Nepal Flash Flood: सैलाब आता देख भी चुप रहा ड्रैगन, बता देता तो बच जाती सैकड़ों जानें
पड़ोसी देश नेपाल से हाल ही में सामने आई बाढ़ और फ्लैश फ्लड (Flash Flood) की विनाशकारी तस्वीरों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। पलक झपकते ही नदियों का जलस्तर इस कदर बढ़ गया कि बस्तियों की बस्तियां पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गईं। इस भयानक जलप्रलय ने न जाने कितने परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया और सैकड़ों लोगों को अपनी आगोश में सुला लिया। जैसे-जैसे इस त्रासदी के पीछे के कारणों की परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस तबाही को टाला जा सकता था। तमाम मौसम विशेषज्ञों, भूवैज्ञानिकों और रणनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि यदि समय रहते ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से जुड़ी सटीक जानकारियां और चेतावनी साझा कर दी जाती, तो इस भीषण तबाही से होने वाले जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। इस पूरी त्रासदी के केंद्र में अब पड़ोसी देश चीन यानी 'ड्रैगन' की संदेहास्पद खामोशी और उसकी गैर-जिम्मेदाराना नीतियां सबसे बड़ा मुद्दा बन गई हैं।
तिब्बत से आने वाली नदियों पर बने बांध और चीन की चुप्पी का रहस्य
नेपाल में अचानक आए इस फ्लैश फ्लड के पीछे सबसे बड़ा कारण तिब्बत के उन उच्च पर्वतीय क्षेत्रों को माना जा रहा है जो भौगोलिक रूप से चीन के नियंत्रण में आते हैं। तिब्बत की तरफ से बहने वाली नदियां जो आगे चलकर नेपाल की मुख्य नदियों का रूप लेती हैं, उनके ऊपरी हिस्सों में चीन द्वारा बड़े-बड़े जलविद्युत बांध और जलाशय बनाए गए हैं। जब मौसम खराब होता है या ग्लेशियर पिघलने के कारण अत्यधिक जलभराव की स्थिति बनती है, तो बांधों से पानी छोड़ने या प्राकृतिक झीलों के ओवरफ्लो होने की पूरी जानकारी ऊपरी हिस्से में बैठे प्रशासन के पास सबसे पहले होती है। लेकिन आरोप यह लग रहा है कि चीन ने इन संवेदनशील हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और जलस्तर में होने वाले खतरनाक बदलावों की जानकारी समय रहते नेपाल सरकार या भारतीय एजेंसियों के साथ साझा नहीं की। ड्रैगन की यह आपराधिक खामोशी उस वक्त और भी अधिक संदिग्ध हो जाती है जब सैटेलाइट डाटा यह गवाही देते हैं कि आपदा आने से काफी पहले ही जलस्तर बढ़ने के संकेत मिल चुके थे।
समय पर चेतावनी मिलती तो बच सकती थीं सैकड़ों बेकसूर जिंदगियां
आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की दुनिया में यह सर्वविदित सत्य है कि किसी भी फ्लैश फ्लड या अचानक आने वाली बाढ़ से मुकाबले के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) यानी पूर्व चेतावनी प्रणाली सबसे बड़ा हथियार होती है। यदि नेपाल प्रशासन या स्थानीय नागरिकों को कुछ घंटे या कुछ मिनट पहले भी यह संदेश मिल जाता कि ऊपर पहाड़ों से पानी का एक महासैलाब उनकी तरफ बढ़ रहा है, तो लोग सुरक्षित स्थानों और ऊंची पहाड़ियों की तरफ भाग सकते थे। लेकिन चीन की तरफ से किसी भी प्रकार की समय पर सूचना न मिलने के कारण नेपाल की घाटियों में सो रहे या अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त लोग इस जलप्रलय की चपेट में अचानक आ गए। रात के अंधेरे या सुबह के वक्त जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक उनके चारों तरफ पानी ही पानी था। सैकड़ों बेकसूर लोगों की मौत का यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यदि ड्रैगन ने अपने पड़ोसी धर्म का पालन करते हुए समय रहते सूचना दे दी होती, तो आज यह दिल दहला देने वाला मंजर देखने को नहीं मिलता।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और trans-boundary जल डेटा साझा करने की अनिवार्यता
आज के आधुनिक युग में जब पूरी दुनिया तकनीकी रूप से एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, तब ट्रांस-बाउंड्री नदियां (Cross-border Rivers) यानी एक देश से दूसरे देश में बहने वाली नदियों के पानी का डेटा साझा करना अंतरराष्ट्रीय संधियों और मानवीय नैतिकता का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। लेकिन चीन का रवैया हमेशा से अपने पड़ोसी देशों के प्रति बंद दरवाजों और कूटनीतिक गोपनीयता वाला रहा है। वह अपने रणनीतिक और आंतरिक प्रोजेक्ट्स के आंकड़ों को दुनिया के सामने लाने से कतराता है, जिसका सीधा और भयानक खामियाजा नेपाल जैसे छोटे और भौगोलिक रूप से संवेदनशील देशों को भुगतना पड़ता है। नेपाल की इस विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर से इस बात की सख्त जरूरत को रेखांकित कर दिया है कि भारत, नेपाल और चीन जैसे देशों के बीच नदी के जल प्रवाह और मौसम संबंधी पूर्व चेतावनियों के आदान-प्रदान के लिए एक पारदर्शी और मजबूत अंतरराष्ट्रीय तंत्र विकसित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की मानव-निर्मित या लापरवाही से होने वाली आपदाओं को रोका जा सके।
मानवता को झकझोरने वाला सबक और भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी
नेपाल में आया यह फ्लैश फ्लड और ड्रैगन की संदेहास्पद खामोशी इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। जिन परिवारों ने इस आपदा में अपने माता-पिता, बच्चों और अपनों को खोया है, उनके आंसुओं की कोई कीमत नहीं चुका सकता। चीन की इस संवेदनहीनता ने यह साबित कर दिया है कि बड़ी महाशक्तियों के लिए भू-राजनीतिक हित कई बार मानवीय संवेदनाओं से ऊपर हो जाते हैं। नेपाल की इस धरती ने हमें यह बहुत बड़ा सबक सिखाया है कि हमें अपनी सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाना होगा ताकि हमें दूसरों की दया या सूचनाओं पर निर्भर न रहना पड़े। आने वाले दिनों में नेपाल सरकार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई भी देश अपनी तिजोरी या बांधों के दरवाजे खोलने से पहले अपने पड़ोसियों की जिंदगी को खतरे में डालने की ऐसी भूल दोबारा न करे।