बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने सौंपा इस्तीफा, क्या शेख हसीना से फोन कॉल पर बात करना पड़ा भारी?

बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने सौंपा इस्तीफा, क्या शेख हसीना से फोन कॉल पर बात करना पड़ा भारी?

पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammed Shahabuddin) ने अपने पद से इस्तीफा (Resignation) सौंप दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा देश के स्पीकर को भेज दिया है, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है। आधिकारिक तौर पर उनके इस बड़े कदम के पीछे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और बढ़ती बीमारियों का हवाला दिया गया है, जिसके चलते वे अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ बताए जा रहे हैं। लेकिन इस अचानक हुए इस्तीफे के पीछे राजनीतिक गलियारों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़ी एक कथित फोन कॉल और अंदरूनी सियासी दबाव की चर्चाएं भी जोर-शोर से चल रही हैं।

खराब सेहत बनी वजह या अंदरूनी सियासी दबाव?

राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से जारी बयानों में कहा गया है कि मोहम्मद शहाबुद्दीन लंबे समय से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और खराब सेहत के कारण उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल हो रहा था। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस इस्तीफे के तार हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और पुरानी अवामी लीग सरकार के समीकरणों से भी जुड़े हुए हैं। अप्रैल 2023 में तत्कालीन अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान ही शहाबुद्दीन को देश का राष्ट्रपति चुना गया था, और शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से वे सत्ता के शीर्ष पर बने हुए एकमात्र ऐसे प्रमुख पदाधिकारी थे।

क्या शेख हसीना से बातचीत बनी विवाद की असल जड़?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पूर्व पीएम शेख हसीना से जुड़ी कथित फोन कॉल इस इस्तीफे की असली वजह है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ समय पहले जब राष्ट्रपति इलाज के सिलसिले में विदेश गए थे, तब उन पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने भारत में मौजूद शेख हसीना से संपर्क साधने की कोशिश की थी। हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय ने इन दावों को पहले ही खारिज कर दिया था, लेकिन हाल ही में शेख हसीना की तरफ से दिसंबर तक स्वदेश लौटने के बयानों के बाद बांग्लादेश की राजनीति में तनाव काफी बढ़ गया था। माना जा रहा है कि मौजूदा सियासी समीकरणों और दलगत दबाव के चलते उनके लिए पद पर टिके रहना असंभव हो गया था।

अब आगे क्या? कौन संभालेगा देश की कमान?

संविधान के प्रावधानों और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत, संसद के स्पीकर ने कार्यभार संभाल लिया है और अगले 90 दिनों के भीतर देश में नए राष्ट्रपति के चुनाव की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस फेरबदल के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक नया दौर शुरू हो गया है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पड़ोसी देशों की भी पैनी नजर बनी हुई है।

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