पाकिस्तान क्यों बता रहा है मसूद अजहर को अफगानिस्तान में छिपा हुआ? मुनीर और शहबाज की खतरनाक चाल
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आतंकवाद के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहाँ खूंखार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और भारत के सबसे बड़े दुश्मन मसूद अजहर के ठिकाने को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर से बेहद शातिर कूटनीतिक चाल चली है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई, सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार मिलकर अब दुनिया भर की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक नया पैंतरा चल रही है, जिसके तहत वे यह दावा कर रहे हैं कि मसूद अजहर अब पाकिस्तान में नहीं बल्कि पड़ोसी देश अफगानिस्तान की धरती पर सुरक्षित पनाह लिए हुए बैठा है। पाकिस्तान की इस सोची-समझी चाल का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ की ग्रे या ब्लैक लिस्ट से खुद को बचाना और वैश्विक मंचों पर आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के रूप में अपनी फजीहत को टालना है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रावलपिंडी के सुरक्षित सैन्य छावनियों और महफूज ठिकानों में ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे इस ग्लोबल आतंकवादी को अचानक अफगानिस्तान में बसा हुआ बताना पाकिस्तान की उस पुरानी और फरेबी रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वे हमेशा से अपनी जिम्मेदारियों से भागते आए हैं।
#पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का नापाक और पुराना झूठ
आतंकवाद के कारखानों को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान का इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि जब भी अंतरराष्ट्रीय दबाव अपनी चरम सीमा पर पहुँचता है, तो वह अपने पाले हुए आतंकवादियों को या तो भूमिगत कर देता है या फिर उनके ठिकाने बदलने का झूठा प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू कर देता है। मौजूदा समय में जब अमेरिकी और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों की नजरें पाकिस्तान के भीतर सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के कैंपों पर टिकी हुई हैं, तब शहबाज शरीफ और जनरल आसिफ मुनीर की जोड़ी ने यह नया शिगूफा छोड़ा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान के नंगरहार या कंधार के इलाकों में छिपा हुआ है। पाकिस्तान यह अच्छी तरह जानता है कि अफगानिस्तान की वर्तमान तालिबान सरकार के साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रिश्ते अभी पूरी तरह से सामान्य नहीं हैं, और इसी असमंजस का फायदा उठाकर वह अपनी जमीन पर बैठे मास्टरमाइंड आतंकवादियों का ठीकरा काबुल के सिर फोड़ने की नापाक कोशिश कर रहा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, हकीकत यह है कि मसूद अजहर आज भी बहावलपुर या रावलपिंडी के किसी अतिसुरक्षित सैन्य सेफ हाउस में पाकिस्तानी सेना के कड़े पहरे के बीच पूरी सुरक्षा के साथ रह रहा है और वहीं बैठकर भारत के खिलाफ अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए नए-नए षड्यंत्र रच रहा है।
#वैश्विक मंचों पर खुद को बेदाग साबित करने और बड़े प्रतिबंधों से बचने की घिनौनी साजिश
पाकिस्तान की इस ताजा चालबाजी के पीछे एक बहुत बड़ा आर्थिक और राजनीतिक दबाव काम कर रहा है, क्योंकि देश की चरमराई अर्थव्यवस्था और दिवालियेपन के कगार पर पहुँच चुके हालात किसी भी कीमत पर यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का नया दौर शुरू हो। यदि वैश्विक समुदाय और संयुक्त राष्ट्र यह मान लेते हैं कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पल रहे आतंकवादियों पर लगाम लगाने में पूरी तरह से असमर्थ या विफल हो चुका है, तो उसे मिलने वाले अरबों डॉलर के विदेशी कर्ज और आर्थिक पैकेज हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं। यही वजह है कि पाकिस्तानी हुक्मरान और सेना के जनरलों ने मिलकर यह नैरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया है कि मसूद अजहर अब उनके नियंत्रण से बाहर निकल चुका है और वह अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल करके अपनी आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा है। इस झूठे दावे के जरिए वे यह जताना चाहते हैं कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार है और वे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दुनिया के साथ खड़े हैं, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है और पाकिस्तान आज भी दुनिया भर के दहशतगर्दों की सबसे सुरक्षित शरणस्थली बना हुआ है।
#भारत और वैश्विक खुफिया एजेंसियों के रडार पर है पाकिस्तान का यह नया ढकोसला
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और दुनिया भर की प्रमुख आतंकवाद विरोधी विंग्स पाकिस्तान की इन तमाम चालों और बयानों पर बहुत बारीकी से और पैनी नजर बनाए हुए हैं। भारत के राजनयिक और सामरिक विशेषज्ञ अच्छी तरह जानते हैं कि मसूद अजहर जैसे खूंखार आतंकी को पाकिस्तानी सेना की छांव के बिना एक पल भी जिंदा रहना मुमकिन नहीं है, क्योंकि उसे पाकिस्तानी खुफिया तंत्र द्वारा हर तरह के साजो-सामान, सुरक्षा और संचार सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिस प्रकार से भारत ने कूटनीतिक और सैन्य मोर्चे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब किया है, उससे पाकिस्तानी हुक्मरानों के पास अब झूठ बोलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या पश्चिमी देश और वैश्विक वित्तीय संस्थान पाकिस्तान के इस मनगढ़ंत और फरेबी दावे के झांसे में आते हैं या फिर इस बार आतंकवाद के इस सबसे बड़े गढ़ पर कोई निर्णायक और कड़ा शिकंजा कसा जाता है, बहरहाल भारत इस हर動き पर अपनी कड़ी नजर रखे हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठा है।