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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इराक के कुर्द क्षेत्र एरबिल में हुए एक आत्मघाती ड्रोन हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस हमले में अंतरराष्ट्रीय मिशन पर तैनात फ्रांस के एक सैनिक की मौत हो गई है, जबकि छह अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दुखद घटना की पुष्टि खुद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और इसे अंतरराष्ट्रीय सैन्य बलों पर एक बड़े हमले के रूप में देखा जा रहा है।

इराकी सेना की मदद के दौरान हुआ हमला: राष्ट्रपति मैक्रों ने किया वीरता को नमन

फ्रांसीसी राष्ट्रपति भवन 'एलिसी पैलेस' से जारी बयान में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस हमले पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शहीद सैनिक के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि फ्रांसीसी सैनिक वहां एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी मिशन के तहत इराकी सेना को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे थे। मैक्रों ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में फ्रांस पीछे नहीं हटेगा। हमले के वक्त फ्रांसीसी सैन्य टुकड़ी अपने नियमित अभ्यास और सुरक्षा घेरे में थी, तभी एक विस्फोटक से लदे ड्रोन ने उन्हें निशाना बनाया।

घायलों की हालत नाजुक, एरबिल में सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर

सूत्रों के अनुसार, इस हमले में घायल हुए छह अन्य फ्रांसीसी सैनिकों को तुरंत नजदीकी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। एरबिल, जो इराक का अपेक्षाकृत शांत और सुरक्षित क्षेत्र माना जाता था, वहाँ इस तरह का सटीक ड्रोन हमला सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। घटना के तुरंत बाद पूरे कुर्द क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया है और आसमान में निगरानी बढ़ा दी गई है। सैन्य विशेषज्ञों की एक टीम ड्रोन के मलबे की जांच कर रही है ताकि इसके पीछे छिपे संगठनों का पता लगाया जा सके।

पश्चिम एशिया में बढ़ता बारूदी संकट: वैश्विक शक्तियों की चिंता बढ़ी

इराक और सीरिया के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय बलों पर बढ़ते हमले संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब फैल रहा है। फ्रांसीसी सैनिक की मौत के बाद नाटो (NATO) और अन्य मित्र देशों ने भी इस हमले की निंदा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद फ्रांस और उसके सहयोगी देश एरबिल और आसपास के इलाकों में अपने रक्षात्मक ऑपरेशंस को और कड़ा कर सकते हैं। फिलहाल, पूरा विश्व समुदाय इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि फ्रांस इस हमले का जवाब किस तरह देता है, क्योंकि यह घटना सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन को चुनौती देने वाली है।