गीदड़भभकी छोड़ अब खुलेआम दे रहा भारत को परमाणु हमले की धमकी, जानें पूरा मामला

गीदड़भभकी छोड़ अब खुलेआम दे रहा भारत को परमाणु हमले की धमकी, जानें पूरा मामला

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर एक बार फिर से तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। कूटनीतिक मोर्चे पर पूरी तरह से विफल हो चुका पाकिस्तान अब अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और लगातार गीदड़भभकी देने पर उतर आया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठकों में मुंह की खाने के बाद अब पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स और कट्टरपंथी विश्लेषक खुलकर भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। हद तो तब हो गई जब एक पाकिस्तानी टीवी डिबेट के दौरान वहां के एक तथाकथित विशेषज्ञ ने भारत को सीधे तौर पर परमाणु हमले तक की धमकी दे डाली। पानी के बंटवारे और भारत द्वारा संधि में कानूनी संशोधन की मांग से बौखलाया यह पड़ोसी देश अब अपनी परमाणु हथियारों की गिदड़भभकियों के सहारे दुनिया का ध्यान खींचने की नाकाम कोशिश कर रहा है, जिस पर भारतीय रक्षा विशेषज्ञों ने भी कड़ा रुख अपनाया है।

सिंधु जल संधि और भारत के सख्त रुख से क्यों मची है पाकिस्तान में हाहाकार?

सिंधु जल संधि वह ऐतिहासिक समझौता है जो दशकों पहले भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के उचित बंटवारे के लिए हुआ था, लेकिन समय के साथ बदलते सामरिक परिदृश्य और आतंकवाद के साए को देखते हुए भारत ने अब इस ट्रीटी की समीक्षा और इसमें आवश्यक बदलाव करने की दिशा में सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भारत का स्पष्ट मानना है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, और जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद बंद नहीं करता, तब तक पानी के हर कतरे के इस्तेमाल पर कड़ा पुनर्विचार किया जाएगा। जैसे ही भारत ने सिंधु जल संधि के नियमों में संशोधन या इसे कानूनी रूप से होल्ड पर रखने की प्रक्रिया तेज की, वैसे ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था के होश उड़ गए क्योंकि वहां की नदियां सीधे तौर पर भारत से होकर बहती हैं। इसी बात से बुरी तरह घबराया हुआ पाकिस्तान अब कूटनीतिक तर्कों के बजाय अपनी पुरानी परमाणु धमकियों और गीदड़भभकियों पर उतर आया है।

ओआईसी में नाकामी के बाद पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का मानसिक दिवालियापन कैमरे पर आया नजर

हाल ही में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के मंच पर जब पाकिस्तान ने कश्मीर और अन्य अंदरूनी मुद्दों को उठाने की कोशिश की थी, तो उसे वैश्विक स्तर पर कोई खास तवज्जो नहीं मिली और वह हर जगह बेनकाब होकर रह गया। अपनी इसी कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय फजीहत से बौखलाए पाकिस्तानी मीडिया और रक्षा विशेषज्ञ अब अपनी जनता को बेवकूफ बनाने के लिए और अधिक आक्रामक तथा हिंसक भाषा का प्रयोग करने लगे हैं। एक लाइव टीवी डिबेट के दौरान जब सिंधु जल संधि पर चर्चा हो रही थी, तो एक पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने सारे अंतरराष्ट्रीय नियमों और कूटनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए यह तक कह डाला कि अगर भारत ने उनका पानी रोका, तो वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस तरह की बचकानी और गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान का मानसिक ढांचा कितना संकीर्ण हो चुका है और वे अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए हमेशा परमाणु ब्लैकमेलिंग का ही सहारा लेते हैं।

भारत की रणनीतिक बढ़त और वैश्विक समुदाय के बीच बेनकाब होता पाकिस्तान का असली चेहरा

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का यह मानना है कि पाकिस्तान की यह तथाकथित परमाणु धमकी अब दुनिया के सामने एक पुराना और घिसा-पिटा हथकंडा बन चुकी है। आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करता है और किसी भी देश की परमाणु ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने वाला नहीं है। भारतीय कूटनीति ने वैश्विक मंचों पर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान किस तरह अपनी आर्थिक बदहाली और भुखमरी से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के युद्धोन्माद का सहारा लेता है। सिंधु जल संधि के नियमों के दायरे में रहकर भारत अपने राष्ट्रीय हितों और जल संसाधनों के सदुपयोग के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, और इसके लिए उसे किसी भी देश की धमकियों से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। पाकिस्तान की इन बचकानी हरकतों से केवल उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बची-खुची साख भी पूरी तरह मटियामेट हो रही है।

परमाणु धमकियों से नहीं डिगेगा भारत, जल सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि

अंत में यह स्पष्ट हो जाता है कि सिंधु जल संधि जैसे तकनीकी और द्विपक्षीय मामलों पर जब तर्क के स्तर पर पाकिस्तान के पास कहने को कुछ नहीं बचता, तो वह परमाणु हथियारों की गिदड़भभकियों का सहारा लेकर अपनी कमजोरी को छिपाने की कोशिश करता है। भारत सरकार ने अपनी जल सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और भविष्य में भी देश के हितों को ध्यान में रखते हुए ही कड़े और निर्णायक फैसले लिए जाएंगे। पाकिस्तान की इन खोखली धमकियों से भारत की नीतियों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है, बल्कि इससे पूरी दुनिया के सामने एक बार फिर यह साफ हो गया है कि आतंकवाद को पालने वाला यह देश किस हद तक मानसिक दिवालियापन के दौर से गुजर रहा है।