Prabhat Vaibhav,Digital Desk : शहर के बहुचर्चित और सनसनीखेज रंगदारी मामले में आरोपी अखिलेश दुबे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ढाई करोड़ रुपये की मोटी रकम की वसूली और पाक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराओं के जाल में फंसे अखिलेश दुबे को कोर्ट से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर उनकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी की अंतिम उम्मीद देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है।
रंगदारी और षड्यंत्र का क्या है पूरा मामला?
कानपुर के इस हाई-वोल्टेज केस ने तब तूल पकड़ा था जब अखिलेश दुबे और उनके साथियों पर एक प्रतिष्ठित व्यापारी से ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगा। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस पूरी साजिश में न केवल करोड़ों की मांग की गई, बल्कि शिकायतकर्ता को बुरी तरह फंसाने के लिए पाक्सो एक्ट का सहारा लेकर एक झूठा जाल बुना गया। पुलिस की चार्जशीट में साफ किया गया है कि आरोपी ने कानून की धाराओं का दुरुपयोग कर पीड़ित को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ने की कोशिश की थी।
कोर्ट ने क्यों सख्त रुख अपनाते हुए खारिज की जमानत?
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जमानत के लिए कई दलीलें पेश कीं, लेकिन अभियोजन पक्ष ने मजबूती से विरोध किया। सरकारी वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि अगर आरोपी को जमानत दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच की दिशा भटक सकती है। अदालत ने माना कि ढाई करोड़ जैसी बड़ी धनराशि की मांग और गंभीर धाराओं का दुरुपयोग समाज में गलत संदेश देता है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद जमानत अर्जी नामंजूर कर दी गई, जिससे आरोपी खेमे में हड़कंप मच गया है।
अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर टिकी हैं निगाहें
लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब अखिलेश दुबे के पास कानूनी विकल्प के तौर पर केवल सुप्रीम कोर्ट का रास्ता बचा है। आरोपी के वकीलों का कहना है कि वे जल्द ही विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेंगे। कानपुर की गलियों से लेकर राजधानी के गलियारों तक इस केस की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इसमें रंगदारी के साथ-साथ पाक्सो एक्ट की आड़ में रची गई साजिश ने कानून के रखवालों को भी हैरान कर दिया था। अब देखना यह है कि क्या देश की सबसे बड़ी अदालत से अखिलेश दुबे को कोई राहत मिलती है या जेल की सलाखों के पीछे ही उनका ठिकाना रहेगा।
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