हाथों में हथौड़े... फ्रांस में रैली की आड़ में उपद्रव, पुलिस से भिड़े हुड़दंगी; कौन हैं ये नकाबपोश 'कैसर्स'?

हाथों में हथौड़े... फ्रांस में रैली की आड़ में उपद्रव, पुलिस से भिड़े हुड़दंगी; कौन हैं ये नकाबपोश 'कैसर्स'?

यूरोप का सांस्कृतिक केंद्र माना जाने वाला फ्रांस एक बार फिर हिंसा, आगजनी और भीषण उपद्रव की लपटों में घिर गया है। हाल ही में आयोजित एक सार्वजनिक रैली की आड़ में नकाबपोश हुड़दंगियों ने जिस तरह से तबाही मचाई है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। हाथों में लोहे के हथौड़े, छड़ें और पेट्रोल बम लिए इन उपद्रवियों ने सड़क पर खड़े वाहनों, सार्वजनिक संपत्तियों और दुकानों को निशाना बनाया। देखते ही देखते एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हिंसक संघर्ष में बदल गया। पुलिस बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस तीखी झड़प ने पूरे पेरिस और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर रैली के बीच अचानक यह नकाबपोश भीड़ कहां से आई और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले ये हिंसक तत्व कौन हैं।

सार्वजनिक संपत्तियों पर हमला और पुलिस के साथ तीखा संघर्ष

घटना के दौरान जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वे बेहद भयावह हैं। रैली शुरू होने के कुछ ही देर बाद काली पोशाक पहने और चेहरों को कपड़े या मास्क से ढके दर्जनों युवक भीड़ में शामिल हो गए। इनके हाथों में बड़े-बड़े हथौड़े थे, जिनसे इन्होंने बैंकों के शीशे, दुकानों के शो-विंडो और बस स्टॉप को चकनाचूर करना शुरू कर दिया। जब पुलिस कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने और उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो उपद्रवियों ने सीधे सुरक्षा बलों पर पत्थरों, जलते हुए पटाखों और बोतलों से हमला बोल दिया।

जवाबी कार्रवाई में फ्रांस की दंगा नियंत्रण पुलिस (CRS) को भारी मात्रा में आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और पानी की बोछारों (Water Cannons) का प्रयोग करना पड़ा। कई घंटों तक सड़क का वह हिस्सा किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा था। धुएं के गुबार और जलती हुई गाड़ियों की लपटों के बीच आम नागरिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी अपनी जान बचाकर भागते दिखाई दिए। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि उपद्रवियों की यह योजना पहले से तैयार की गई थी और उनका मकसद विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि केवल तबाही फैलाना था।

कौन हैं ये नकाबपोश 'कैसर्स'? जानिए फ्रांस के इन शातिर उपद्रवियों का सच

इस पूरी हिंसा के केंद्र में जो शब्द सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वह है 'कैसर्स' (Casseurs)। फ्रेंच भाषा में 'कैसर' शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है "तोड़फोड़ करने वाला" या "नष्ट करने वाला"। फ्रांस के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में यह कोई नया नाम नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनकी कार्यशैली बेहद आक्रामक और संगठित हो चुकी है। ये ऐसे अराजकतावादी, चरमपंथी या असामाजिक तत्वों का समूह होते हैं, जो किसी भी बड़े राजनीतिक, सामाजिक या मजदूर संघों के प्रदर्शन का फायदा उठाते हैं।

'कैसर्स' का मुख्य उद्देश्य शांतिपूर्ण आंदोलनों में सेंध लगाकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ अराजकता फैलाना होता है। ये लोग आमतौर पर 'ब्लैक ब्लॉक' (Black Bloc) रणनीति का पालन करते हैं, जिसके तहत सभी उपद्रवी सिर से पैर तक काले कपड़े पहनते हैं और अपने चेहरे ढके रखते हैं। ऐसा करने से भीड़ के भीतर पुलिस के लिए व्यक्तिगत रूप से किसी उपद्रवी की पहचान करना लगभग असंभव हो जाता है। ये हथौड़े और लोहे के औजार अपने साथ छिपाकर लाते हैं और पलक झपकते ही हमला करके भीड़ में गायब हो जाते हैं।

विरोध प्रदर्शनों की आड़ में अराजकता का बढ़ता नेटवर्क

फ्रांस में जब भी श्रम सुधारों, पेंशन नीतियों या महंगाई के खिलाफ बड़े पैमाने पर नागरिक सड़कों पर उतरते हैं, तब-तब 'कैसर्स' का यह समूह सक्रिय हो जाता है। आयोजकों का कहना है कि इन हुड़दंगियों का उनके मूल आंदोलन या मांगों से कोई लेना-देना नहीं होता। वे केवल हिंसा के जरिए मीडिया का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं और जनआंदोलन की साख को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि इनमें से कई युवा सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए आपस में नेटवर्क बनाते हैं। रैली की लोकेशन और समय तय होते ही ये रणनीतिक रूप से इलाकों में बंट जाते हैं। हथौड़ों का इस्तेमाल खासतौर पर दुकानों के मजबूत सुरक्षा शीशों और सीसीटीवी कैमरों को तोड़ने के लिए किया जाता है ताकि सबूत मिटाए जा सकें। यह संगठित तरीका दिखाता है कि यह महज अचानक भड़का गुस्सा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी आपराधिक कार्यशैली है।

गृह मंत्रालय का सख्त रुख और फ्रांस में कानून-व्यवस्था की गंभीर परीक्षा

घटना के बाद फ्रांस के गृह मंत्रालय और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस उपद्रव की कड़े शब्दों में निंदा की है। सरकार की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन हथौड़ों और हथियारों के साथ हिंसा करने वाले इन 'कैसर्स' के खिलाफ कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। पुलिस ने दर्जनों उपद्रवियों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी फुटेज तथा ड्रोन कैमरों की मदद से अन्य नकाबपोशों की पहचान की जा रही है।

हालांकि, स्थानीय नागरिकों और व्यावसायिक संगठनों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा और निराशा है। व्यापारियों का कहना है कि हर प्रदर्शन के दौरान उनके प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाता है, जिससे उन्हें करोड़ों यूरो का नुकसान उठाना पड़ता है। फ्रांस की सरकार के लिए अब चुनौती सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नहीं है, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को इन पेशेवर उपद्रवियों के चंगुल से बचाने की भी है। यदि समय रहते 'कैसर्स' के इस बढ़ते नेटवर्क पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह न केवल फ्रांस बल्कि पूरे यूरोप की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना रहेगा।