अमेरिकी जनरलों को पैसे देकर बुला रहा ताइवान, चीन की नाक के नीचे क्या खतरनाक खेल चल रहा है?
पूर्वी एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सुलगते भू-राजनीतिक गलियारों से एक ऐसा सनसनीखेज और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने ड्रैगन यानी चीन के हुक्मरानों की नींद उड़ाकर रख दी है। दुनिया के सबसे ताकतवर और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप ताइवान को लेकर खबरें आ रही हैं कि वह अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त उच्चाधिकारियों और शीर्ष जनरलों को भारी-भरकम वित्तीय पैकेज, मानदेय और लुभावने अनुबंध देकर अपने देश में आमंत्रित कर रहा है। चीन इस पूरे घटनाक्रम को अपनी संप्रभुता पर एक सीधा प्रहार और अमेरिकी दखलंदाजी के एक नए खतरनाक षड्यंत्र के रूप में देख रहा है। बीजिंग की नाक के ठीक नीचे ताइवान द्वारा अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञों और रणनीतिकारों को इस प्रकार आमंत्रित करने के पीछे का असली खेल क्या है, यह सवाल अब वैश्विक रक्षा और कूटनीति के जानकारों के बीच सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।
ताइवान द्वारा अमेरिकी सैन्य दिग्गजों को बुलाए जाने के पीछे की असली सामरिक रणनीति
ताइवान की सरकार इस समय अपनी रक्षात्मक और आक्रामक सैन्य क्षमताओं को अपग्रेड करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है, क्योंकि उसे हर पल चीन के संभावित सैन्य आक्रमण का आसन्न खतरा सता रहा है। अमेरिकी सेना के पूर्व जनरलों और कमांडरों के पास आधुनिक युद्ध कला, इंडो-पैसिफिक रणनीति और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कार्यशैली का वर्षों का लंबा और अमूल्य अनुभव होता है। इसी अनुभव का फायदा उठाने के लिए ताइवान भारी-भरकम बजट खर्च करके इन अमेरिकी दिग्गजों को सलाहकार के रूप में अपने यहां तैनात कर रहा है ताकि वे ताइवानी सशस्त्र बलों को आधुनिक युद्ध कौशल, ड्रोन तकनीक और असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) की बारीकियां सिखा सकें। पैसे के बल पर अमेरिकी सैन्य अनुभव का यह आयात ताइवान की रक्षा प्रणाली को मजबूत तो कर रहा है, लेकिन साथ ही यह बीजिंग के साथ तनाव की आग में घी डालने का काम भी कर रहा है।
चीन की बौखलाहट और ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव
ताइवान की इस नई रक्षा कूटनीति और अमेरिकी जनरलों की इस द्वीप पर हो रही मौजूदगी से चीन का रक्षा मंत्रालय बुरी तरह भड़का हुआ है और उसने इसे 'आग से खेलने' वाला कदम करार दिया है। चीन का साफ तौर पर यह कहना है कि ताइवान उसका अभिन्न अंग है और किसी भी विदेशी ताकत या सैन्य अधिकारी का इस तरह ताइवान की सेना को प्रशिक्षित करना 'वन चाइना पॉलिसी' का सीधा उल्लंघन है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने वाशिंगटन और ताइपे दोनों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के हथकंडों से ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके जवाब में चीन ने भी ताइवान के चारों ओर अपनी नौसैनिक और वायु सेना की गश्त बढ़ा दी है, जिससे कभी भी किसी बड़ी सैन्य झड़प के भड़कने का खतरा मंडरा रहा है।
अमेरिका और ताइवान का यह गठजोड़ क्या भविष्य में किसी बड़े युद्ध की है प्रस्तावना
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ताइवान द्वारा अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को इस प्रकार अपने पाले में खड़ा करना केवल एक मामूली रक्षा सहयोग नहीं है, बल्कि यह भविष्य के किसी बड़े संघर्ष की एक सोची-समझी तैयारी है। अमेरिका खुलकर भले ही ताइवान की स्वतंत्रता को औपचारिक मान्यता न देता हो, लेकिन 'ताइवान रिलेशंस एक्ट' के तहत वह इस द्वीप को अपनी रक्षा करने के लिए हरसंभव हथियार और रणनीतिक मदद मुहैया करा रहा है। जब अमेरिकी जनरल ताइवान की धरती पर बैठकर वहां के सैनिकों को युद्ध की रणनीतियां समझाएंगे, तो इससे अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी सेना की सीधी भागीदारी का संदेश दुनिया भर में जाएगा। यह स्थिति रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी तर्ज पर एशिया में भी एक बहुत बड़े महाविनाश का बीज बो सकती है, जिसके परिणाम पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता और भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए इसके क्या होंगे दूरगामी परिणाम
एशियाई महाद्वीप में चीन और अमेरिका के बीच चल रही इस वर्चस्व की लड़ाई का असर केवल इन्हीं देशों तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत सहित पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर पड़ेगा। यदि ताइवान जलडमरूमध्य में चीन कोई आक्रामक सैन्य कार्रवाई करता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, तकनीकी हब और सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो सकता है, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा। ताइवान अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता को बचाने के लिए हर मुमकिन कूटनीतिक और सैन्य दांव चल रहा है, वहीं चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। आने वाला वक्त यह तय करेगा कि पैसे और कूटनीति के इस खतरनाक खेल का अंत शांतिपूर्ण समझौते के साथ होता है या फिर यह दुनिया को एक और भीषण युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देता है।