Prabhat Vaibhav, Digital Desk : हिंदू धर्म में 'अक्षय तृतीया' (Akshaya Tritiya) का दिन केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक ऐसा अबूझ मुहूर्त है जिसमें किया गया हर शुभ कार्य 'अक्षय' यानी कभी न खत्म होने वाला फल देता है। ज्योतिषी पंडित सुरेश श्रीमाली के अनुसार, 19 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली अक्षय तृतीया इस बार आयुष्मान, रवि और त्रिपुष्कर योग के दुर्लभ महासंयोग के साथ आ रही है। त्रिपुष्कर योग में किए गए निवेश और दान का पुण्य फल तीन गुना बढ़ जाता है।
19 अप्रैल का शुभ मुहूर्त: बिना पंचांग देखे करें हर मांगलिक कार्य
अक्षय तृतीया को 'युगादि तिथि' माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से सत्य युग और त्रेता युग का आरंभ हुआ था। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में होते हैं, जो इसे अत्यंत ऊर्जावान बनाता है।
पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय: सुबह 10:50 से दोपहर 12:10 बजे तक।
विशेष महत्व: इसी दिन गंगा जी का धरती पर अवतरण हुआ था और भगवान परशुराम का प्राकट्य भी इसी तिथि को हुआ था।
सोना नहीं खरीद सकते? इन 5 चीजों से बरसेगा पैसा
आमतौर पर अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, लेकिन अगर बजट कम है, तो शास्त्र सम्मत ये 5 चीजें भी सोने के समान ही फलदायी हैं:
जौ (Barley): शास्त्रों में जौ को 'कनक' (सोने) के समान माना गया है। इसे खरीदकर लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखें।
सेंधा नमक और पीली सरसों: सेंधा नमक घर के वास्तु दोष मिटाता है और पीली सरसों नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सुख-समृद्धि लाती है।
मिट्टी का घड़ा: पानी से भरा मिट्टी का बर्तन खरीदना पृथ्वी तत्व के आशीर्वाद और जीवन में शीतलता का प्रतीक है।
कौड़ी और गोमती चक्र: इन्हें मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। पूजा के बाद तिजोरी में रखने से आर्थिक तंगी दूर होती है।
एकाक्षी नारियल: व्यापार स्थल पर इसे रखने से प्रोफेशनल ग्रोथ में चमत्कारिक लाभ मिलता है।
कुबेर का आशीर्वाद पाने के लिए करें यह विशेष मंत्र जाप
अक्षय तृतीया के दिन ही कुबेर देव को 'धनपति' की उपाधि मिली थी। अपनी धन-संपदा बढ़ाने के लिए इस दिन इस मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें:
"ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये, धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।"
लक्ष्मी जी की कृपा के लिए बीज मंत्र: "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्धलक्ष्म्यै नमः।"
पितृ शांति और दान का महत्व: भूलकर भी न करें ये काम
इस तिथि पर पूर्वजों के निमित्त दान का विशेष महत्व है। पीपल के वृक्ष के नीचे 'पितृसूक्त' का पाठ करें और सफेद मिठाई चढ़ाएं। जल से भरा पात्र दान करने से जीवन की बड़ी बाधाएं टल जाती हैं।
सावधानी: * इस दिन लोहा, प्लास्टिक या कैंची जैसी नुकीली वस्तुएं न खरीदें।
काले रंग के कपड़ों से परहेज करें।
किसी का अपमान या क्रोध न करें, क्योंकि इस दिन की गई बुराई का फल भी 'अक्षय' हो जाता है।




