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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) ने अपने कामकाज के तरीके को पूरी तरह डिजिटल करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले ही दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्यों का आवंटन कर दिया है। मिशन निदेशक पुलकित खरे की इस नई पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

1. ग्रेडिंग नीति: 'क्वांटिटी' नहीं, अब 'क्वालिटी' पर जोर

इस वर्ष पहली बार मिशन ने ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक किया है। अब किसी भी ट्रेनिंग पार्टनर (निजी या सरकारी) को लक्ष्य उनकी पिछली परफॉर्मेंस, बुनियादी ढांचे और प्लेसमेंट रिकॉर्ड के आधार पर दिया गया है।

जवाबदेही: 957 ट्रेनिंग पार्टनर्स को उनकी ग्रेडिंग के अनुसार लक्ष्य आवंटित किए गए हैं।

पारदर्शिता: इम्पैनलमेंट (सूचीबद्ध करना) से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन और डिजिटल होगी।

2. 'स्मार्ट टॉप-अप' और 30 दिन का डेडलाइन

मिशन ने ट्रेनिंग सेंटर्स के लिए नियमों को सरल और सख्त दोनों बनाया है:

समय की बचत: पहले ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 90 दिन मिलते थे, जिसे अब घटाकर मात्र 30 दिन कर दिया गया है।

स्मार्ट टॉप-अप: जो संस्थान अपने आवंटित लक्ष्य को समय से पहले और गुणवत्ता के साथ पूरा करेंगे, उन्हें बैच खत्म होने से पहले ही अतिरिक्त लक्ष्य (Top-up) दे दिया जाएगा।

तिमाही लक्ष्य: इस बार साल भर का लक्ष्य एक साथ देने के बजाय हर तीन महीने (Quarterly) के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, ताकि प्रगति की निरंतर समीक्षा हो सके।

3. 'एआई फॉर ऑल' और आधुनिक कौशल पर फोकस

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशों के तहत, अब प्रशिक्षण केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहेगा।

नई तकनीक: प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 'AI for All' (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), सॉफ्ट स्किल्स, लाइव क्लासेस और इंडस्ट्रियल विजिट को अनिवार्य कर दिया गया है।

समावेशी विकास: कुल लक्ष्यों में 33% महिलाओं, 5% दिव्यांगजनों और वंचित वर्ग के युवाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।