पाकिस्तान में धार्मिक उन्माद का नंगा नाच: ईसाई परिवार के घर और दुकानें फूंकी, जान बचाकर भागे 35 परिवार

पाकिस्तान में धार्मिक उन्माद का नंगा नाच: ईसाई परिवार के घर और दुकानें फूंकी, जान बचाकर भागे 35 परिवार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का एक और खौफनाक मामला सामने आया है, जहां कुछ कट्टरपंथी उपद्रवियों ने एक स्थानीय ईसाई समुदाय को निशाना बनाते हुए जमकर तांडव मचाया। मिली जानकारी के अनुसार, इस हमले के दौरान उपद्रवियों ने कई ईसाई परिवारों के रिहायशी घरों को आग के हवाले कर दिया और उनकी खून-पसीने की कमाई से खड़ी की गई दुकानों को भी पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय अल्पसंख्यकों के बीच खौफ का माहौल बना हुआ है। पाकिस्तान में ईशनिंदा या अन्य धार्मिक मुद्दों को आधार बनाकर अल्पसंख्यकों पर इस तरह के हमले होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार का यह मामला बेहद क्रूर और भयावह है, जिसने एक बार फिर देश की कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों की पोल खोलकर रख दी है।

जान बचाकर गांव छोड़ने को मजबूर हुए 35 से अधिक परिवार

इस भीषण हिंसा और आगजनी के बाद स्थिति इतनी ज्यादा खतरनाक हो गई कि प्रभावित परिवारों के पास अपनी जान बचाने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अमानवीय घटना के बाद लगभग 35 से अधिक ईसाई परिवारों को मजबूरन अपना पुश्तैनी आशियाना और सब कुछ छोड़कर रातों-रात गांव से पलायन करना पड़ा। ठंड और डर के साये में इन परिवारों ने खुले आसमान के नीचे या सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है, जहां उनके सामने रोजी-रोटी और बच्चों की सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन और पुलिस की कथित उदासीनता के कारण उपद्रवियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और बेकसूर लोगों को उनके ही घरों से खदेड़ रहे हैं।

प्रशासन की नाकामी और कट्टरपंथियों के बढ़ते हौसले पर उठे गंभीर सवाल

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गहरी चिंता पैदा कर दी है। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन यदि समय रहते सख्त कदम उठाता, तो उपद्रवियों को इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने का मौका नहीं मिलता। हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी घटना के बाद खानापूर्ति के लिए कुछ गिरफ्तारियां और बयानों का दौर शुरू हो गया है, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं। पाकिस्तान में ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय लगातार डर के साये में जीने को मजबूर हैं और उन्हें आए दिन इस तरह की भीड़तंत्र की हिंसा का सामना करना पड़ता है, जिससे साफ जाहिर होता है कि वहां अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में सरकार पूरी तरह से विफल साबित हो रही है।