रूस पहुंचे ट्रंप के दूत, उससे पहले ही पुतिन ने दिया तोहफा, क्या अब खत्म होगी यूक्रेन की जंग?

रूस पहुंचे ट्रंप के दूत, उससे पहले ही पुतिन ने दिया तोहफा, क्या अब खत्म होगी यूक्रेन की जंग?

दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कूटनीति के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ रूस पहुंचे हैं, जहां उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग के एक ऐतिहासिक महल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक बेहद महत्वपूर्ण और गुप्त दौर की वार्ता की है। हालांकि, इस महावार्ता की शुरुआत होने से ठीक पहले ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एक ऐसा बड़ा सद्भावना कदम उठाया और तोहफा दिया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रूस ने पिछले चार सालों से अपनी हिरासत में बंद 74 वर्षीय अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा कर दिया है, जिसे अमेरिका लंबे समय से छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। इस कदम को वॉशिंगटन और मास्को के बीच रिश्तों की बर्फ पिघलने और वर्षों से चले आ रहे रूस-यूक्रेन सैन्य संघर्ष के हमेशा के लिए समाप्त होने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

पुतिन और अमेरिकी दूत की ऐतिहासिक बैठक में किन बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई यह उच्च स्तरीय बैठक केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें शांति प्रक्रिया और आर्थिक सहयोग का एक ठोस खाका तैयार किया गया है। इस वार्ता के दौरान ट्रंप प्रशासन की ओर से यूक्रेन युद्ध को रोकने और शांति स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और प्रस्ताव पेश किए गए। बैठक में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया गया। विटकॉफ ने अमेरिकी नागरिक की सुरक्षित रिहाई के लिए पुतिन का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया, जिसके बाद दोनों नेताओं ने न केवल युद्ध विराम बल्कि दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापारिक और राजनयिक संबंधों को पटरी पर लाने की संभावनाओं पर भी बातचीत की।

क्या अब सच में खत्म होने वाला है रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष

इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद वैश्विक कूटनीति में सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है कि क्या अब यूक्रेन युद्ध अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और यूक्रेन के अधिकारियों ने हाल ही में नार्वे में एक रणनीतिक सुरक्षा ढांचे पर चर्चा की थी, जिसमें यूक्रेन को दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी देने और युद्ध के बाद के आर्थिक पुनर्निर्माण का प्लान शामिल है। विटकॉफ ने इसी प्लान के मुख्य बिंदुओं को पुतिन के सामने रखा है। दूसरी ओर, रूस द्वारा अमेरिकी बंदी की समय से पहले रिहाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मास्को अब तनाव कम करने और बातचीत की मेज पर ठोस नतीजे हासिल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिससे युद्ध विराम की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

अमेरिका और रूस के बीच आर्थिक सहयोग और डीजल निर्यात की नई शुरुआत

शांति वार्ता के साथ-साथ इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को फिर से बहाल करने पर भी गहरी सहमति बनती नजर आई। रूस ने अमेरिका के साथ हुए समझौतों के तहत अपने डीजल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा लिए हैं और जल्द ही रूसी डीजल की बड़ी खेप अमेरिका के लिए रवाना होने जा रही है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में ईंधन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा लाभ आम जनता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिलने लगा है। इसके अलावा, रूस से उर्वरक (फर्टिलाइजर) के निर्यात और अन्य व्यापारिक रियायतों पर भी चर्चा की गई है। यह दिखाता है कि युद्ध समाप्ति के साथ-साथ दोनों देश अपने व्यापारिक और आर्थिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ रहे हैं।

आगामी एपेक सम्मेलन में पुतिन और ट्रंप की आमने-सामने की बैठक के संकेत

सेंट पीटर्सबर्ग में हुई इस महावार्ता का सबसे रोमांचक मोड़ वह रहा जब पुतिन ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधी मुलाकात का प्रस्ताव रखा। रूसी मीडिया के अनुसार, चीन में आयोजित होने वाले आगामी एपेक (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान पुतिन और ट्रंप के बीच एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय बैठक हो सकती है। यदि यह शिखर सम्मेलन तय समय पर आयोजित होता है, तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ साबित हो सकता है। दुनिया भर की खुफिया और कूटनीतिक एजेंसियां इस संभावित बैठक पर टकटकी लगाए हुए हैं, क्योंकि यही वह पल होगा जो तय करेगा कि क्या यूरोप में शांति की स्थायी वापसी होगी या फिर भू-राजनीतिक शक्ति का संतुलन एक नया रूप लेगा।