ओमान के समुद्र में तबाही: रूसी तेल टैंकर में ब्लास्ट के बाद 390 वर्ग किमी में फैला भीषण तेल रिसाव, मचा हड़कंप

ओमान के समुद्र में तबाही: रूसी तेल टैंकर में ब्लास्ट के बाद 390 वर्ग किमी में फैला भीषण तेल रिसाव, मचा हड़कंप

ओमान के समुद्री तट के पास एक बड़े पर्यावरण संकट की खबर सामने आई है। रूसी क्रूड ऑयल ले जा रहे एक प्रतिबंधित टैंकर में हुए रहस्यमयी विस्फोट के बाद समुद्र में भारी मात्रा में कच्चा तेल फैल गया है। ओमान सरकार की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह भयंकर तेल रिसाव (Oil Spill) लगभग 390 वर्ग किलोमीटर (करीब 150 वर्ग मील) के क्षेत्र में फैल चुका है, जो कि क्षेत्रफल के लिहाज से लगभग पूरे चेन्नई शहर जितना बड़ा इलाका है। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और स्थानीय प्रशासन के बीच हड़कंप मच गया है।

कैरोलीन बेजेंगी टैंकर हादसे की पूरी कहानी और रहस्यमयी ब्लास्ट

यह पूरा मामला प्रतिबंधित रूसी तेल ले जाने वाले 'कैरोलीन बेजेंगी' (Caroline Bezengi) नामक 900 फीट लंबे सुएजमैक्स श्रेणी के टैंकर से जुड़ा है। यह जहाज लगभग दस लाख बैरल रूसी कच्चा तेल लेकर एशिया की ओर जा रहा था। शिपिंग डेटा और समुद्री सुरक्षा स्रोतों के अनुसार, इसी साल जून महीने के शुरुआती दिनों में यमन के तटीय इलाके के पास इस जहाज ने मुश्किल में होने का सिग्नल भेजा था। शुरुआती जांच और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन में यह संकेत मिले हैं कि जहाज के भीतर एक जोरदार धमाका (विस्फोट) हुआ था। हालांकि, इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है कि यह कोई हमला था या तकनीकी खराबी, और न ही किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है। पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंधित होने के कारण इस जहाज को रूस के तथाकथित 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) का हिस्सा माना जा रहा था।

समुद्री जीवों और पर्यावरण पर मंडराया गंभीर खतरा

ओमान के पर्यावरण प्राधिकरण ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बताया है कि यह तेल का फैलाव देश के दक्षिणी प्रांत धोफ़ार के पास स्थित संवेदनशील हल्लनियात द्वीप समूह (Hallaniyat Islands) के उत्तर-पूर्व में तट से करीब 7 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गया है। सुल्तान हेथम बिन तारिक के शाही आदेश द्वारा पिछले साल ही इस द्वीप समूह को एक प्राकृतिक अभ्यारण्य घोषित किया गया था। यह क्षेत्र अरब सागर की दुर्लभ हंपबैक व्हेल, संकटग्रस्त पेट्रेल पक्षियों और अन्य समुद्री जीवों का प्राकृतिक आवास है। पर्यावरण संगठनों और ग्रीनपीस जैसी संस्थाओं ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर इस तेल रिसाव के और अधिक फैलने की आशंका जताई है। हालांकि, ओमान सरकार का कहना है कि वे इस आपदा से निपटने और इसके प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं, और फिलहाल स्थानीय डीसेलिनेशन (जल शोधन) प्लांटों तथा पर्यटन स्थलों पर कोई सीधा खतरा नहीं है।

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