लाल सागर में फिर हुआ भारतीयों की बोट पर हमला, 14 नागरिकों की जान बचाने में जुटा दूतावास

लाल सागर में फिर हुआ भारतीयों की बोट पर हमला, 14 नागरिकों की जान बचाने में जुटा दूतावास

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और माल ढुलाई के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शुमार लाल सागर (Red Sea) एक बार फिर सुलग उठा है और वहां से आ रही खबरें बेहद डरावनी और चिंताजनक हैं। भूमध्य को जोड़ने वाले इस सामरिक मार्ग पर आए दिन होने वाले भू-राजनीतिक संघर्षों और समुद्री लुटेरों या विद्रोही गुटों की गतिविधियों के बीच अब भारतीय नागरिकों को निशाना बनाया जाने लगा है। हाल ही में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसमें लाल सागर के संवेदनशील जलक्षेत्र में भारतीय नागरिकों से भरी एक बोट पर अचानक ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। इस बोट पर कुल 14 भारतीय नागरिक सवार थे, जो अपनी रोजी-रोटी कमाने और समुद्री संचालन के सिलसिले में उस क्षेत्र में मौजूद थे। इस अप्रत्याशित और खतरनाक हमले के बाद से न केवल समूचे समुद्री जगत में हड़कंप मच गया है, बल्कि भारत में बैठे नाविकों के परिवारों की सांसे भी अटक गई हैं। युद्धग्रस्त और तनावपूर्ण समुद्री इलाकों में इस तरह के हमलों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था और सीफेयरर्स (Seafarers) की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब यह बोट लाल सागर के एक खास समुद्री गलियारे से गुजर रही थी, तभी अचानक अज्ञात हमलावरों या संघर्षरत गुटों की ओर से इस पर गोलाबारी और विध्वंसक गतिविधियां शुरू कर दी गईं। हमले की अचानक हुई इस कार्रवाई से बोट पर सवार नाविकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वहां चीख-पुकार मच गई। बोट के पिछले और ऊपरी हिस्सों में भारी नुकसान की खबरें हैं, जिससे चालक दल के सदस्यों की जान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, गनीमत यह रही कि हमले की शुरुआती चपेट से बचने के बाद भारतीय नागरिकों ने तुरंत आपातकालीन सिग्नल (Emergency Distress Signal) जारी कर दिया और आसपास के जहाजों तथा अपने बेस कैंप से संपर्क साधने में कामयाब रहे। लेकिन लगातार हो रही गोलीबारी और मिसाइल या ड्रोन जैसे खतरों के साये के बीच इन 14 नागरिकों के लिए एक-एक पल काटना पहाड़ जैसा साबित हो रहा है। वे अपनी जान बचाने के लिए बोट के सुरक्षित हिस्सों या गुप्त कक्षों में शरण लेकर मदद का इंतजार कर रहे हैं।

जैसे ही लाल सागर में भारतीय नागरिकों पर इस नए हमले की खबर नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय (MEA) और संबंधित क्षेत्रीय भारतीय दूतावास तक पहुंची, प्रशासनिक गलियारों में तुरंत आपात बैठक बुलाई गई। भारत सरकार ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत युद्धस्तर पर बचाव अभियान (Rescue Operation) शुरू कर दिया है। प्रभावित देशों में स्थित भारतीय दूतावास और राजनयिक मिशन लगातार स्थानीय समुद्री अधिकारियों, नौसेना के कमांडरों और अंतरराष्ट्रीय मेरीटाइम सिक्योरिटी फोर्सेस के संपर्क में बने हुए हैं। संकट में फंसे उन 14 भारतीय नागरिकों की सटीक लोकेशन को ट्रैक कर लिया गया है और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव कूटनीतिक और सामरिक प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और निगरानी विमानों को भी ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से ही तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आश्वासन दिया है कि सरकार प्रत्येक भारतीय नागरिक की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जब तक सभी 14 नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश नहीं लाया जाता, तब तक राहत अभियान जारी रहेगा।

लाल सागर और अदन की खाड़ी में लगातार बढ़ते इन हमलों ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के शिपिंग और कमर्शियल सेक्टर की नींद उड़ा दी है। इस मार्ग से गुजरने वाले ऊर्जा संसाधनों, तेल के टैंकरों और मालवाहक जहाजों को लगातार निशाना बनाए जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत बढ़ती जा रही है और बीमा की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जिनके ऊर्जा आयात और निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है, यह स्थिति रणनीतिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है। दूसरी ओर, जिन 14 भारतीय नागरिकों पर यह हमला हुआ है, उनके गृह राज्यों और गांवों में उनके परिजन गहरी चिंता और खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। हर गुजरते घंटे के साथ टीवी स्क्रीन और फोन की घंटी पर टकटकी लगाए बैठे इन परिवारों की आंखें बस अपनों की सुरक्षित घर वापसी का इंतजार कर रही हैं। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि वैश्विक कूटनीति के दांव-पेच और क्षेत्रीय युद्धों की कीमत अक्सर उन आम मेहनतकश नागरिकों को चुकानी पड़ती है जो सात समंदर पार अपनी मेहनत की रोटी कमाने जाते हैं।