दक्षिण कोरिया की तरफ मुंह बाए खड़ी हैं तोपें, किम जोंग उन की नई चाल, क्या अब नई जंग की बारी है?

दक्षिण कोरिया की तरफ मुंह बाए खड़ी हैं तोपें, किम जोंग उन की नई चाल, क्या अब नई जंग की बारी है?

कोरियाई प्रायद्वीप (Korean Peninsula) एक बार फिर से दुनिया के सबसे खतरनाक युद्धक्षेत्र में तब्दील होता नजर आ रहा है। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन (Kim Jong Un) ने एक बार फिर अपनी आक्रामक सैन्य नीतियों से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। हाल ही में मिली खुफिया रिपोर्ट्स और तटीय क्षेत्रों से सामने आई तस्वीरों ने दक्षिण कोरिया और उसके पश्चिमी सहयोगियों की नींद उड़ा दी है। उत्तर कोरियाई सेना ने दक्षिण कोरिया की सीमा के बिल्कुल नजदीक अपनी भारी-भरकम और घातक तोपें तैनात कर दी हैं, जिनका मुंह सीधे दक्षिण कोरियाई ठिकानों की तरफ है। इस अचानक और आक्रामक सैन्य तैनाती के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है, जिससे यह सवाल लाजिमी हो गया है कि क्या किम जोंग उन किसी बड़े युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।

सीमा पर भारी तोपों की तैनाती और प्योंगयांग की नई रणनीति

दक्षिण कोरियाई सैन्य सूत्रों और प्योंगयांग सीमा के पास स्थित वेधशालाओं से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया ने अपनी पश्चिमी समुद्री सीमा और कापंग काउंटी (Kaepung County) के पास तटीय क्षेत्रों में 122-मिलीमीटर की स्व-चालित हॉवित्जर (Self-propelled Howitzers) तोपें तैनात की हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि यह हथियार प्रणाली पारंपरिक और पुरानी श्रेणी की है, लेकिन इसे सीधे सीमा रेखा के मुहाने पर लाकर खड़ा करना बेहद असामान्य और खतरनाक कदम है। किम जोंग उन शासन द्वारा उठाए गए इस कदम को कूटनीतिक भाषा में एक स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है। इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में उत्तर कोरियाई सैनिकों द्वारा लगातार बंकरों को मजबूत करने, कांटेदार तार लगाने और सैन्य चौकियों को आधुनिक बनाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, जो यह दर्शाता है कि प्योंगयांग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह आक्रामक मूड में है।

संयुक्त राष्ट्र में पत्र युद्ध और आपसी तनातनी का बढ़ता दायरा

दोनों देशों के बीच यह ताजा तनाव सिर्फ सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी जंग छिड़ चुकी है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को एक औपचारिक पत्र भेजकर दक्षिण कोरिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्योंगयांग का दावा है कि सितंबर महीने में सीमा पर हुई बारूदी सुरंग (Landmine) की घटना पूरी तरह से सियोल द्वारा रची गई एक साजिश थी, जिसका उद्देश्य उत्तर कोरिया को बदनाम करना था। दूसरी ओर, दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी और सेना की जाँच में यह साबित हुआ है कि उत्तर कोरियाई सैनिकों ने ही सीमा पर हजारों की संख्या में बारूदी सुरंगे बिछाई थीं। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच उत्तर कोरिया के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन किम यो-जोंग (Kim Yo-jong) ने दक्षिण कोरियाई अधिकारियों और राष्ट्रपतियों को तीखी धमकियां देना जारी रखा है, जिससे कूटनीतिक बातचीत के सारे दरवाजे लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं।

कोरियाई प्रायद्वीप में बारूदी सुरंगों और लाउडस्पीकर प्रसारण का पुराना इतिहास

यदि हम हालिया इतिहास पर नजर डालें तो उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच का यह सीमा विवाद दशकों पुराना और बेहद संवेदनशील रहा है। पूर्व में भी जब कभी सीमा पर बारूदी सुरंग फटने से दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए थे, तब सियोल ने सीमावर्ती इलाकों में उत्तर कोरिया के खिलाफ लाउडस्पीकर से मनोवैज्ञानिक युद्ध और प्रसारण शुरू कर दिया था। इस बार भी सीमा पर बढ़ते तनाव और सैन्य गश्त के बीच दोनों पक्षों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। उत्तर कोरिया ने अपने सैनिकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि दक्षिण कोरिया की ओर से सुरक्षा का हल्का सा भी खतरा महसूस हो, तो वे बिना किसीि झिझक के तुरंत निर्णायक और कड़ी सैन्य कार्रवाई करें। इस प्रकार की कटु बयानबाजी और जमीनी स्तर पर सैन्य साजो-सामान का जमावड़ा किसी भी छोटी सी चिंगारी को एक बड़े युद्ध में बदल सकता है।

वैश्विक कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता बड़ा खतरा

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उत्तर कोरिया की यह हरकतें ऐसे समय में सामने आई हैं जब वैश्विक महाशक्तियां पहले से ही कई मोर्चों पर उलझी हुई हैं। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यासों के जवाब में किम जोंग उन लगातार बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और पनडुब्बी आधारित क्रूज मिसाइलों का परीक्षण कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग उन की यह नई चाल आगामी भू-राजनीतिक वार्ताओं में अपनी स्थिति मजबूत करने और वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित करने का एक दबाव तंत्र हो सकता है। हालांकि, जिस प्रकार से सीमा पर तोपों के मुंह दक्षिण कोरिया की तरफ खोले गए हैं, उसने एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था और शांति को खतरे में डाल दिया है। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जरिए इस तनाव को कम नहीं किया गया, तो कोरियाई प्रायद्वीप की यह सुलगती आग एक भयानक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है।