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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के बठिंडा से कानून के रखवालों पर ही कानून का शिकंजा कसने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस हिरासत में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में स्थानीय अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का ट्रायल (मुकदमा) चलाने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इस फैसले के बाद पंजाब पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब इन वर्दीधारियों को सलाखों के पीछे जाने और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए कड़ी कानूनी लड़ाई लड़नी होगी।

क्या है पूरा मामला और कैसे हुई थी हिरासत में मौत?

यह मामला बठिंडा के एक स्थानीय पुलिस स्टेशन से जुड़ा है, जहां एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस कस्टडी के दौरान युवक पर अमानवीय अत्याचार किए गए और उसे इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसकी जान चली गई। हालांकि, शुरुआत में पुलिस प्रशासन की ओर से इसे स्वाभाविक मौत या आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन मृतक के परिवार ने हार नहीं मानी और इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों ने पुलिस की कहानी में कई झोल उजागर कर दिए थे।

अदालत की कड़ी टिप्पणी: वर्दी की आड़ में नहीं छिपेगा अपराध

सुनवाई के दौरान माननीय अदालत ने जांच रिपोर्ट और अब तक जुटाए गए सबूतों का बारीकी से अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि पुलिसकर्मियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और हिरासत में मौजूद व्यक्ति की सुरक्षा करने के बजाय उसे मौत के मुंह में धकेल दिया। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि प्रथम दृष्टया यह हत्या का मामला प्रतीत होता है, जिसके लिए संबंधित पांचों पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। न्यायाधीश ने आदेश दिया कि आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत इन पुलिसकर्मियों पर नियमित ट्रायल शुरू किया जाए।

पीड़ित परिवार को मिला न्याय का भरोसा, पुलिस महकमे में खलबली

अदालत के इस फैसले का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार ने स्वागत किया है। परिवार का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि अब उनके बेटे के हत्यारों को कड़ी सजा मिलेगी। दूसरी ओर, इस फैसले ने पंजाब पुलिस के भीतर जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी और उनके निलंबन की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है। कानून के जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन पुलिसकर्मियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो हिरासत में थर्ड डिग्री टॉर्चर को अपना अधिकार समझते हैं। अब सबकी नजरें आगामी ट्रायल और उसमें होने वाली गवाहियों पर टिकी हैं।