इस्लामी NATO की तैनाती को हूती ने धमाके से उड़ाया; सऊदी अरब की रणनीति पर उठे सवाल
मध्य पूर्व के सुलगते रेगिस्तान से एक बार फिर बेहद सनसनीखेज और रणनीतिक समीकरणों को पूरी तरह उलट देने वाली खबर सामने आई है, जहां यमन के कुख्यात हूती विद्रोहियों ने अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए इस्लामिक सैन्य गठबंधन यानी तथाकथित 'इस्लामी नाटो' की रणनीतिक तैनाती को जोरदार धमाके के साथ नेस्तनाबूद कर दिया है।
मध्य पूर्व में बड़ा भूचाल: हूती विद्रोहियों ने इस्लामिक सैन्य तैनाती को बनाया निशाना
खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में इस समय भारी हलचल मची हुई है, जिसका मुख्य कारण यमन के सक्रिय और आक्रामक हूती विद्रोहियों द्वारा किया गया एक बेहद खतरनाक सैन्य हमला है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती गुट ने अपनी विध्वंसक मिसाइल और ड्रोन शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उस क्षेत्र को निशाना बनाया जहां 'इस्लामी नाटो' के रूप में पहचानी जाने वाली संयुक्त सैन्य ताकतों और गश्त दलों की तैनाती की गई थी। इस अचानक हुए भीषण धमाके और मिसाइल स्ट्राइक ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं, क्योंकि इसे सीधे तौर पर क्षेत्रीय शांति और रक्षा समझौतों पर एक बहुत बड़ा तमाचा माना जा रहा है। विद्रोहियों ने इस हमले के जरिए यह साफ कर दिया है कि वे लाल सागर और आसपास के सामरिक मार्गों पर अपनी पकड़ और दबदबा बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, चाहे उनके सामने कोई भी संयुक्त सैन्य गठबंधन क्यों न खड़ा हो।
सऊदी अरब की रक्षा रणनीति और रणनीतिक फैसलों पर खड़े हुए तीखे सवाल
इस हाई-प्रोफाइल और सनसनीखेज हमले के बाद से खाड़ी के सबसे ताकतवर देश माने जाने वाले सऊदी अरब की रक्षा नीति और सैन्य रणनीतियों पर विश्लेषकों द्वारा गंभीर सवाल उठाए जाने लगे हैं। सऊदी अरब के नेतृत्व में बनाई गई या समर्थित क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाओं और इस इस्लामिक गठबंधन की तैनाती पर जब इस तरह से सरेआम हमला होता है, तो इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर बड़े प्रश्नचिह्न लग जाते हैं। जानकारों का कहना है कि तमाम आधुनिक रक्षा प्रणालियों और अरबों डॉलर के हथियारों के बावजूद यदि हूती विद्रोही इस तरह के दुस्साहसिक हमलों को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं, तो इसका मतलब साफ है कि कहीं न कहीं रणनीतिक प्लानिंग या खुफिया तंत्र में बड़ी चूक हो रही है। इस घटना के बाद रियाद और अन्य प्रमुख राजधानियों में आपातकालीन बैठकों का दौर शुरू हो गया है और इस बात पर मंथन किया जा रहा है कि इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अब कौन सा नया और कड़ा सैन्य कदम उठाया जाए।
लाल सागर में तनाव और वैश्विक व्यापार मार्गों पर मंडराता नया खतरा
हूती विद्रोहियों द्वारा इस्लामिक नाटो की तैनाती को उड़ाए जाने की इस घटना ने केवल क्षेत्रीय राजनीति को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि इसके वैश्विक स्तर पर भी दूरगामी और गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक हैं, जिनके जरिए अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और क्रूड ऑयल की सप्लाई होती है। जब इस संवेदनशील क्षेत्र में इस स्तर का सैन्य संघर्ष और धमाके होने लगते हैं, तो वैश्विक शिपिंग कंपनियों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं। मालवाहक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में ऊर्जा संकट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। अमेरिका और पश्चिमी देश भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मध्य पूर्व की यह सुलगती आग किसी भी वक्त एक बड़े युद्ध में तब्दील हो सकती है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।