Prabhat Vaibhav,Digital Desk : लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी की लंबी लाइन और डॉक्टरों पर बढ़ते काम के दबाव को कम करने की दिशा में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री हो चुकी है। मरीजों की शुरुआती जांच से लेकर बीमारी की संभावित पहचान तक, अब एआई डॉक्टरों का स्मार्ट सहायक बनने जा रहा है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़े एक स्टार्टअप ने ऐसा एआई आधारित ओपीडी मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है, जो अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने में मदद करेगा।
आरएमएल अस्पताल से हुआ एमओयू, ओपीडी में शुरू हुआ ट्रायल
इस एआई स्टार्टअप ने हाल ही में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ एमओयू किया है। इसके तहत ओपीडी में एआई आधारित समाधान को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्टार्टअप के निदेशक शुभम राय के अनुसार, यह सिस्टम फिलहाल कैंसर से जुड़े करीब 500 मरीजों के ओपन डेटा पर रिसर्च कर रहा है। अगले चरण में इसमें 5,000 मरीजों का डेटा जोड़ा जाएगा, जिससे एआई की सटीकता और भरोसेमंद क्षमता और बेहतर हो सके।
150 से ज्यादा लक्षणों का करेगा विश्लेषण
इस एआई सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 150 से अधिक लक्षणों के आधार पर मरीज की स्थिति का विश्लेषण करेगा। ओपीडी में मरीज से मिलने वाली शुरुआती जानकारी और लक्षणों को प्रोसेस कर यह सिस्टम डॉक्टर को संभावित बीमारी के बारे में सुझाव देगा।
इससे डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिलेगी कि मरीज को किन जांचों की जरूरत है और इलाज की शुरुआत किस दिशा में करनी चाहिए।
डॉक्टर का समय बचेगा, मरीज को मिलेगा जल्दी इलाज
एआई के जरिए ओपीडी में मरीजों की प्राथमिक छंटनी आसान होगी। इससे डॉक्टरों का समय बचेगा, भीड़ का दबाव कम होगा और मरीजों को सही इलाज जल्दी मिल सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक डॉक्टरों की जगह नहीं लेगी, बल्कि उन्हें बेहतर निर्णय लेने में सहयोग देगी।
जनता के लिए बनेगा हेल्थ ऐप
रिसर्च के साथ-साथ स्टार्टअप एक यूजर-फ्रेंडली मोबाइल एप भी विकसित कर रहा है। भविष्य में यह ऐप आम लोगों को बीमारियों, लक्षणों और इलाज से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का यह प्रयोग आने वाले समय में सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है।




