भारत की कूटनीतिक जीत पर भड़के पाकिस्तानी, जानिए पूरा मामला
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक संगठनों की कार्यप्रणाली से इस वक्त पाकिस्तान के लिए एक ऐसी बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक खबर सामने आ रही है, जिसने वहां की अर्थव्यवस्था और कूटनीति की चूलें हिला कर रख दी हैं। विश्व बैंक (World Bank) द्वारा जारी किए गए प्रशासनिक और क्षेत्रीय वर्गीकरण (Regional Classification) में पाकिस्तान को अब औपचारिक रूप से 'दक्षिण एशिया' (South Asia) क्षेत्र से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। विश्व बैंक के इस बड़े और अप्रत्याशित फैसले के बाद वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की स्थिति को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। जहां एक तरफ इस कदम को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस बदलाव के सामने आने के बाद पाकिस्तानी मीडिया, हुक्मरानों और सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पड़ोसी देश के विशेषज्ञ इस फैसले को अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए एक बड़ा आघात मान रहे हैं।
आखिर क्या है विश्व बैंक का नया प्रशासनिक वर्गीकरण और क्यों उठाया गया यह कड़ा कदम?
विश्व बैंक हर साल दुनिया भर के देशों को उनकी भौगोलिक स्थिति, आर्थिक प्राथमिकताओं, वित्तीय सहायता और प्रशासनिक सुगमता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों (Regions) में वर्गीकृत करता है। हाल ही में जब विश्व बैंक ने अपने क्षेत्रीय डेटा स्ट्रक्चर और पॉलिसी पोर्टफोलियो में बदलाव किया, तो उसमें दक्षिण एशिया क्षेत्र की सूची से पाकिस्तान का नाम हटाकर उसे मध्य एशिया या अन्य पश्चिमी एशियाई आर्थिक समूहों के साथ जोड़ा गया है। वैश्विक वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) पर अत्यधिक निर्भरता, लगातार बढ़ता कर्ज और क्षेत्रीय सहयोग के बजाय सुरक्षागत अस्थिरता के चलते विश्व बैंक ने यह प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस बदलाव से अब पाकिस्तान को मिलने वाली फंडिग, विकास ऋण और नीतियों की समीक्षा का पूरा ढांचा ही बदल जाएगा।
भारत की कूटनीतिक जीत क्यों मानी जा रही है यह घटना? विशेषज्ञ कर रहे हैं बड़े दावे
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि विश्व बैंक द्वारा पाकिस्तान को दक्षिण एशिया से अलग करना कूटनीतिक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव और स्थिर आर्थिक विकास की एक बड़ी मुहर है। दक्षिण एशिया क्षेत्र में अब तक भारत के नेतृत्व वाली आर्थिक गतिविधियों और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के परिप्रेक्ष्य में पाकिस्तान को भी एक प्रमुख देश माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से स्थापित किया है और क्षेत्रीय कूटनीति में भारत का कद लगातार ऊंचा हुआ है। इसके विपरीत, पाकिस्तान हर मोर्चे पर पिछड़ता चला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्गीकरण के बाद अब दक्षिण एशिया का मतलब आर्थिक और कूटनीतिक रूप से भारत और उसके अन्य सहयोगी स्थिर पड़ोसी देशों के विकास केंद्रित मॉडल से जोड़ा जाने लगा है।
बौखलाए पाकिस्तानी विश्लेषक और जनता, सोशल मीडिया पर निकाली अपनी भड़ास
जैसे ही यह खबर पाकिस्तान तक पहुँची, वहाँ के राजनीतिक हलकों, अर्थशास्त्रियों और सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया। पाकिस्तानी न्यूज चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस बात को लेकर तीखी बहस छिड़ गई कि आखिर विश्व बैंक ने उनके देश को दक्षिण एशिया से बाहर क्यों किया। कई पाकिस्तानी विश्लेषकों ने इसे भारत की सोची-समझी कूटनीतिक चाल और पश्चिमी देशों के दबाव का नतीजा करार दिया। उनका कहना है कि इस फैसले से दुनिया भर में पाकिस्तान की साख को और अधिक बट्टा लगेगा तथा विदेशी निवेशकों का बचा-कुचा भरोसा भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। दूसरी तरफ, भारत में इस खबर के आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे पाकिस्तान के कुकर्मों और उसकी जर्जर अर्थव्यवस्था का स्वाभाविक परिणाम बताया है, जो यह साबित करता है कि कोई भी देश अपनी गलत नीतियों के दम पर ज्यादा दिनों तक वैश्विक व्यवस्था में सम्मानजनक स्थान नहीं बना सकता।