लंदन में भारतीय मूल के कारोबारी का कांड, क्यों छिना ब्रिटिश शाही सम्मान? किराए पर मचा हंगामा

लंदन में भारतीय मूल के कारोबारी का कांड, क्यों छिना ब्रिटिश शाही सम्मान? किराए पर मचा हंगामा

लंदन के रीयल एस्टेट और सामाजिक गलियारों में अपनी खास पहचान रखने वाले भारतीय मूल के प्रमुख कारोबारी और मकान मालिक निरपाल सिंह रियात (Nirpal Singh Riat) इन दिनों एक बड़े और शर्मनाक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। कभी अपनी समाज सेवा, परोपकारी कार्यों और पंजाबी समुदाय के कल्याण के लिए ब्रिटेन के प्रतिष्ठित शाही सम्मान 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर' (OBE) से नवाजे गए इस बिजनेसमैन की एक करतूत ने पूरे ब्रिटिश साम्राज्य और प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। ब्रिटेन के राष्ट्रप्रमुख किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) ने निरपाल सिंह रियात का शाही सम्मान आधिकारिक तौर पर रद्द करते हुए उनका नाम प्रतिष्ठित लिस्ट से बाहर कर दिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे लंदन में किराए के मकानों से जुड़ा एक बड़ा हाउसिंग स्कैम और फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने यूके के रियल एस्टेट मार्केट से लेकर ब्रिटेन के कैबिनेट ऑफिस तक में सनसनी फैला दी है।

#1. क्या है लंदन का वह विवादित किराए का मकान कांड जिसने उड़ाए उड़नछू?

लंदन के वेस्ट हौनस्लो (Hounslow) और आसपास के इलाकों में संपत्ति के मालिक निरपाल सिंह रियात पर आरोप लगे कि उन्होंने आवासीय संपत्तियों को अवैध तरीके से छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित किया और बेहद घटिया, सीलन भरे (Damp and Squalid) तथा असुरक्षित कमरों में तब्दील कर दिया। इसके बाद उन्होंने इन बदहाल और अमानवीय परिस्थितियों वाले कमरों को लाचार प्रवासियों और किरायेदारों को भारी किराए पर चढ़ाना शुरू कर दिया। स्थानीय काउंसिल और हौनस्लो नगर निगम को जब इस अमानवीय हाउसिंग रैकेट की शिकायतें मिलीं, तो जांच में पाया गया कि ये मकान न केवल स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक थे, बल्कि निर्माण और सुरक्षा मानकों का भी सरेआम उल्लंघन कर रहे थे। अदालत ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए निरपाल रियात पर 3,00,000 पाउंड (लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक) का भारी-भरकम जुर्माना ठोका था।

#1. किंग चार्ल्स तृतीय ने क्यों लिया सम्मान वापस लेने का ऐतिहासिक फैसला?

ब्रिटेन में किसी भी नागरिक को मिला 'ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर' (OBE) या अन्य शाही सम्मान बहुत दुर्लभ और सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिना जाता है। लेकिन ब्रिटिश कानून और 'ऑनर फोरफीचर कमेटी' (Honours Forfeiture Committee) के नियमों के मुताबिक, यदि कोई सम्मानित व्यक्ति किसी आपराधिक या नैतिक पतन (Moral Turpitude) वाले कृत्य में संलिप्त पाया जाता है जिससे सम्मान प्रणाली की साख पर धब्बा लगे, तो उसका सम्मान वापस ले लिया जाता है। हौनस्लो काउंसिल के पार्षदों द्वारा यूके कैबिनेट ऑफिस में निरपाल रियात के खिलाफ मामला भेजे जाने के बाद फोरफीचर कमेटी ने निष्पक्ष समीक्षा की। जांच के अंत में पाया गया कि रियात के इस आचरण ने 'शाही सम्मान प्रणाली को बदनाम किया' (Bringing the honours system into disrepute) है। इसके बाद किंग चार्ल्स तृतीय की मंजूरी के बाद आधिकारिक तौर पर उनकी यह उपाधि छीन ली गई।

#1. समाज सेवा के नाम पर मिला सम्मान और पर्दे के पीछे का काला सच

गौरतलब है कि निरपाल सिंह रियात को साल 2010 में ब्रिटेन के शाही परिवार और सरकार द्वारा OBE का सम्मान दिया गया था। उन्हें यह उपाधि लंदन में बसे पंजाबी समुदाय के उत्थान, चैरिटी कार्यों और सामाजिक सेवा में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए दी गई थी। हालांकि, वक्त के साथ इस सम्मान के पीछे छुपा कारोबारी लालच सामने आ गया। यह पहली बार नहीं था जब निरपाल रियात कानूनी पचड़े में पड़े हों; इससे पहले भी वर्ष 2009 में उन पर अवैध प्रॉपर्टी रूपांतरण के मामले में 20,000 पाउंड का जुर्माना लगाया जा चुका था। बार-बार चेतावनियों के बावजूद जब उन्होंने किराएदारों का शोषण जारी रखा और घटिया परिस्थितियों में लोगों को रहने के लिए मजबूर किया, तो स्थानीय अधिकारियों ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया।

#1. यूके हाउसिंग मार्केट और 'रॉग लैंडलॉर्ड्स' पर कसा शिकंजा

इस पूरे प्रकरण ने ब्रिटेन में काम कर रहे अवैध मकान मालिकों (Rogue Landlords) के बीच एक कड़ा और डर का संदेश भेजा है। हौनस्लो काउंसिल और ब्रिटेन की मानवाधिकार संस्थाओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह ऐतिहासिक फैसला दिखाता है कि कोई व्यक्ति चाहे कितना भी रईस, शक्तिशाली या सम्मानित क्यों न हो, यदि वह असहाय किरायेदारों की लाचारी का फायदा उठाकर घटिया मकान किराए पर देगा और मुनाफाखोरी करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। निरपाल सिंह रियात का मामला लंदन में रह रहे अन्य भारतीय और एशियाई प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है, और इसे यूके हाउसिंग सेक्टर में पारदर्शिता लाने के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।