल सके।

बेंजामिन नेतन्याहू के युग पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा

बेंजामिन नेतन्याहू का नाम इजराइल की आधुनिक राजनीति का पर्याय बन चुका है, जिन्होंने कुल मिलाकर लगभग दो दशकों तक देश की बागडोर संभाली है। अपनी चतुर कूटनीति, भाषण कला और आक्रामक सुरक्षा नीतियों के दम पर उन्होंने कई बार बड़े राजनीतिक संकटों को मात दी है। हालांकि, इस बार हालात पूरी तरह से अलग और बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं। उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मुकदमों, आर्थिक मोर्चे पर असंतोष और हालिया चुनावों में उनके दक्षिणपंथी गुट के बहुमत से पिछड़ जाने के कारण उनकी कुर्सी हिलती हुई दिखाई दे रही है। यदि गादी आइजेनकोट अपने समर्थन दलों को एकजुट रखने में सफल हो जाते हैं और नेसेट में बहुमत साबित कर देते हैं, तो यह नेतन्याहू के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा और शायद अंतिम झटका साबित होगा, जिससे उनका 19 साल लंबा राजनीतिक आधिपत्य हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है।

गठबंधन सरकार की राह: आइजेनकोट के सामने आने वाली चुनौतियां

भले ही गादी आइजेनकोट को राष्ट्रपति की ओर से सरकार बनाने का न्योता मिल गया हो और उन्हें 67 सांसदों का शुरुआती समर्थन भी हासिल हो, लेकिन सत्ता की यह सीढ़ी चढ़ना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होगा। आइजेनकोट के इस गठबंधन ब्लॉक में सेंटर-लेफ्ट पार्टियां, अरब दल और कुछ अन्य राजनीतिक समूह शामिल हैं, जिनकी विचारधाराएं और प्राथमिकताएं एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं। इजराइल की राजनीति में रक्षा नीतियों, यहूदी धर्मगुरुओं को मिलने वाली विशेष छूट और फिलिस्तीन के साथ संबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर इन दलों के बीच गहरे वैचारिक मतभेद रहे हैं। यदि आइजेनकोट इन सभी अंतर्विरोधों और आपसी महत्वाकांक्षाओं को साधने में नाकाम रहते हैं, तो उनकी यह संभावित सरकार बनने से पहले ही बिखर सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन को बचाए रखना और उसे स्थिरता देना आइजेनकोट के लिए एक लोहे का चना चबाने जैसा साबित होगा।

इजराइल की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ने वाला असर

इजराइल इस समय देश के भीतर आंतरिक राजनीतिक कलह और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक दबावों के एक बेहद जटिल दौर से गुजर रहा है। देश की जनता लगातार जारी राजनीतिक अस्थिरता और महंगे चुनावों से ऊब चुकी है। ऐसे समय में जब देश को एक मजबूत और स्थिर सरकार की सबसे ज्यादा जरूरत है, यह सत्ता संघर्ष अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। निवेशकों का भरोसा बनाए रखने और अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत रखने के लिए इजराइल में एक स्थिर नेतृत्व का होना अनिवार्य है। चाहे सत्ता नेतन्याहू के हाथ में रहे या फिर गादी आइजेनकोट के नेतृत्व में कोई नया गठबंधन उभरे, दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इजराइल की नई सरकार अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय कूटनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाएगी।