रूस का SU-30 फाइटर जेट क्रैश, पुतिन का आसमानी शिकारी जमीन पर धड़ाम, कलिनिनग्राद में हादसा

रूस का SU-30 फाइटर जेट क्रैश, पुतिन का आसमानी शिकारी जमीन पर धड़ाम, कलिनिनग्राद में हादसा

वैश्विक रक्षा जगत से इस वक्त रूस के सामरिक बेड़े को लेकर एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने रूसी सैन्य हलकों में हड़कंप मचा दिया है. रूसी वायु सेना का बेहद खतरनाक और आधुनिक माना जाने वाला मल्टीरोल फाइटर जेट सुखोई Su-30SM बाल्टिक सागर के पास स्थित रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र कलिनिनग्राद में भयानक हादसे का शिकार होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. यह फाइटर जेट रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे भरोसेमंद और मारक आसमान के शिकारियों में गिना जाता है, जो अपनी अद्भुत मारक क्षमता और लंबी दूरी तक उड़ान भरने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. इस अप्रत्याशित हादसे के बाद से अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों और रूसी सैन्य अधिकारियों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है, क्योंकि नाटो सीमाओं के बेहद करीब इस तरह के सैन्य विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना कई बड़े भू-राजनीतिक और तकनीकी सवाल खड़े करता है.

रूस के कलिनिनग्राद में कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ यह भयंकर विमान हादसा

रूसी रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट और स्थानीय मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना कलिनिनग्राद क्षेत्र के चेर्न्याखोव्स्क जिले के पास एक नियमित और निर्धारित ट्रेनिंग फ्लाइट यानी प्रशिक्षण उड़ान के दौरान पेश आई. विमान ने सामान्य रूटीन सॉर्टी के तहत उड़ान भरी थी, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद तिमोफीवका और जेल्योनोई बोर गांवों के बीच के निर्जन इलाके में यह नियंत्रण खो बैठा और सीधे जमीन पर आ गिरा. गनीमत यह रही कि विमान किसी घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र में नहीं गिरा, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट टल गया. दुर्घटना के तुरंत बाद इलाके में तेज धमाके की आवाज गूंज उठी और आसमान में धुएं का गुबार छा गया, जिसे देखकर स्थानीय ग्रामीण सहम उठे. रूसी प्रशासन ने इस दुर्घटना की तह तक जाने और इसके सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच आयोग का गठन कर दिया है.

दोनों पायलटों ने सूझबूझ से बचाई अपनी जान, अस्पताल में जारी है इलाज

इस दर्दनाक और बड़े विमान हादसे में सबसे राहत भरी बात यह रही कि विमान के भीतर मौजूद दोनों क्रू मेंबर यानी पायलटों ने अत्यधिक संकट के क्षणों में असाधारण सूझबूझ और तत्परता का परिचय दिया. विमान के पूरी तरह से बेकाबू होने से ठीक पहले दोनों पायलटों ने इमरजेंसी इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए समय रहते खुद को विमान से सफलतापूर्वक अलग कर लिया और पैराशूट के जरिए जमीन पर उतरे. हालांकि जमीन पर उतरने के दौरान वे घायल हो गए और उन्हें तुरंत एक नजदीकी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है. रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि दोनों पायलटों की जान को अब कोई भी खतरा नहीं है, हालांकि वे गंभीर झटके और चोटों से उबरने के लिए चिकित्सीय निगरानी में हैं.

रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है कलिनिनग्राद का इलाका, क्यों अहम है यह क्षेत्र

कलिनिनग्राद क्षेत्र रूस का एक ऐसा भू-भाग यानी एन्क्लेव है जो मुख्य रूसी सीमा से कटा हुआ है और पोलैंड तथा लिथुआनिया जैसे नाटो देशों के बीच बाल्टिक सागर के तट पर पूरी तरह से घिरा हुआ है. इस क्षेत्र में रूस की शक्तिशाली बाल्टिक फ्लीट का मुख्य मुख्यालय स्थित है, जिस वजह से यहां रूसी वायु सेना और नौसेना की गतिविधियां हमेशा बहुत उच्च स्तर पर संचालित होती रहती हैं. नाटो देशों की सीमा के इतने करीब रूसी सैन्य विमानों का इस तरह दुर्घटनाग्रस्त होना पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों के लिए भी गहरी दिलचस्पी का विषय बन गया है. चूंकि यह विमान बिना किसी युद्ध सामग्री के केवल सामान्य प्रशिक्षण उड़ान पर था, इसलिए शुरुआती तौर पर इसे तकनीकी खराबी या मेंटेनेंस से जुड़ी किसी कमी से जोड़कर देखा जा रहा है.

लगातार हो रहे हादसों से रूसी वायु सेना की तकनीकी दक्षता पर उठ रहे बड़े सवाल

पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से रूसी सैन्य विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाओं में तेजी आई है, जिससे रक्षा विश्लेषक चिंता जता रहे हैं. लगातार उच्च ऑपरेशनल टेम्पो, युद्ध अभियानों के दबाव और भारी वर्कलोड के कारण रूसी वायु सेना के विमानों और पायलटों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है, जिसका असर उपकरणों के रखरखाव पर भी देखने को मिल रहा है. Su-30SM जैसे आधुनिक विमान का इस तरह रूटीन ट्रेनिंग के दौरान क्रैश हो जाना रूसी रक्षा विनिर्माण और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति पर भी सवाल खड़े करता है. बहरहाल, पुतिन प्रशासन के लिए यह घटना एक बड़ा वेक-अप कॉल है ताकि भविष्य में इस तरह की तकनीकी त्रुटियों को रोककर अपने सामरिक बेड़े को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके.