F-35 को ये क्या हुआ? 5th जेन स्टील्थ फाइटर जेट ने भेजा कोड 7600, होर्मुज के पास मच गई खलबली
वैश्विक रक्षा जगत और सामरिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी और बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने अमेरिकी वायु सेना और खाड़ी देशों के होश उड़ा दिए हैं। दुनिया के सबसे आधुनिक, खतरनाक और पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट F-35 को लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ऐसी असाधारण घटना घटी है जिसने रक्षा विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जलमार्गों में गिने जाने वाले होर्मुज के आसपास उड़ान भर रहे इस अत्याधुनिक फाइटर जेट ने अचानक से 'कोड 7600' ट्रांसपोंडर सिग्नल प्रसारित करना शुरू कर दिया, जिसे विमानन और सैन्य भाषा में कम्युनिकेशंस फेलियर यानी रेडियो संपर्क टूटने का आपातकालीन संकेत माना जाता है। इस रहस्यमयी सिग्नल के मिलते ही अमेरिकी सैन्य कमान और क्षेत्रीय रडार स्टेशनों पर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस अजेय माने जाने वाले फाइटर जेट के भीतर अचानक ऐसी कौन सी तकनीकी या सामरिक आपदा आ गई थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व और इस घटना से मची वैश्विक खलबली
मध्य पूर्व का होर्मुज जलडमरूमध्य वह अत्यंत संवेदनशील समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है और इस वजह से यहां हमेशा अमेरिकी और पश्चिमी देशों के लड़ाकू विमानों की कड़ी गश्त बनी रहती है। इस सामरिक रूप से अति-महत्वपूर्ण क्षेत्र में जब F-35 जैसे अरबों डॉलर के स्टील्थ फाइटर जेट ने अचानक रेडियो संपर्क खोने का कोड प्रसारित किया, तो खाड़ी में तैनात नौसेना और वायु सेना के कमांडरों के माथे पर बल पड़ गए। कोड 7600 का अर्थ होता है कि विमान का पायलट अपने बेस या एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ संवाद स्थापित करने में पूरी तरह असमर्थ हो चुका है, जो दुश्मन के रडार या इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के खतरे की ओर भी इशारा करता है। इस घटना के सामने आते ही अमेरिकी सेना ने तुरंत अपने आपातकालीन प्रोटोकॉल एक्टिवेट कर दिए और यह पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी कि क्या यह किसी तकनीकी खराबी का नतीजा था या फिर किसी बाहरी इलेक्ट्रॉनिक हमले का शिकार हुआ है।
F-35 का कोड 7600 क्या है और क्यों उड़ जाती हैं सैन्य अधिकारियों की नींद
विमानन और रक्षा तकनीकी के जानकारों के अनुसार, जब भी कोई फाइटर जेट या नागरिक विमान कोड 7600 ट्रांसपोंडर कोड सेट करता है, तो इसका मतलब साफ होता है कि विमान का रेडियो सिस्टम काम करना बंद कर चुका है और वह ग्राउंड कंट्रोल से बात नहीं कर पा रहा है। पांचवीं पीढ़ी के F-35 फाइटर जेट को दुनिया का सबसे उन्नत और जैमर-प्रूफ विमान माना जाता है, जिसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स और सुरक्षित डेटा लिंक लगे होते हैं। ऐसे में इस हाई-टेक विमान का कम्युनिकेशंस फेलियर होना इस बात का संकेत देता है कि आधुनिक युद्धक प्रणालियों में भी तकनीकी खामियां आ सकती हैं या फिर दुश्मन देशों द्वारा बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस घटना के बाद से पेंटागन और लॉकहीड मार्टिन के इंजीनियरों के बीच भी बैठकों का दौर शुरू हो गया है ताकि इस बात की गहराई से जांच की जा सके कि क्या इस फाइटर जेट के इंटरनल सिस्टम में कोई गंभीर सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर डिफेक्ट था।
क्या दुश्मन देशों के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का शिकार हुआ अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट
रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस बात की भी बहुत तेज चर्चा छिड़ गई है कि क्या होर्मुज के पास सक्रिय किसी विरोधी देश की ताकतों ने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग उपकरणों का उपयोग करके इस F-35 के संचार तंत्र को बाधित करने का प्रयास किया था। ईरान या क्षेत्र में सक्रिय अन्य ताकतों के पास ऐसे उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर्स मौजूद हैं, जो पश्चिमी देशों के विमानों की फ्रीक्वेंसी को जाम करने की क्षमता रखते हैं। हालांकि अमेरिकी सेना ने अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि यह सिग्नल किसी बाहरी हमले के कारण था या आंतरिक तकनीकी खराबी की वजह से, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं इस बात को साबित करती हैं कि आधुनिक तकनीक पर पूरी तरह से निर्भर सैन्य बेड़े कितने संवेदनशील हो सकते हैं। जब तक विमान सुरक्षित रूप से अपने एयरबेस पर वापस लैंड नहीं हो गया, तब तक अमेरिकी कमांडरों की सांसें अटकी रही थीं क्योंकि इस स्तर के फाइटर जेट का अचानक संपर्क टूटना किसी बड़े खतरे की चेतावनी हो सकता है।
इस घटना के बाद वैश्विक रक्षा बाजार और अमेरिकी सैन्य रणनीति पर पड़ने वाले दूरगामी असर
F-35 फाइटर जेट दुनिया भर के कई देशों की वायु सेना की रीढ़ माना जाता है और अमेरिका इसे अपने सबसे बड़े रक्षा निर्यात के रूप में भी देखता है। ऐसे में इस अजेय और रडार-माਤ देने वाले विमान का होर्मुज के पास इस तरह अचानक रेडियो संपर्क खोना और आपातकालीन कोड भेजना इसके प्रदर्शन पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। दुनिया के अन्य देश जो इस विमान को खरीदने की योजना बना रहे हैं या अपने बेड़े में शामिल कर चुके हैं, वे भी इस घटना की रिपोर्ट पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि चाहे तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, युद्ध के मैदान या रणनीतिक अभियानों में अनिश्चितताएं हमेशा बनी रहती हैं। आने वाले दिनों में इस मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह से साफ हो पाएगा कि आखिर उस दिन आसमान में उस F-35 के साथ असल में क्या घटा था।