लेगो ब्रिक्स, बियर की बोतल, पेचकस... डॉक्टर्स ने रेक्‍टम से निकाली ऐसी-ऐसी चीजें, जानकर हिल जाएगा आपका दिमाग

लेगो ब्रिक्स, बियर की बोतल, पेचकस... डॉक्टर्स ने रेक्‍टम से निकाली ऐसी-ऐसी चीजें, जानकर हिल जाएगा आपका दिमाग

चिकित्सा जगत में आए दिन ऐसे कई अजीबोगरीब और चौका देने वाले मामले सामने आते हैं जिन्हें सुनकर आम इंसान का दिमाग सुन्न हो जाता है और डॉक्टर भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पाते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही बेहद चौंकाने वाला और असाधारण मेडिकल केस सामने आया है जिसने न केवल देश के चिकित्सा विशेषज्ञों को बल्कि आम जनता को भी बुरी तरह हिलाकर रख दिया है। एक मरीज की गंभीर हालत के बाद जब उसे अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में लाया गया और डॉक्टरों ने उसकी शारीरिक जांच शुरू की, तो एक्स-रे और स्कैनिंग की रिपोर्ट देखकर मेडिकल स्टाफ के होश उड़ गए। मरीज के मलाशय यानी रेक्टम के अंदर कोई सामान्य ट्यूमर या संक्रमण नहीं था, बल्कि वहां लोहे का पेचकस, कांच की पूरी बियर की बोतल और बच्चों के खेलने वाले प्लास्टिक के लेगो ब्रिक्स (Lego Bricks) जैसी भारी-भरकम और खतरनाक चीजें फंसी हुई थीं। इस सनसनीखेज मामले ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि आखिर किस मानसिक स्थिति या किन अजीबोगरीब परिस्थितियों में लोग इस तरह की अजीब हरकतों को अंजाम देते हैं।

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब संबंधित मरीज असहनीय पेट दर्द, आंतरिक ब्लीडिंग और सांस लेने में हो रही भारी तकलीफ के बाद स्थानीय अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। मरीज शुरुआत में अपने दर्द और बीमारी की असली वजह को छिपाने की कोशिश कर रहा था और डॉक्टर लगातार उससे पुरानी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के बारे में पूछताछ कर रहे थे। लेकिन जब दर्द लगातार असहनीय होने लगा और शारीरिक स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी, तब सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया गया। जैसे ही रेडियोलॉजी विभाग की रिपोर्ट कंप्यूटर स्क्रीन पर आई, डॉक्टरों की टीम सन्न रह गई क्योंकि रेक्टम के अंदर बाहरी वस्तुओं का एक पूरा जखीरा मौजूद था। इन विदेशी वस्तुओं (Foreign Bodies) के कारण मरीज की आंतों में गंभीर रूप से रुकावट आ चुकी थी और यदि समय रहते मेडिकल हस्तक्षेप नहीं किया जाता, तो आंतें फटने (Bowel Perforation) से मरीज की कुछ ही घंटों में जान भी जा सकती थी। डॉक्टरों के लिए यह मामला शारीरिक इलाज के साथ-साथ एक बेहद संवेदनशील और जटिल सर्जिकल चुनौती बन चुका था जिसमें बिना एक सेकंड गंवाए तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

मरीज की जान बचाने के लिए देश के जाने-माने सर्जन और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की विशेष टीम को तुरंत मैदान में उतारा गया। इस तरह के मामलों में सर्जरी करना अपने आप में बहुत बड़ा जोखिम होता है क्योंकि रेक्टम और कोलन के टिशू बेहद नाजुक होते हैं और जरा सी भी लापरवाही से मरीज की जान को खतरा हो सकता है। डॉक्टरों ने बेहद सूझबूझ और अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक उपकरणों के साथ-साथ मिनिमल इनवेसिव सर्जरी तकनीकों का प्रयोग किया ताकि मरीज की आंतों को कम से कम नुकसान पहुंचे। एक-एक करके जब डॉक्टरों ने कांच की पूरी बियर की बोतल, नुकीले पेचकस और छोटे-छोटे लेगो ब्रिक्स के टुकड़ों को बाहर निकालना शुरू किया, तो ऑपरेशन थियेटर में मौजूद हर शख्स हैरान था कि आखिर इतनी बड़ी चीजें शरीर के उस हिस्से में कैसे समा सकती हैं। सर्जरी के दौरान यह विशेष ध्यान रखा गया कि कांच की बोतल अंदर ही टूटने न पाए, क्योंकि यदि बोतल टूट जाती तो अंदरूनी अंगों को गंभीर क्षति पहुंच सकती थी और टॉक्सिक संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता था। करीब कई घंटों तक चली इस मैराथन और बेहद जोखिम भरी सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने सभी चीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में पूर्ण सफलता हासिल की और मरीज की जान बचा ली।

इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों ने भी इस पर गहरी चिंता और विचार व्यक्त किया है। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस तरह के मामले अक्सर रेक्टल फॉरेन बॉडी इंसर्शन (Rectal Foreign Body Insertion) या असाधारण मानसिक विकारों, ऑटो-इरोटिक बिहेवियर (Auto-erotic behavior) या कभी-कभी दुर्भावनापूर्ण दुर्घटनाओं से जुड़े होते हैं। कई बार लोग यौन उत्तेजना या मानसिक उत्सुकता के चलते इस तरह की बेहद खतरनाक और जोखिम भरी हरकतों को अंजाम दे बैठते हैं, लेकिन जब चीजें शरीर के भीतर फंस जाती हैं और वे खुद बाहर नहीं निकल पातीं, तो वे शर्म और डर के मारे इलाज में देरी कर देते हैं। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के मामलों में मरीज शारीरिक रूप से तो ठीक हो जाते हैं, लेकिन उनकी काउंसलिंग बेहद जरूरी होती है ताकि वे भविष्य में ऐसी किसी भी घातक गलती से दूर रहें। अस्पताल प्रशासन ने इस सफल सर्जरी के बाद लोगों से अपील की है कि यदि कभी भी इस तरह की असामान्य शारीरिक स्थिति या दुर्घटना हो, तो बिना डरे या झिझके तुरंत नजदीकी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि समय पर मिला इलाज ही जिंदगी बचा सकता है।