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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते बारूदी संकट और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस नाजुक वक्त में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आनन-फानन में सऊदी अरब पहुंचे हैं। रियाद में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ हुई उनकी हाई-प्रोफाइल बैठक ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शहबाज शरीफ ने दो टूक शब्दों में सऊदी अरब को पाकिस्तान का 'बिना शर्त' समर्थन देने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि यह दौरा न केवल दोस्ती को मजबूत करने के लिए है, बल्कि क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से भी बेहद अहम है।

कूटनीति या सुरक्षा की ढाल? शहबाज ने सऊदी को बताया अपना 'भाई'

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई इस मुलाकात में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर लंबी चर्चा हुई। शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब की सुरक्षा और अखंडता को पाकिस्तान की अपनी सुरक्षा से जोड़ते हुए पूर्ण समर्थन का संकल्प दोहराया। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अगर और फैला तो इसका असर पूरी मुस्लिम दुनिया पर पड़ेगा। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बाहरी खतरे की स्थिति में वह सऊदी अरब के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहेगा।

नया रक्षा समझौता और रणनीतिक साझेदारी पर बनी सहमति

इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि दोनों देशों के बीच हुआ नया रक्षा समझौता माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान और सऊदी अरब अब रक्षा क्षेत्र में एक-दूसरे की मदद करने के लिए नई तकनीक और सैन्य सहयोग को साझा करेंगे। समझौते के तहत दोनों देश क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त रक्षा रणनीति पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं। पाकिस्तान, जो पहले से ही सऊदी अरब को सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करता रहा है, अब इस साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।

आर्थिक मदद और क्षेत्रीय शांति के लिए एकजुटता

रक्षा मुद्दों के साथ-साथ शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब से पाकिस्तान में निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। दोनों देशों ने साझा बयान जारी कर कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करेंगे और विवादों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने पर जोर देंगे। क्राउन प्रिंस ने पाकिस्तान की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए इसे 'सच्चा मित्र' करार दिया। इस बैठक के बाद माना जा रहा है कि इस्लामिक जगत में पाकिस्तान और सऊदी अरब का गठबंधन एक नई ताकत के रूप में उभरेगा, जो क्षेत्र के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।