इस्लामाबाद में सहमा पाकिस्तान: इमरान खान के समर्थकों की हुंकार से थर्राई शहबाज सरकार
पड़ोसी देश पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से इस वक्त एक बहुत बड़ी, सनसनीखेज और राजनीतिक हलचल मचा देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों और कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार के खिलाफ बुलाई गई एक विशाल विरोध रैली और प्रदर्शन के आह्वान से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार अंदर तक थर्रा उठी है। सरकार और खुफिया एजेंसियों के होश इस बात से उड़े हुए हैं कि तमाम पाबंदियों, गिरफ्तारियों और धारा 144 के सख्त आदेशों के बावजूद हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी राजधानी की तरफ कूच करने के लिए निकल पड़े हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस्लामाबाद आने वाले सभी मुख्य मार्गों, रेड जोन (Red Zone) और सरकारी इमारतों के आसपास के इलाकों को किसी छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस और सुरक्षाबलों ने सुरक्षा के नाम पर सड़कों पर बड़े-बड़े लोहे के कंटेनर्स खड़े कर दिए हैं और टायर पंचर करने वाली नुकीली कीलें (Spikes) तक बिछा दी हैं, ताकि कोई भी वाहन या प्रदर्शनकारी शहर के अंदर प्रवेश न कर सके। सरकार के इस तानाशाही और खौफनाक रवैये के बाद राजधानी के भीतर और बाहर का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है, और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इमरान खान के समर्थकों के इस महाप्रदर्शन के पीछे की मुख्य वजह क्या है, शहबाज सरकार इतनी ज्यादा डरी हुई क्यों है और इस्लामाबाद के मौजूदा हालात कैसे बने हुए हैं।
पाकिस्तान की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से जो राजनीतिक अस्थिरता और टकराव का दौर चल रहा है, वह अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। इमरान खान के समर्थकों का यह स्पष्ट कहना है कि वर्तमान सरकार ने अलोकतांत्रिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। अपनी इन्हीं मांगों और पूर्व पीएम की रिहाई के दबाव को बनाने के लिए पीटीआई ने 'इस्लामाबाद चलो' का आह्वान किया था, जिसके बाद से ही सरकार और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। प्रशासन ने किसी भी संभावित उपद्रव या हिंसक झड़प को रोकने के नाम पर पूरे शहर में इंटरनेट सेवाओं को धीमा कर दिया है और जगह-जगह भारी तादाद में अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) को तैनात कर दिया है। सरकार की यह घबराहट साफ बयां कर रही है कि उसे जनआक्रोश का सामना करने का कितना अधिक डर सता रहा है। आइए जानते हैं कि इस्लामाबाद की सड़कों पर सुरक्षा के क्या-क्या कड़े इंतजाम किए गए हैं और सरकार इस विरोध को कुचलने के लिए किस हद तक उतर आई है।
इस्लामाबाद में किलेबंदी: सड़कों पर बिछाई गई कीलें और सैकड़ों कंटेनर्स से रोके गए रास्ते
इमरान खान के समर्थकों के संभावित मार्च को रोकने के लिए प्रशासन ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी के बीच की सीमाओं को पूरी तरह से सील कर दिया है। शहर के प्रवेश द्वारों पर जो नजारा देखने को मिल रहा है, वह किसी युद्धक्षेत्र से कम नहीं है:
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कंटेनर्स की दीवारें: पंजाब और अन्य प्रांतों से आने वाले नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बड़े-बड़े शिपिंग कंटेनर्स को आड़ा-तिरछा खड़ा करके रास्तों को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया गया है ताकि कोई भी रैली या वाहन राजधानी की सीमा के अंदर न घुस सके।
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नुकीली कीलें और बैरिकेड्स: सुरक्षाबलों ने मुख्य मार्गों पर ऐसी नुकीली लोहे की कीलें और ब्लेड वाले बैरिकेड्स बिछाए हैं, जो वाहनों के टायरों को तुरंत फाड़ सकते हैं और राहगीरों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं।
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भारी पुलिस और सेना की तैनाती: रेड जोन, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और विदेशी दूतावासों वाले इलाकों को सुरक्षाबलों के कड़े पहरे में ले लिया गया है, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
शहबाज सरकार की बढ़ रही है मुश्किलें और क्या हैं इसके राजनीतिक परिणाम?
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार द्वारा इस प्रकार की अत्यधिक किलेबंदी और दमनकारी नीतियां अपनाने से जनता के भीतर आक्रोश और अधिक भड़क रहा है। पुलिस और पीटीआई कार्यकर्ताओं के बीच कई जगहों पर झड़पें होने की भी खबरें सामने आ रही हैं, जिसमें कई लोगों के घायल होने की सूचना है। इमरान खान की पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वे किसी भी धमकी या बाधा से डरने वाले नहीं हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका संघर्ष जारी रहेगा। दूसरी तरफ, शहबाज शरीफ और उनकी गठबंधन सरकार देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए इन प्रशासनिक हथकंडों का सहारा ले रही है। पाकिस्तान की राजधानी में मची इस खलबली ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वहां की सियासी जमीन पर कभी भी कोई बड़ा भूचाल आ सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।