अरामको से एयरपोर्ट तक निशाना: सऊदी अरब में खून-खराबे पर भारत का तीखा बयान, अमन की उठाई मांग

अरामको से एयरपोर्ट तक निशाना: सऊदी अरब में खून-खराबे पर भारत का तीखा बयान, अमन की उठाई मांग

पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के सबसे बड़े केंद्रों में शुमार सऊदी अरब की धरती पर जब अचानक धमाकों की गूंज सुनाई दी और तेल के दिग्गजों से लेकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों तक को निशाना बनाया जाने लगा, तो पूरी वैश्विक बिरादरी में हड़कंप मच गया। दुनिया के सबसे सुरक्षित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समझे जाने वाले इलाकों में इस तरह के विध्वंसक हमलों ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद वैश्विक कूटनीति के गलियारों में तनाव का पारा अचानक बहुत ऊपर चला गया है। इसी बीच, भारत सरकार ने सऊदी अरब में हुए इस खौफनाक खून-खराबे और नागरिक बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों का कड़ा संज्ञान लेते हुए एक बेहद सख्त और स्पष्ट बयान जारी किया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांति और क्षेत्रीय स्थिरता की वकालत करते हुए तुरंत हिंसा रोकने और मध्य पूर्व में अमन-चैन बहाल किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है, जिसकी गूंज अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साफ सुनाई दे रही है।

अरामको तेल प्रतिष्ठानों और एयरपोर्ट्स पर हमलों से थर्राया सऊदी अरब

सऊदी अरब के प्रमुख औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों पर हुए इन अचानक हमलों ने न सिर्फ वहां की सरकार बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और ऊर्जा बाजार से जुड़े तमाम देशों की नींद उड़ा दी है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक 'अरामको' (Saudi Aramco) के रिफाइनरी संयंत्रों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों से वहां भारी तबाही का मंजर देखने को मिला है। आसमान में काले धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए और सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत हाई अलर्ट पर रखना पड़ा। इस तरह के संवेदनशील और महत्वपूर्ण ठिकानों पर ड्रोन या मिसाइलों के जरिए किए गए हमलों का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ना लाजिमी था। खाड़ी क्षेत्र में अचानक भड़की इस आग ने शांतिप्रिय नागरिकों के मन में खौफ पैदा कर दिया है, और हर कोई यही सोच रहा है कि आखिर इस बढ़ते तनाव का अंत कहां जाकर होगा।

भारत का कड़ा रुख: आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ दो टूक संदेश

विदेशी धरती पर होने वाले किसी भी ऐसे कृत्य पर भारत हमेशा से अपनी जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति पर अडिग रहा है। सऊदी अरब में हुए इन हमलों के बाद नई दिल्ली की तरफ से जारी किया गया आधिकारिक बयान बेहद कड़े शब्दों में था। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस तरह के अंधाधुंध और हिंसक हमले किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं और शांतिपूर्ण देशों की संप्रभुता पर इस प्रकार के वार की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं और शीर्ष अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि निर्दोष नागरिकों की जान को खतरे में डालना और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बाधित करने वाली ताकतों के खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। भारत का यह रुख एक बार फिर यह साबित करता है कि वह क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता और आतंकवाद का कतई समर्थन नहीं करता है और हमेशा से बातचीत तथा कूटनीति के जरिए समस्याओं के समाधान का पक्षधर रहा है।

मध्य पूर्व में मंडराता युद्ध का खतरा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर

सऊदी अरब जैसे देश में इस तरह की सुरक्षा चूक और हमलों का होना केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था से है। मध्य पूर्व (Middle East) में जब भी तनाव बढ़ता है, उसका सबसे पहला असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर देखने को मिलता है। सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका से शेयर बाजारों से लेकर ऊर्जा बाजारों तक में उथल-पुथल मच जाती है। भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात करती हैं, खाड़ी देशों में शांति और स्थिरता का होना बेहद आवश्यक है। यदि यह हिंसा और लंबी खिंचती है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव दुनिया भर के करोड़ों आम उपभोक्ताओं की जेब पर महंगाई के रूप में पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत जैसे देश लगातार कूटनीतिक दबाव बना रहे हैं ताकि इस क्षेत्र में शांति के रास्ते खोले जा सकें।

कूटनीति और बातचीत ही एकमात्र रास्ता, भारत ने दोहराई पुरानी प्रतिबद्धता

अपने इस तीखे और स्पष्ट बयान के माध्यम से भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह याद दिलाया है कि युद्ध और रक्तपात से कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। मध्य पूर्व के देशों के बीच चल रहे आपसी मतभेदों और संघर्षों को समाप्त करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल बंद होना चाहिए और सभी पक्षों को तुरंत कूटनीतिक मंच पर बैठकर बातचीत की पहल करनी चाहिए। भारत के पारंपरिक रूप से सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों के साथ बहुत ही प्रगाढ़, मैत्रीपूर्ण और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में, जब भी वहां के नागरिकों या बुनियादी ढांचे पर कोई आंच आती है, तो भारत एक सच्चे और भरोसेमंद मित्र की तरह अपनी चिंता जाहिर करने से पीछे नहीं हटता है। दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ भी भारत के इस संतुलित और शांति-समर्थक रुख की सराहना कर रहे हैं।

अमन की बहाली के लिए वैश्विक एकजुटता की सख्त जरूरत

सऊदी अरब की धरती पर हुए इस खूनी संघर्ष ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि आधुनिक दुनिया में शांति कितनी नाजुक और महत्वपूर्ण चीज है। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय ताकतों ने इस हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आग पूरे क्षेत्र को अपनी आगोश में ले सकती है। भारत की ओर से उठाई गई अमन की इस मांग ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर यह संदेश दे दिया है कि मानवता, शांति और सुरक्षा ही किसी भी देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि खाड़ी देश और संबंधित पक्ष भारत और अन्य शांतिप्रिय देशों की इस अपील पर कितना गौर करते हैं और क्या वे हथियार छोड़कर एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटने का साहस जुटा पाते हैं या नहीं।