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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की सियासत में 'गठबंधन' की तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को बड़ा ऐलान कर दिया है। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने साफ कर दिया कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ हाथ नहीं मिलाएगी। उन्होंने इसे विरोधियों की साजिश करार देते हुए कार्यकर्ताओं को 2007 वाला इतिहास दोहराने का संकल्प दिलाया।

'2007 की तर्ज पर पूर्ण बहुमत का लक्ष्य'

मायावती ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस, सपा और भाजपा जैसी पार्टियों की सोच 'संकीर्ण' है और ये सभी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा के विरोधी हैं। उन्होंने कहा, "गठबंधन करने से हमेशा बसपा को ही नुकसान हुआ है, इसलिए पार्टी ने फैसला किया है कि वह अपने बलबूते पर चुनाव लड़ेगी।" मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 'हाथी की मस्त चाल' चलते रहें और विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही 'फेक न्यूज' से गुमराह न हों।

दिल्ली में बंगले के अलॉटमेंट पर तोड़ी चुप्पी

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में मायावती को नया बंगला (Type-8) आवंटित होने पर छिड़ी बहस पर भी उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। मायावती ने बताया कि यह अलॉटमेंट पूरी तरह से सुरक्षा कारणों से किया गया है। उन्होंने 2 जून 1995 के 'स्टेट गेस्ट हाउस कांड' की याद दिलाते हुए कहा कि उन पर जानलेवा हमला हुआ था और वर्तमान में उन पर खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने विरोधियों को नसीहत दी कि इस मुद्दे पर 'ओछी राजनीति' न की जाए।

सपा और भाजपा पर तीखा हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने सपा और भाजपा को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, ये पार्टियां बसपा को सत्ता से दूर रखने के लिए और भी अधिक साजिशें रचेंगी। मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें 'मिशन 2027' की बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का संकेत भी दिया।

अंबेडकरवादियों से एकजुट होने की अपील

मायावती ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर के 'अंबेडकरवादियों' से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बसपा का उद्देश्य दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के आत्मसम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब सपा के 'गुंडाराज' और भाजपा की 'जनविरोधी नीतियों' से ऊब चुकी है और एक बार फिर बसपा की शासन व्यवस्था को याद कर रही है।