Prabhat Vaibhav,Digital Desk : सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अबूझ मुहूर्त और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और खरीदी गई वस्तु 'अक्षय' (जिसका कभी क्षय न हो) फल देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अज्ञानता में खरीदी गई कुछ वस्तुएं लक्ष्मी को प्रसन्न करने के बजाय घर में दरिद्रता और दुर्भाग्य ला सकती हैं? साल 2026 में अक्षय तृतीया का पर्व 19 और 20 अप्रैल को मनाया जाएगा। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष कार्यों और वस्तुओं की खरीदारी से बचना अनिवार्य है।
इन बर्तनों की खरीदारी बढ़ा सकती है 'राहु' का प्रकोप
अक्षय तृतीया के दिन अक्सर लोग स्टील या एल्युमीनियम के बर्तन खरीद लेते हैं, लेकिन धार्मिक विद्वानों के अनुसार ऐसा करना अशुभ हो सकता है। इस दिन प्लास्टिक, एल्युमीनियम या स्टील की वस्तुएं खरीदने से कुंडली में राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है। इससे जमा की गई पूंजी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है और परिवार में आर्थिक संकट गहरा सकता है। इस दिन केवल सोना, चांदी या तांबे जैसी शुद्ध धातुओं की खरीदारी ही श्रेष्ठ मानी गई है।
भूलकर भी न करें इन तामसिक चीजों का सेवन
अक्षय तृतीया एक सात्विक पर्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस पवित्र दिन पर किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन, मदिरा (शराब) और लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित है। यदि कोई इस दिन तामसिक भोजन करता है, तो उसे देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं होती और परिवार में कलह व बीमारियों का वास होने लगता है। इस दिन पूर्णतः सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए।
तुलसी दल और निर्माण कार्य से जुड़ी सावधानियां
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसके अलावा, इस दिन नए घर का निर्माण कार्य (नींव डालना) शुरू करना भी शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। हालांकि, आप नया घर या फ्लैट खरीद सकते हैं और उसका पंजीकरण करा सकते हैं, लेकिन निर्माण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए ताकि लक्ष्मी मां रुष्ट न हों।
क्या करने से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा?
जहाँ एक ओर वर्जित कार्यों से बचना जरूरी है, वहीं अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन सोना-चांदी खरीदने के अलावा जल से भरे घड़े, सत्तू, पंखा या मौसमी फलों का दान करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। पवित्र भाव से की गई पूजा न केवल रुके हुए कामों को पूरा करती है, बल्कि परिवार में सात पीढ़ियों तक सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी प्रदान करती है।




