बांग्लादेश ने सचमुच पकड़ा RAW एजेंट? ढाका में गिरफ्तार नागरिक ने खोली पुलिस की पोल
पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजधानी ढाका से एक बेहद सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' (RAW) का एजेंट बताकर गिरफ्तार किए गए एक भारतीय नागरिक ने कोर्ट के अंदर ऐसा जोरदार और बेबाक बयान दिया है, जिससे वहां की पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ गई हैं। अदालत की कार्रवाई के दौरान इस भारतीय ने वहां की पुलिस और जांच तंत्र के झूठ का पर्दाफाश करते हुए जमकर खरी-खोटी सुनाई और अपनी गिरफ्तारी को पूरी तरह फर्जी तथा राजनीति से प्रेरित करार दिया। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद से अंतरराष्ट्रीय मीडिया से लेकर कूटनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है कि आखिर किस मकसद के तहत एक आम भारतीय नागरिक को इस तरह के गंभीर और मनगढ़ंत मामलों में फंसाया जा रहा है।
क्या था पूरा मामला और कैसे ढाका पुलिस ने भारतीय नागरिक को बनाया अपना निशाना
यह पूरा वाकया उस समय शुरू हुआ जब बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सुरक्षा बलों ने अचानक कार्रवाई करते हुए एक भारतीय नागरिक को धर दबोचा और मीडिया के सामने यह ढोल पीटना शुरू कर दिया कि उन्होंने एक बहुत बड़े जासूस और भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' के सक्रिय एजेंट को दबोच लिया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद से ही वहां के स्थानीय मीडिया और जांच एजेंसियों द्वारा इसे एक बड़ी सफलता के रूप में पेश किया जा रहा था, ताकि यह साबित किया जा सके कि देश के भीतर विदेशी ताकतों का दखल किस हद तक बढ़ चुका है। लेकिन जैसे ही इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया और आरोपी भारतीय नागरिक को अपना पक्ष रखने का मौका मिला, तो उसने पुलिस के इन तमाम मनगढ़ंत और सनसनीखेज आरोपों की हवा निकालकर रख दी। उसने अदालत के समक्ष यह स्पष्ट रूप से बयान दिया कि उसका किसी भी खुफिया एजेंसी या जासूसी नेटवर्क से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है और उसे सिर्फ एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया है।
अदालत के कटघरे में भारतीय नागरिक का फूटा गुस्सा, पुलिस अधिकारियों को सुनाई खरी-खोटी
जब आरोपी भारतीय नागरिक को ढाका की स्थानीय अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, तो उसने बिना किसी डर के वहां की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के मुताबिक, उस भारतीय ने न्यायाधीश के सामने बेबाक अंदाज में कहा कि ढाका पुलिस पूरी तरह से झूठी और फरेबी कहानी गढ़ रही है ताकि वे अपनी नाकामी छुपा सकें। उसने कोर्ट को बताया कि उसे जबरन उठाया गया, उसके साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की गई और बाद में उस पर दबाव बनाकर ऐसे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए जिनसे उसका कोई लेना-देना नहीं था। अदालत के भीतर इस तरह भारतीय नागरिक द्वारा पुलिस के झूठ का पर्दाफाश करने का यह वीडियो और विवरण तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे बांग्लादेशी प्रशासन की किरकिरी चारों तरफ हो रही है।
राजनीतिक उठापटक और आंतरिक दबाव के बीच भारत विरोधी माहौल बनाने की नापाक साजिश
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से जिस तरह के राजनीतिक हालात बने हुए हैं और सत्ता परिवर्तन के बाद से वहां जैसी अस्थिरता देखने को मिली है, उसके चलते अक्सर भारत और भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने की पुरानी प्रवृत्ति उभरकर सामने आ जाती है। अपनी आंतरिक विफलताओं, आर्थिक बदहाली और जनता के गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए कई बार वहां की एजेंसियां इस तरह के हथकंडे अपनाती हैं, जिसमें किसी भी आम नागरिक को पकड़कर उस पर 'रॉ एजेंट' होने का ठप्पा लगा दिया जाता है। इस ताजा मामले ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि किस प्रकार राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए न्याय और कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उस भारतीय नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिल सके और उसकी सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न हो सके।
अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और द्विपक्षीय संबंधों पर मंडराते गंभीर सवाल
किसी भी देश में यदि किसी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसके लिए अंतरराष्ट्रीय संधियों और वियना कन्वेंशन के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसके तहत उस देश के उच्चायोग या दूतावास को तुरंत सूचना देनी होती है। लेकिन इस मामले में जिस तरह की संदिग्ध कार्यप्रणाली ढाका पुलिस द्वारा अपनाई गई है, वह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। अदालत में जिस तरह से भारतीय नागरिक ने पुलिस के झूठ की पोल खोली है, उससे यह साफ हो गया है कि इस गिरफ्तारी के पीछे कोई ठोस सबूत नहीं बल्कि केवल राजनीतिक प्रोपोगंडा काम कर रहा था। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या ऐतिहासिक फैसला सुनाती है और क्या उस निर्दोष भारतीय नागरिक को बाइज्जत बरी कर स्वदेश लौटने का रास्ता साफ होता है या नहीं, क्योंकि इस एक घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक असहजता को एक बार फिर से सतह पर ला दिया है।