इटली में प्रदर्शन के नाम पर हिंसा करने वालों की खैर नहीं, मेलोनी सरकार का बड़ा कदम
यूरोपीय देश इटली (Italy) में इन दिनों कानून-व्यवस्था को लेकर एक बहुत बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। देश की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Prime Minister Giorgia Meloni) की सरकार ने हाल ही में भड़की हिंसक वारदातों, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं पर हमेशा के लिए लगाम कसने के लिए एक अत्यंत कड़ा सुरक्षा कानून (Security Decree) मंजूर किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषणों में इस कानून की तुलना भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में अपनाए गए उस सख्त प्रशासनिक मॉडल से की जा रही है, जिसे आमतौर पर 'योगी वाला कानून' कहा जाता है। इस नए नियम के तहत अब सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या प्रदर्शन की आड़ में अराजकता फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और राज्य की ओर से बेहद कड़े दंडनात्मक उपाय तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
मिलान शहर में हुई थी भारी हिंसा, सड़कों पर उतरे उपद्रवी और पुलिस पर हमले
यह पूरा मामला हाल ही में उत्तरी इटली के प्रमुख आर्थिक व औद्योगिक केंद्र माने जाने वाले मिलान (Milan) शहर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। प्रदर्शनों के दौरान उपद्रवियों और कुछ उग्र समूहों ने सड़कों पर जमकर उत्पात मचाया, दुकानों के शीशे तोड़े, लक्जरी स्टोरों में लूटपाट की और कानून की रक्षा कर रहे पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले किए। इस दौरान दर्जनों पुलिस अधिकारी घायल हो गए और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को तहस-नहस कर दिया गया। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि तोड़फोड़, आगजनी और चोरी करना कोई क्रांतिकारी काम नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से आपराधिक कृत्य है और इसके खिलाफ राज्य का रुख बेहद सख्त और निर्णायक होगा।
नए सुरक्षा कानून की मुख्य बातें: 5 साल की जेल और 20 हजार यूरो तक का भारी जुर्माना
मेलोनी कैबिनेट द्वारा पारित इस नए सुरक्षा कानून (Security Decree) के प्रावधान बेहद कड़े और सख्त संदेश देने वाले हैं। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति पांच या उससे अधिक लोगों के ऐसे किसी समूह का हिस्सा बनता है जो प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और शांति के लिए खतरा पैदा करता है, तो उसे अधिकतम 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा दोषियों पर 20,000 यूरो (भारतीय मुद्रा में लगभग 21 लाख रुपये से अधिक) तक का भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने अपना चेहरा ढंका हुआ है या किसी नागरिक या पुलिसकर्मी को गंभीर चोट पहुंचाई है, तो इस स्थिति में सजा और अधिक बढ़ा दी जाएगी। साथ ही अधिकारियों को यह कानूनी अधिकार भी मिल गया है कि वे हिंसा और तोड़फोड़ से हुए नुकसान की भरपाई तुरंत प्रभाव से उपद्रवियों की संपत्ति से सुनिश्चित करवा सकें।
नाबालिगों की हरकतों के लिए अब माता-पिता को भुगतना होगा अंजाम
इस नए कानून का सबसे अहम और चर्चित पहलू नाबालिगों (Minors) से जुड़ा हुआ है। मिलान की हिंसा में शामिल पाए गए लोगों में एक बड़ी संख्या कम उम्र के युवाओं और किशोरों की थी, जो प्रदर्शन की आड़ में तोड़फोड़ के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल रहे थे। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए सरकार ने प्रावधान किया है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा तोड़फोड़, आगजनी या लूटपाट जैसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके कृत्यों के लिए उसके माता-पिता को सीधे तौर पर वित्तीय रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। माता-पिता को भारी-भरकम हर्जाना और जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा पुलिस को यह भी शक्ति दी गई है कि वे जरूरत पड़ने पर संदिग्ध नाबालिगों को निवारक हिरासत (Preventive Detention) में रख सकें। अब तक इस तरह के कड़े प्रशासनिक एक्शन केवल वयस्कों तक सीमित थे, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर परिवारों तक पहुंच गया है।
मिलान की सड़कों पर सेना की तैनाती और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेलोनी सरकार ने केवल कानूनी बदलाव ही नहीं किए हैं, बल्कि मैदानी स्तर पर भी अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। योजना के अनुसार मिलान और अन्य संवेदनशील शहरों में पुलिस बलों की सहायता के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जा रही है। ये संयुक्त गश्त दल (Mixed Patrols) प्रमुख चौराहों, व्यापारिक केंद्रों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी करेंगे ताकि किसी भी तरह की अराजकता को शुरुआती चरण में ही कुचला जा सके। सरकार का यह मानना है कि विरोध जताना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कड़े फैसले की चर्चा हो रही है और जानकारों का मानना है कि यूरोपीय देशों में बढ़ते शहरी तनाव से निपटने के लिए यह कानून एक बड़ा और कड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।