Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी 'मांवा-धीयां दा सत्कार योजना' के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना एक अजीबोगरीब तकनीकी समस्या में फंस गई है। योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड और बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य है, लेकिन हजारों बुजुर्ग और कामकाजी महिलाओं के लिए यही सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। उम्र के पड़ाव और सालों की हाड़-तोड़ मेहनत के कारण कई महिलाओं की उंगलियों की लकीरें घिस चुकी हैं, जिसके चलते बायोमीट्रिक मशीनें उनके फिंगरप्रिंट को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। इस तकनीकी अड़चन की वजह से पात्र महिलाएं दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मेहनतकश हाथों पर उम्र की मार: मशीनें नहीं पहचान रहीं पहचान
इस योजना के तहत दी जाने वाली सम्मान राशि का इंतजार कर रही महिलाओं का कहना है कि उन्होंने जीवन भर खेतों और घरों में कड़ी मेहनत की है। इस शारीरिक श्रम और उम्र बढ़ने के कारण उनकी उंगलियों के पोरों की प्राकृतिक रेखाएं धुंधली पड़ गई हैं। जब ये महिलाएं सुविधा केंद्रों या बैंकों में वेरिफिकेशन के लिए जाती हैं, तो वहां लगी मशीनें बार-बार 'एरर' दिखाती हैं। यह समस्या विशेष रूप से उन महिलाओं के साथ अधिक आ रही है जो ग्रामीण क्षेत्रों से ताल्लुक रखती हैं और जिनका जीवन कठिन परिश्रम में बीता है। बिना बायोमीट्रिक मिलान के उनके आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
योजना का लाभ लेने में भारी परेशानी: दफ्तरों के चक्कर काट रहीं महिलाएं
सिर्फ बायोमीट्रिक ही नहीं, कई मामलों में आंखों की पुतली (आइरिस स्कैन) की वेरिफिकेशन में भी दिक्कतें आ रही हैं। लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि सरकार ने योजना तो शुरू कर दी, लेकिन इस तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का कोई वैकल्पिक समाधान नहीं निकाला। कई बुजुर्ग महिलाएं घंटों लाइनों में लगने के बाद खाली हाथ घर लौट रही हैं। स्थानीय प्रशासन के पास भी फिलहाल इसका कोई ठोस जवाब नहीं है, जिससे महिलाओं में रोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि लकीरें घिस गई हैं तो क्या उन्हें सरकार की मदद का हक नहीं है?
वैकल्पिक समाधान की उठ रही मांग: क्या करेगी सरकार?
सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रभावित महिलाओं ने मांग की है कि बायोमीट्रिक के बजाय ओटीपी (OTP) आधारित वेरिफिकेशन या फिजिकल वेरिफिकेशन की व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि किसी महिला का फिंगरप्रिंट मैच नहीं हो रहा है, तो उसके पहचान पत्र और संबंधित अधिकारी के सत्यापन को आधार मानकर भुगतान किया जाना चाहिए। जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया, तो योजना का लाभ असली हकदारों तक नहीं पहुंच पाएगा। अब देखना यह होगा कि पंजाब सरकार इस तकनीकी खामी को दूर करने के लिए क्या नया आदेश जारी करती है।
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