Prabhat Vaibhav,Digital Desk : धर्मनगरी अयोध्या में बुधवार का दिन इतिहास के पन्नों में एक और स्वर्णिम अध्याय की तरह जुड़ गया। देश की प्रथम नागरिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रभु श्री राम की नगरी पहुंचकर न केवल रामलला के चरणों में शीश नवाया, बल्कि राम मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर 'श्री राम यंत्र' की स्थापना भी की। राष्ट्रपति के इस दौरे ने अयोध्या की आध्यात्मिक ऊर्जा को एक नई ऊंचाई दी है। उनके साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति रही।
रामलला की चौखट पर नतमस्तक हुईं राष्ट्रपति
जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राम जन्मभूमि परिसर पहुंचीं, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। राष्ट्रपति ने मुख्य मंदिर में प्रवेश करते ही सबसे पहले रामलला की मनमोहक मूर्ति के दर्शन किए। श्रद्धा भाव में डूबी राष्ट्रपति काफी देर तक हाथ जोड़कर प्रभु की छवि को निहारती रहीं। इसके बाद उन्होंने रामलला की विशेष आरती उतारी। यह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था जब देश के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्तित्व एक सामान्य भक्त की भांति भक्ति रस में सराबोर नजर आया।
'श्री राम यंत्र' की स्थापना और आध्यात्मिक महत्व
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 'श्री राम यंत्र' की स्थापना रहा। मंदिर के गर्भगृह और परिसर की शुद्धि और ऊर्जा के संचार के लिए शास्त्रों के अनुसार इस विशेष यंत्र की स्थापना की गई है। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यंत्र की स्थापना से राम मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति और अधिक सुदृढ़ होगी। राष्ट्रपति ने पूर्ण विधि-विधान और वैदिक अनुष्ठानों के बीच इस प्रक्रिया को संपन्न किया। पुजारियों द्वारा उन्हें मंदिर के ऐतिहासिक महत्व और हाल ही में पूर्ण हुए निर्माण कार्यों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
रामनगरी की स्वच्छता और व्यवस्था देख हुईं गदगद
आरती और पूजन के पश्चात राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर का भ्रमण भी किया। उन्होंने वहां की नक्काशी और स्थापत्य कला की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इससे पहले, अयोध्या पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया। उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर बजरंगबली का आशीर्वाद भी लिया। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन और मुलाकातों में अयोध्या के कायाकल्प और वहां की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह स्थान करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र है और यहां आकर जो शांति मिलती है, वह अवर्णनीय है।
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